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किसानों के ज्ञान व कौशल को बढ़ाने में कृषि विज्ञान केंद्र निभाता है अहम भूमिका- डॉ.ए.के.सिंह

Interview by ज्योति शर्मा ,

DR. AK SINGH

कृषि विज्ञान केंद्र ऐसी संस्थाएं हैं जो किसानों के लिए प्रशिक्षण से लेकर विभिन्न कृषि उत्पादन प्रणालियों के अंतर्गत नई तकनीक, बीज एवं रोपण सामग्री को किसानों के खेत पर परीक्षण आदि करने तक के कार्य करती हैं. साथ ही आधुनिक कृषि प्रौद्दोगिकी में किसानों के ज्ञान व कौशल को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर विभिन्न गतिविधियों जैसे- किसान मेला, कृषि प्रदर्शनी, प्रौद्योगिकी सप्ताह, मीटिंग, समूह चर्चा और सेमिनार आदि का आयोजन करती हैं. इसी क्रम में आईसीएआर के उप महानिदेशक (एग्रीकल्चरल एक्सटेंशन), डॉ.ए.के.सिंह से कृषि जागरण की पत्रकार ज्योति शर्मा ने विशेष बातचीत की. पेश है उनसे बातचीत के कुछ प्रमुख अंश-

कृषि विज्ञान केंद्र, आखिर किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है?

देखिए, कृषि विज्ञान केंद्र सभी जिले स्तर पर स्थापित हैं. हालांकि अभी कुछ नए जिले बने गए हैं,  जहां कृषि विज्ञान केंद्र नहीं हैं, लेकिन यह जिले भी पुराने जिलों से ही निकलकर बने हैं. आप एक तरह से कह सकते हैं कि जितने भी पुराने जिले थे, सभी में कृषि विज्ञान केंद्र हैं और जैसा की इसके नाम से ही स्पष्ट होता है कि कृषि विज्ञान केंद्र, सिर्फ कृषि के क्षेत्र में काम करता है. यहां कृषि विज्ञान,  पशुपालन, मछली पालन और गृह विज्ञान के विशेषज्ञों का भी एक समूह भी कार्यरत रहता है. जो कि महिलाओं की समस्याओं को और पोषण से संबंधित समस्याओं पर सुझाव देते हैं.

कृषि विज्ञान केंद्र ज्ञान का केंद्र है. जिले की परिस्थिति के लिए जिस तकनीक की जरूरत है. उसका ज्ञान कृषि विज्ञान केंद्र को रहता है, वहां की परिस्थिति के बारे में भी कृषि विज्ञान केंद्र के पास जानकारी रहती  है. जैसे कि वहां की जमीन कैसी है? वहां की जलवायु कैसी है? सिंचाई के साधन कितने हैं? और उन परिस्थिति के हिसाब से क्या नई तकनीक होनी चाहिए. इसके अलावा, बहुतायत मात्रा में बीज चाहे वे फसलों के हों, दलहन के हों, धान, गेहूं के हों या सब्जियों के हों उपलब्ध रहते हैं. साथ ही खेतों में यदि कोई बीमारी है, तो उसके लिए हम विशेषज्ञ उपलब्ध कराते हैं. इसके लिए यदि किसान चाहें तो कृषि विज्ञान केंद्र आकर संपर्क कर सकते हैं. अत: मैं कह सकता हूं कि कृषि से जुड़े किसी भी विषय में ज्ञान देने की क्षमता कृषि विज्ञान केंद्र में है.

कृषि विज्ञान केंद्र का जो कैचमेंट एरिया होता है, उसके चुनाव की प्रक्रिया क्या होती है?

कृषि विज्ञान केंद्र का कैचमेंट एरिया पूरा जिला है. उसका निर्धारित नहीं कर रखा है कि एक गांव में काम करना है या दो गांव में काम करना है, लेकिन जो तकनीक का प्रदर्शन है, क्योंकि कृषि विज्ञान केंद्र में 6 ही विशेषज्ञ होते हैं, जो कि हर जगह नहीं जा सकते हैं, तो प्रयास यही रहता है कि कुछ गांव का चुनाव हो, जिसमें प्रदर्शन किया जाए. लेकिन, यदि तकनीक से संबंधित कोई संदेश या प्रशिक्षण देना है, तो उसके लिए जिले के सभी किसान केंद्र पर आते हैं. हालांकि, कृषि विज्ञान केंद्र सभी विषयों पर काम करता है, लेकिन कई बार ऐसा होता है कि किसी कृषि विज्ञान केंद्र ने मशरूम उत्पादन में महारथ हासिल कर ली, तो किसी ने शहद के उत्पादन में महारथ हासिल कर ली, तो ऐसे में उसे देखने के लिए दूसरे जिलों के भी किसान आते हैं.

कोई भी नई तकनीक आती है, तो आप उसे किसानों तक कैसे पहुंचाते हैं?

