देश को बचाना है तो कृषि में निवेश जरूरी - डां मंगला राय

अगर देश को बचाना है तो कृषि क्षेत्र में निवेश बेहद जरूरी है, यह बात भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के पूर्व महानिदेशक व वर्तमान कुलपति डां मंगला राय ने बताया साथ ही उन्होंने कहा कि हरित क्रांति आने के समय में 140 मिली हेक्टेयर भूमि में खेती होती थी और आज भी वही रकबा है, लेकिन आज जनसंख्या तीन गुना बढ़ गई है। साथ ही कृषि अनुसंधान संस्थानों और कृषि से सम्बंधित अन्य संस्थानों व उपकरणों की हालत जर्जर हो चुकी है अगर कृषि क्षेत्र में अब भी निवेश नहीं बढ़ाया गया तो निश्चित तौर पर मुश्किल का सामना करना पडे़गा।

वास्तव में देश का एक ऐसा व्यक्ति जिन्होंने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अनेक पदों पर आसीन रह कर राष्ट्र का गौरव बढ़ाया ,साथ ही 16 विश्वविद्यालय ने डीएससी की उपाधि से नवाजा, इतना ही नहीं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक, भारत सरकार व बिहार सरकार के विशेष कृषि सलाहकार और दो बार कुलपति के पद पर आसीन एक ऐसा महान कृषि वैज्ञानिक जो आज भी पंतनगर स्थित गोविंद वल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय में कुलपति पद पर आसीन मुफ्त सेवा दे रहे हैं। वो किसी लग्ज़री कार से नहीं बल्कि साईकिल से भ्रमण करते हैं ऐसे एक महान हस्ती से डां राय से एक मुलाकार के दौरान वार्तालाप के कुछ अंश-

प्रश्न1 हरित क्रांति के अलावा वर्तमान  रिसर्च की क्या स्थिति है ?

उत्तर- इस बात में कोई संन्देह नही है कि हरित क्रांति जैसी महान क्रांति की जननी यही विश्वविद्यालय रहा है। जिसका लाभ सभी किसान उठा रहे हैं और वर्तमान की बात की जाए तो विश्वविद्यालय द्वारा 276 नई उन्नत किस्म के बीज विकसित किए गए है। इसमें गेंहू ,धान, सब्जी, सहित अन्य फसलें शामिल हैं। वहीं इस वर्ष की बात करें तो यह हमारे लिए बहुत लकी रहा क्योंकि इस वर्ष 21 नए किस्म के बीज का विकास हो चुका है। जिसमें धान की किस्म पन्त 1, पन्त 2 और पूसा 1121 और पूसा 1509 ने तो देश में क्रांति ला दी है। वहीं इन किस्मों के पंत धान दिल्ली, हरियाणा, पंजाब,उत्तर प्रदेश व उत्तराखंण्ड के लिए विकसित किए गए हैं जो बासमती से 15-16 प्रतिशत अधिक उत्पादन देता है।  

प्रश्न 2 शोध में कृषि विज्ञान केन्द्रों का कितना सहयोग है?

उत्तर-सभी कृषि विज्ञान केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वर्तमान में 9 जनपदों के केवीके विश्वविद्यालय के आधीन कार्यरत है। जिसमें लगभग सभी सम्मानित हो चुके है। समय समय पर किसान मेले का आयोजन किया जाता है। जिसमें किसानों को फसल सुरक्षा, बायोमांस संग्रहण ,बीज उत्पादन, फसल उत्पादन मछली, उत्पादन, दुग्ध उत्पादन आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है।

प्रश्न 3 शोध किसानों तक कैसे पहुंचाते हैं ?

