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इस राज्य में आलू उगाने वाले किसान हुए बदहाल, नहीं मिला फसल का वाजिब दाम

सचिन कुमार
सचिन कुमार

Potato farmer

आलू उगाने वाले किसान बेहाल हैं. उनकी बेहाली अब अपने चरम पर पहुंच चुकी है. उनकी सारे किए कराए पर पानी फिर चुका है. सारी उम्मीदें बिखर चुकी है. ऐसे में यह किसान भाई खुद को लाचार, बेबस और असहाय महसूस कर रहे हैं. इनकी लाचारी का आलम यह है कि इनकी सुध लेने वाला तक कोई नहीं दिख रहा है. 

इन किसानों के बेबसी के बारे में हम आपको सब कुछ पूरे तफसील से बताएंगे, लेकिन उससे पहले आप यह जान लीजिए कि भारत में अगर सबसे ज्यादा कहीं आलू का उत्पादन होता है, तो वो उत्तर प्रदेश का जिला फिरोजाबाद है.

यहां भारत के किसी भी अन्य राज्य की तुलना में सबसे ज्यादा आलू का उत्पादन किया जाता है. यहां सर्वाधिक किसान आलू की खेती में सक्रिय रहते हैं. वहीं, अगर लाभ की बात करें तो कभी उन्हें अच्छा लाभ प्राप्त हो जाता तो कभी उन्हें हानि का सामना भी करना पड़ता है. इस साल भी उन्हें  हानि का सामना ही करना पड़ रहा है. 

उन्हें उनकी फसलों का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा है. लाभ तो दूर की बात रही. अगर कीमत भी निकल जाती है तो हम खुश हो जाते. यह यहां के किसानों का कहना है. वहीं, हर बार की तरह इस बार भी सरकार पर उम्मीद भरी निगाहें टिकी है, लेकिन सरकार की तरफ से कुछ खास सकारात्मक संकेत नजर नहीं आ रहे हैं.

यहां रहने वाले किसान अपनी बेहाली बयां करते हुए कहते हैं कि इस बार आलू की कीमत 400 से 450 रूपए रही है. इस हिसाब से 1 रूपए किलोग्राम की दर से आलू की कीमत बनी. कोल्ड स्टोरेज का किराया भी 110 रूपए है. अब इन सभी खर्चों को मिलाकर आम उपभोक्ताओं तक आलू की कीमत 12 से 15  रूपए प्रति किलोग्राम बनती है, लेकिन किसान भाइयों की बदहाली देखिए कि उन्हें यह कीमत भी नसीब नहीं हो पा रही है.

 किसान भाइयों का कहना है कि उन्हें वह लाभ नहीं मिल पा रहा है, जिसकी उन्हें उम्मीद थी. किसान भाई कहते हैं कि हमने यह सोचकर भारी मात्रा में आलू की खेती की थी इस बार हमें भारी मुनाफा प्राप्त होगा, लेकिन हमारी बदकिस्मती देखिए कि कोल्ड स्टोरेज में आज भी आलू भरा हुआ है. ऐसी नौबत ही नहीं आ रही है कि उसे खाली की जाए. किसान भाई कहते हैं कि अगर ऐसे ही रहा तो सारे आलू वहां रखे रखे खराब हो जाएंगे और हमें भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ जाएगा.

हालांकि, इससे पहले भी आलू उगाने वाले किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा था, लेकिन सरकार का रवैया कहीं से भी सहायक नहीं रहा. इस बार भी कुछ ऐसे ही संकेत दिख रहे हैं. खैर, आगे चल कर क्या  कुछ होता है. यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही बताएगा. तब तक के लिए आप कृषि जगत से जुड़ी हर बड़ी खबर से रूबरू  होने के लिए पढ़ते रहिए...कृषि जागरण.कॉम

English Summary: Farmers growing potatoes are not getting reasonable price

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