जनगणना-2027 को लेकर केंद्र और राज्य सरकार ने जहां संबंधित कर्मियों के तबादले पर पूरी तरह रोक लगा रखी है, वहीं मुजफ्फरपुर जिले में कृषि समन्वयकों के स्थानांतरण की तैयारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकारी आदेश जारी होने के महज कुछ ही दिन बाद जिले में कृषि समन्वयकों के तबादले के लिए न केवल प्रक्रिया शुरू की गई, बल्कि 16 प्रखंडों के 131 समूहों की सूची भी तैयार कर ली गई.
मामला तब सामने आया जब जिला कृषि कार्यालय, मुजफ्फरपुर की ओर से 26 मई 2026 को जारी एक पत्र में कृषि समन्वयकों से स्थानांतरण के लिए तीन-तीन विकल्प मांगे गए. पत्र में एक सप्ताह के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया था.
केंद्र और राज्य सरकार ने क्या कहा था?
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के जनगणना कोषांग की ओर से 7 अप्रैल 2026 को सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजा गया था. प्रधान सचिव-सह-राज्य समन्वयक जनगणना 2027 सी.के. अनिल द्वारा जारी इस पत्र में केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों का हवाला देते हुए स्पष्ट कहा गया था कि जनगणना कार्य में प्रतिनियुक्त किसी भी अधिकारी अथवा कर्मचारी का स्थानांतरण 31 मार्च 2027 तक नहीं किया जाए.
पत्र में कहा गया था कि जनगणना एक वैधानिक और समयबद्ध प्रक्रिया है, इसलिए इससे जुड़े कर्मियों की निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है.
इसके बाद क्या हुआ?
सरकारी निर्देश जारी होने के बाद जिला कृषि पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर ने पत्रांक-1361 जारी कर जिले में पदस्थापित कृषि समन्वयकों के स्थानांतरण एवं पदस्थापन की प्रक्रिया शुरू कर दी.
पत्र में कर्मियों से नाम, गृह जिला, गृह प्रखंड, वर्तमान पदस्थापन स्थल और पसंद के तीन विकल्प भरकर जमा करने को कहा गया. साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई तो स्थानांतरण के संबंध में "अधोहस्ताक्षरी स्वतंत्र होंगे."
131 समूहों की पूरी सूची तैयार
दस्तावेजों के अनुसार जिले के सभी 16 प्रखंडों में कृषि समन्वयकों की तैनाती के लिए 131 समूह चिह्नित किए गए हैं. इनमें सबसे अधिक समूह कुढ़नी प्रखंड में तथा सबसे कम समूह मुरौल प्रखंड में बनाए गए हैं. इससे स्पष्ट होता है कि स्थानांतरण की प्रक्रिया प्रारंभिक स्तर से आगे बढ़कर व्यावहारिक तैयारी के चरण में पहुंच चुकी थी.
सबसे बड़ा सवाल: क्या जनगणना कार्य में लगे हैं कृषि समन्वयक?
पूरा विवाद इसी बिंदु पर टिका है. राज्य सरकार का आदेश केवल उन कर्मियों पर लागू होता है जो जनगणना-2027 के कार्य में प्रतिनियुक्त हैं.
वर्तमान में जनगणना का मकान सूचीकरण एवं आवास गणना चरण चल रहा है, जिसके लिए विभिन्न विभागों के कर्मियों की सेवाएं ली जा रही हैं. इधर कृषि समन्वयकों को भी जनगणना कार्य में लगाया गया है तो स्थानांतरण प्रक्रिया सरकारी निर्देशों के विपरीत मानी जा रही है. वहीं यदि वे जनगणना कार्य से जुड़े नहीं हैं, तो प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए थी.
उठ रहे तीन अहम सवाल?
क्या जिलाधिकारी की जानकारी अथवा स्वीकृति से यह स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू की गई? पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया. हालांकि, लिखे जाने तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी.
क्या किसी प्रकार की विशेष अनुमति प्राप्त की गई थी? वहीं, तिरहुत प्रमंडल के संयुक्त निदेशक (कृषि), एग्रोनॉमी से स्थानांतरण प्रक्रिया के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "इस प्रकार के किसी स्थानांतरण की मुझे कोई जानकारी नहीं है."
जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य के दौरान स्थानांतरण की पहल क्यों की गई? इस संबंध में जब जिला कृषि पदाधिकारी, मुजफ्फरपुर से जारी पत्र के बारे में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने ऐसे किसी पत्र के अपने कार्यालय से जारी होने की जानकारी होने से इनकार किया. उन्होंने कहा, "ऐसा कोई पत्र हमारे कार्यालय से जारी नहीं हुआ है. मुझे इसकी जानकारी नहीं है." बातचीत के अंत में उन्होंने असंतोष जताते हुए अपनी बात समाप्त कर दी.
वरीय अधिकारियों का पक्ष नहीं मिला
स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों के बीच कृषि निदेशालय के वरीय अधिकारियों से भी उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया. हालांकि, समाचार लिखे जाने तक उनसे संपर्क स्थापित नहीं हो सका. ऐसे में इस पूरे प्रकरण पर विभागीय स्तर की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है.
ऐसे में यह मामला और भी गंभीर हो जाता है. एक ओर जिला कृषि पदाधिकारी ने संबंधित पत्र के संबंध में अनभिज्ञता जताई है, वहीं वरीय विभागीय अधिकारियों से भी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है. इस स्थिति में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि मुजफ्फरपुर में कृषि समन्वयकों के स्थानांतरण से संबंधित जो पत्र और पंचायतवार सूची सामने आई है, वह वास्तव में विभागीय स्तर पर जारी की गई थी या नहीं.
यदि ये दस्तावेज आधिकारिक हैं, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है? और यदि ये दस्तावेज आधिकारिक नहीं हैं, तो फिर इनके जारी होने के बाद अब तक विभाग की ओर से कोई खंडन, स्पष्टीकरण अथवा जांच की पहल क्यों नहीं की गई? ऐसे कई सवाल हैं जिनका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है. इस पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला महज प्रशासनिक भ्रम का है या इसके पीछे कोई अन्य कारण मौजूद है.
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