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सस्ती दाल से किसान परेशान

1 साल पहले तक 200 रुपए किलो बिकने वाली दाल आज जमीन पर आ गई है। भाव इस तरह गिरे हैं कि उठने का नाम नहीं ले रहे। स्टॉक सीमा से लेकर इंपोर्ट पर ड्यूटी लगाने के साथ चना वायदा दोबारा शुरू करने के बावजूद दाल का दाम लगातार दबाव में है। भारी डिमांड के बाद केंद्र सरकार 10 साल बाद दाल का एक्सपोर्ट खोलने की तैयारी कर रही है। वहज साफ है, किसान परेशान है और सरकार को भी अपना बफर स्टॉक घाटे में बेचना पड़ रहा है। तो इस एक्सपोर्ट से कितना सपोर्ट मिलेगा। दाल के मामले में भारत दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक है यानि दुनिया में सबसे ज्यादा दाल की पैदावार यहीं होती है।

यही नहीं भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल कंज्यूमर भी है, खपत भी सबसे ज्यादा यहीं होती है। और दुनिया में दाल के सबसे बड़े इंपोर्टर भी भारत ही है। पिछले साल 10,000 रुपए क्विंटल के भाव बिकने वाली अरहर की दाल फिलहाल करीब 3000-3500 रुपए क्विंटल पर आ गई है। ऐसे में दूसरी दालें भी जमीन पर हैं। 1 साल पहले कंज्यूमर दाल की महंगाई से परेशान थे, तो अब दाल के किसानों को लागत निकालना मुश्किल है।

सरकार भी हैरान है, क्योंकि 20 लाख टन के बफर स्टॉक को बेचना अब चुनौती बन गया है। लातूर मंडी में अरहर दाल 3,200 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है जबकि इंदौर मंडी में दाल की कीमत 3,000 रुपए प्रति क्विंटल, मुंबई मंडी में दाल की कीमत 3,600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव बिक रही है। वहीं लातूर में उड़द की दाल 4,400 रुपए प्रति क्विंटल, इंदौर में उड़द की दाल 3,600 रुपए प्रति क्विंटल और दिल्ली में 4,100 रुपए प्रति क्विंटल बिक रही है।



English Summary: Farmer's trouble with cheap pulses

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