उत्तर- शोध और किसानों के बीच बहुत बडी खाई है। हमारे मुर्गी पालन, मत्स्य पालन , कृषि क्षेत्रों के विभिन्न शोध , प्रसंस्करण, भण्डारण आदि को समाचार पत्र पत्रिकाओं आदि के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जाता है। हम इन माध्यमों के आभारी हैं। साथ ही इस वर्ष से बीज विकास वाहन योजना प्रारम्भ कर दी गई है जिसमें विश्वविद्यालय की ओर से प्रत्येक मेलों और गांव गांव जाकर उसी रेट में किसानों तक बीज पहुंचाया जाएगा। इससे ऐसे किसानों को फायदा होगा जो विश्वविद्यालय तक आकर बीज खरीदने में असमर्थ हैं। 

प्रश्न 4 आपके संस्थान में कौन कौन से पाठ्यक्रम संचालित हैं?

उत्तर- वर्तमान में कृषि से सम्बंधित तो लगभग सभी पाठ्यक्रम संचालित है साथ ही हमारे संस्थान में इंजीनियरिंग,मैनेजमेंट, पीएच.डी, जनसंचार, गृह विज्ञान, पशु चिकित्सा, फूड टेक्नोलॉजी सहित अन्य पाठ्यक्रम संचालित हैं जहां विद्यार्थियों में लगभग 60 प्रतिशत लड़कियां हैं।

प्रश्न 5 वर्तमान में क्या रिसर्च चल रही है?

उत्तर- हमारे यहां उन्नत किस्म के बीजों की रिसर्च तो चल ही रही है साथ ही उद्यानिकी, पुष्पोत्पादन,अनार किन्नू आदि पर काफी अच्छा कार्य हो रहा है साथ ही हम आम की ऐसी किस्म पर रिसर्च कर रहे हैं जो कि अक्टूबर तक आम दे सके।   कटहल की ऐसी किस्म पर रिसर्च कर रहे हैं कि शरद ऋतु में भी यहां कटहल का उत्पादन किया जा सके। उसके साथ हमारा प्रयास है कि जैवविविधता को व्यवसाय से कैसे जोड़ा जाए जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में बकरी, भेड़, मुर्गी पालन के व्यवसाय को बढ़ाया जा सके। वहीं हमारे रिसर्च के लिए गर्वनर से अवार्ड भी मिल चुका है।

प्रश्न 6 सरकार से क्या अपेक्षा रखते हैं ?

उत्तर- अगर भाव प्रबल हो तो अभाव खत्म हो जाता है। मुझे किसी ने एक रूपया भी ज्यादा नहीं दिया फिर भी हमने दो साल में कितना विकास कर लिया। रही बात सरकार कि तो मैं यहीं कहूंगा कि अगर देश को बचाना है तो कृषि में निवेश बढ़ाना ही होगा क्योंकि बिना सुविधाओं के कोई रिसर्च की आशा करना उसी प्रकार है जैसे बिना हथियार के युद्ध में उतर कर जीत की कामना करना। सरकार को विकास के लिए कृषि क्षेत्र में 10 व 5 प्रतिशत से  नहीं  बल्कि 10 हजार करोड़ का निवेश करना जरूरी है क्योंकि रिसर्च के लिए सुविधाओं का होना  जरूरी है।

प्रश्न 7 आप बिना सैलरी के कार्य कर रहे हैं क्यों ?

उत्तर- मैं सैलरी लेता भी हूं और नहीं भी लेता, जब जरूरत नहीं तो नहीं लेता  हूं और जब लिया तो किसी जरूरतमंद के कार्य में सहयोग कर देता हूं, लेकिन सात साल भारत सरकार के विशेष कृषि सलाहकार के रूप में कार्यरत रहा उस समय जरूर कुछ नहीं लिया। और मुझे पैसे की जरूरत भी क्या है आज भी पूरे विश्वविद्यालय का भ्रमण साईकल से कर लेता हूं। मुझे किसी वातानुकूलित वाहन की जरूरत नहीं पड़ती।

प्रश्न 8 किसानों के लिए संदेश-

उत्तर- किसान पूज्यनीय एवं वन्दनीय हैं वे खेती में आधुनिक उन्नत किस्म के बीजों का प्रयोग कर आधुनिक तकनीकी से खेती करें तो निश्चित रूप से सफल होगें।

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