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कृषि मंत्री ने कहा- खरीफ फसलों पर मानसून में देरी के प्रभाव का आकलन करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि अभी बुवाई है जारी

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
Agriculture Minister Narendra Singh Tomar

Agriculture Minister Narendra Singh Tomar

देश के किसानों के लिए मानसून की बारिश किसी वरदान से कम नहीं होती है, क्योंकि इस पर खरीफ फसलों की बुवाई निर्भर है. मगर इस साल देश के अधिकतर राज्यों में मानसून की बारिश में काफी देरी हुई, जिसकी वजह से खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ती दिख रही है. हालांकि, मौसम विभाग ने समय पर मानसून आने की संभावना जताई थी. ऐसे में किसानों ने मानसून के पहले ही बारिश में ही खरीफ फसलों (Kharif Crop) की बुवाई कर दी, लेकिन कई राज्यों में 15 दिन बाद भी बारिश नहीं हुई, जिस कारण फसलें मुरझाती जा रही हैं.        

इस वजह से किसान भाई काफी चिंता में हैं. किसानों की इसी समस्या को लेकर कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने कहा है कि खरीफ फसलों (Kharif Crop) पर मानसून (Monsoon) में देरी के प्रभाव का आकलन करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि अभी भी खरीफ फसलों की बुवाई जारी है. ये जानकारी कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Agriculture Minister Narendra Singh Tomar) ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी है.

उनका कहना है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून (Monsoon) की बारिश 21 जुलाई तक की अवधि के दौरान सामान्य बारिश से 5 प्रतिशत कम है. ऐसे में खरीफ फसलों के उत्पादन का आकलन में जल्दबाजी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि अभी भी देश के कई राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई की जा रही है.

उन्होंने आगे कहा कि मानसून 1 जून के सामान्य आगमन समय की तुलना में 3 जून को केरल में प्रवेश कर गया था. मगर अभी भी कई हिस्सों में मानसून की अच्छी बारिश नहीं हुई है, जिस वजह से खरीफ फसलों (Kharif Crop) की बुवाई पिछड़ गई है.

कृषि मंत्रालय की ओर से जारी रिपोर्ट की मानें, तो पिछले साल इस वक्त तक लगभग 588.11 लाख हेक्टेयर के रकबे में खरीफ फसलों (Kharif Crop) की बुवाई हो गई थी. मगर इस साल सिर्फ 499.87 लाख हेक्टेयर में ही बुवाई हो पाई है. मानसून (Monsoon) में देरी की वजह से मूंग, सोयाबीन, धान और कपास समेत लगभग कई खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ गई है.

English Summary: agriculture minister said, it is too early to assess the effect of delay in monsoon

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