
आज हम आपको एक ऐसी आयुर्वेदिक औषिधी/Ayurvedic Medicine के बारे में जानकारी देगे, जिसका इस्तेमाल पुराने जमाने से होता आ रहा है. पहले के समय में लोग अपने दैनिक जीवन में इस औषिधी का इस्तेमाल करते थे, जिस औषिधि कि हम बात कर रहे हैं. उसको महुआ के नाम से जाना जाता है और भारत में इसकी लगभग 12 किस्में पाई जाती है, जिनमें 'ऋषिकेश', 'अश्विनकेश', 'जटायुपुष्प' प्रमुख है.
वहीं इस पौधे में कहीं पोषक तत्व/Nutrients पाए जाते हैं. अगर आप किसी ऐसे आहार की तलाश में हैं, जिसके सेवन से शरीर में कैल्शियम, मैग्निशियम, जिंक, जस्ता, फॉस्फोरस तथा प्रोटीन की कमी पूरी हो जाए, तो यह महुआ आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. आइए इसके बारे में अन्य जरूरी जानकारी जानते हैं...
महुआ औषिधी से जुड़ी कहानी
महुआ पेड़ को जादुई पेड़ भी कहां जाता है, क्योंकि इसकी औषधियां से कई बीमारी छू मंतर हो जाती है. आपको जानकर हैरानी होगी कि आदिवासी समाज का महुआ से बहुत गहरा नाता है. जब अनाज नहीं था, तब आदिवासी लोग महुआ के फल को ही खाकर अपना जीवन गुजारते थे. कह सकते हैं कि आज भी महुआ के फूलों को आदिवासी भोजन के रूप मे उपयोग करते हैं. जैसे डोकला, हलवा, आटे मे मिलाकर चिला बनाना ये औषिधी उनकी जीविका का स्त्रोत है.
महुआ के फायदे/Mahua Benefits
आयुर्वेद में बहुत सालों से महुआ औषिधी का इस्तेमाल किया जा रहा है. क्योंकि इसमें ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हमें हर रोग से बचाते हैं और हर बीमारी से लड़ने में मदद करते हैं. जैसे कि-
- महुआ का काढ़ा अगर आप सेवन करेंगे तो ये आपके जोड़ों के दर्द को बहुत जल्द आराम मिल जायेगा.
- महुआ की छाल का काढ़ा आपके ब्लड शुगर लेवल को भी कंट्रोल करेगा.
- इसके काढ़ा का इस्तेमाल शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होने देता और शरीर को कमजोर होने से बचाता है.
- आयुर्वेद के अनुसार महुआ के पेड़ की छाल डायबिटीज के रोगी के लिए उपयोगी है अगर वो इस छाल का इस्तेमाल करना शुरू कर दें, तो वो इस बीमारी से निजात पा सकता है.
- जिन लोगों को दांत दर्द जैसी समस्या रहती है. उनको महुआ की छाल का इस्तेमाल करना चाहिए जो दर्द से काफी हद तक राहत पहुंचाता है.
- अगर आपकी त्वचा में जलन, सूजन जैसी समस्या होती है, तो आपको महुआ का इस्तेमाल करना चाहिए जो आपकी त्वचा को और भी खूबसूरत और चमकदार बनाता है.
- महुआ के फूल बवासीर रोग में बहुत फायदेमंद होते हैं. इसके फूल को घी के साथ भूनकर इस्तेमाल करें, तो बवासीर के रोगी को बहुत आराम मिलता है.
महुआ काढ़ा बनाने की विधि/Method of making Mahua kadha
महुआ के फूलों को साफ करें और उन्हें एक बड़े बर्तन में डालें. पानी को उबाल लें और उसे महुआ के फूलों पर डालें. इस मिश्रण को 10-15 मिनट तक उबालें और फिर आंच को बंद कर दें. मिश्रण को ठंडा होने दें और फिर उसे एक मेश या छलनी से छान लें. इस काढ़े में गुड़ या शहद, इलायची पाउडर, दालचीनी पाउडर, और काली मिर्च पाउडर मिलाएं. इस काढ़े को एक एयरटाइट कंटेनर में स्टोर करें और इसे 2-3 दिनों तक फ्रिज में रखें.
ध्यान रहे कि काढ़े का सेवन दिन में 2-3 बार और 1/2 कप की मात्रा में ही करें. साथ ही महुआ के सूखे फूलों का इस्तेमाल शराब बनाने के लिए भी किया जाता है. महुआ का शराब भारत के अनेक आदिवासी क्षेत्रों में बहुत लोकप्रिय है, जैसे - मध्य प्रदेश के झाबुआ की महुआ की शराब काफी प्रसिद्ध है.
लेखक - रवीना सिंह
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