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जीरो टिलेज के सहारे जल्द होगी गेहूं की खेती

आज के समय में कृषि के क्षेत्र में नई-नई तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है जिसके लागत को कम कर लाभ बढ़ाने में काफी ज्यादा फायदा हो रहा है। ऐसी ही एक मशीन है जीरो टिलेज जिसके सहारे गेहूं की बुआई करने पर 1500 रूपये प्रति एकड़ की बचत होगी। दरअसल मध्य प्रदेश के धार जिले में कृषि विभाग गेहूं की उत्पादकता को बढ़ाने के लिए इस तकनीक को खेती के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में लगा है। जीरो टिलेज के प्रयोग से गेहूं की बुवाई करता है तो इससे खेत की जुताई में फायदा तो होगा ही साथ ही साथ इससे बीज की संख्या कम लगेगी। इसके सहारे आप खेत को बिना जोते ही जीरो टिलेज के सहारे आसानी से कर सकते है। इस तकनीक में पिछली फसल की कटाई के बाद उसके खड़े अवशेषों या फनों को जीरो टिलेज मशीन के द्वारा खेत को तैयार किया बिना ही बिजा जाता है। इसीलिए इसको सीधी बिजाई की तकनीक कहा जाता है। इस तकनीक का फायदा है कि इसमें खेत की मिट्टी से कम छेड़छाड़ की जाती है और पिछली मिट्टी के अवशेष धीरे-धीरे मिट्टी में बढ़कर भूमि की उर्वरता शाक्ति को बढ़ाने का काम करते है। इस विधि के सहारे गेहूं की उपज करने में काफी ज्यादा आसानी किसानों को एक राहत महसूस करवाती है। 

नहीं चलाना पड़ता कल्टीवेटर

जीरो टिलेज मशीन को चलाने से खेत और उसकी मिट्टी को काफी ज्यादा फायदा होता है। इस तकनीक में सबसे खास बात यह है कि इस तकनीक के सहारे गेहूं की बुआई करने पर खेत की सफाई करने के लिए रोटावेटर को नहीं चलाना पड़ता है। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ आशीष त्रिपाठी ने बताया कि इस मशीन के सहारे गेहूं के बीजों और खाद को एक साथ खेतों में डाला दिया जाता है। इस विधि का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि इससे समय की काफी बचत हो जाती है जो कि किसानों के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद है। साथ ही खेतों से धान कटने के तुरंत बाद ही गेहूं को लगाने में काफी ज्यादा आसानी हो जाती है। इससे सिंचाई में भी काफी सहायता मिल जाती है और किसानों को ज्यादा बचत होती है।

ऐसी होती है जीरो टिलेज मशीन

अगर हम जीरो टिलेज मशीन की बनावट के बारे में बात करें तो इस मशीन के दोनों तरफ ड्राइविंग व्हील होते है इसमें आवश्यकतानुसार दिए गए ग्रुप की सहायता से व्यवस्थित कर सकते है। मशीन को चलाते समय पीछे दिए गए लकड़ी के फट्टे पर बैठकर एक व्यक्ति को यह आसानी से सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि बीज या खाद सही रूप से निकल रहे है अथवा नहीं, साथ ही कोई नालकी बंद तो नहीं है।    

किशन अग्रवाल, कृषि जागरण



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