देखिए, कृषि विज्ञान केंद्र शोध संस्थानों के अधीन ही काम करते हैं, तो जो भी विश्वविद्यालय की तकनीक होती है, तो वो उसके हिस्से होते हैं. ऐसे में किसी विश्वविद्यालय के पास एक कृषि विज्ञान केंद्र हैं तो किसी के पास 5 कृषि विज्ञान केंद्र हैं.

आप कृषि विज्ञान केंद्र से किसानों को कैसे जोड़ते हैं

देखिए, किसानों को कृषि विज्ञान केंद्र से जोड़ने की एक लंबी प्रक्रिया होती है. उदराहण के तौर पर जैसे हमारी आप से मुलाकात हुई और आपको कृषि विज्ञान केंद्र के बारे में पता चला, फिर आपके द्वारा किसी और को कृषि विज्ञान केंद्र के बारे में पता चलता है. इसके इतर हमारे कुछ विशेषज्ञ अनवरत अखबारों में लिखते रहते हैं, जिनके जरिए लोगों को कृषि विज्ञान केंद्र के बारे में पता चलता है. वहीं, पूरे देश में 14 करोड़ किसान हैं और इसमें से तकरीबन 5.3 करोड़ किसान एम पोर्टल पर पंजीकृत हैं और इन सभी किसानों का किसी न किसी तरीके से कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क बना हुआ है. मान लीजिए की किसी जिले में 5 लाख किसान या किसी जिले में 10 लाख किसान हैं, उनका किसी न किसी प्रकार कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क बना हुआ है. इन सभी किसानों से हमारे विशेषज्ञ जुड़े हुए है, इन किसानों को हमारे विशेषज्ञ समय-समय कृषि से संबंधित जानकारी साझा करते रहते हैं.  इसके अलावा सरकार के जितने भी मंत्रालय किसानों के लिए काम करना चाहते हैं, वे कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से ही करना चाहते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि एकमात्र यही एक संस्था हैं, जिनका सीधा संपर्क किसानों से बना हुआ है. 

किसान मित्र योजना का चयन कैसे होता है? इस योजना के तहत किसानों को कैसे जोड़ा जाता है?

किसान मित्र कृषि विभाग की योजना है , इससे आईसीएआर और कृषि विज्ञान केंद्र से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन किसान मित्र योजना के तहत सरकार लोगों को चेन एजेंट के रूप में लोगों को जोड़ती है. जिसके जागरूकता प्राप्त करने की ललक है और सिखना चाहता है और दूसरा वो जो ज्ञान साझा करना चाहता है, तो ऐसे लोगों को सरकार किसान मित्र के रूप में नियुक्त करती है.

कृषि विज्ञान केंद्र महिला किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए क्या कदम उठा रही है?

आपको यह जानकर खुशी होगी कि हम सालाना 16 लाख किसानों को प्रशिक्षण देते हैं, जिसमें से 5 लाख से अधिक महिला किसान होती हैं. देखिए, गांवों के युवक अब शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. गांव में युवक अब रहे नहीं है. गांव में अब महज महिलाएं और बुजुर्ग रह गए हैं. ऐसे में स्थिति में कृषि क्षेत्र में महिलाओं की जरूरत को देखते हुए हमने 5 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षित किया है और इसें हम लगातार बढ़ा रहे हैं. इसी कड़ी में एक कार्यक्रम में हमने महिलाओं को केंद्र में रखकर शुरू किया है. इस कार्यक्रम का नाम ही हमने नारी रखा है. इस कार्यक्रम के तहत महिलाओं को पोषित करने की दिशा में काम करना शुरू किया गया है.

कृषि विज्ञान केंद्र से किसानों को क्या फायदा मिल रहा है?

यूं तो किसानों की संख्या हजारों में हैं, लेकिन मैं आपको उदारहण बताता हूं. हमारे देश में दाल का उत्पादन 16 से 17 मिलयन टन था और आज हम तीन चार साल के आंकड़ों की बात करें, तो यह आंकड़ा 24 से 25 मिलयन टन तक पहुंच चुका है और देश कह रहा है कि हम आत्मनिर्भर हो चुके हैं.  

कृषि विज्ञान केंद्र इतने लंबे समय से किसानों के हित में सक्रिय है, तो ऐसे में पहले के मुकाबले अब कृषि विज्ञान केंद्र की कार्यशैली में क्या परिवर्तन आया है?

जी, परिवर्तन तो बहुत कुछ आया है. आज सभी सरकारी विभाग कृषि विज्ञान केंद्र के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं. आज हमारी कार्यशैली में भी बदलाव आ चुका है. जिले स्तर पर कृषि विज्ञान केंद्र किसानों के हित में काम कर रहे हैं. किसानों का हम पर भरोसा है और हमारी कोशिश रहती है कि हम किसानों के भरोसे पर खरे उतरें. इस दिशा में हमारी अनवरत कोशिश जारी है.   

English Summary: interview of Dr. Ak singh

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