किसान मुझसे और मेरी कंपनी 'स्टार ग्लोबल स्टार' से जुड़कर अपनी आय दोगुनी कर सकते हैं : डॉ.जी एन कौशिक - Dr. G.N Kaushik

आप अपने बारे में और आपकी कंपनी 'स्टार ग्लोबल स्टार' के बारे में बताइए ?

मैं पेशे से एक एग्रीकल्चर साइंटिस्ट हूं। मैंने इजराईल से पी.एच.डी. की है। मैने किसानों के हित में आज तक कई कार्य किए हैं। भारत में कई तरह के फूल, फल, पेड़, पौधों की खेती की मैंने शुरूआत की है। मैं 'स्टार ग्लोबल स्टार' में मैनेज़िग डॉयरेक्टर की तौर पर जुड़ा हुआ हूं। स्टार ग्लोबल स्टार एक प्रमुख  विकास उन्मुख कंपनी है, जिसकी स्थापना वर्ष 2018 में मत्स्य पालन, फूलों की खेती और नर्सरी जैसे प्रमुख कृषि व्यवसाय को बेहतर तकनिक प्रदान करने और विकास के लिए किया गया था। जैसा की आप जानते हैं की मत्स्यपालन, फूलों की खेती और नर्सरी उद्योग हमारी अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और भारत में इन सभी क्षेत्रों को सशक्त बनाने की हमारी महत्वाकांक्षा है। हमारे देश का विकास किसानों के कल्याण और विकास से जुड़ा हुआ है और इसे ध्यान में रखते हुए, हमने समृद्ध भारत के लिए एक पहल की है।

कंपनी से किसान कैसे जुड़ सकते हैं ? और उनको इस कंपनी के द्वारा कैसे फायदा मिलेगा?

हम अपने देश के किसानों को आय का बेहतर स्रोत प्रदान करके सशक्त बनाना चाहते हैं। कंपनी एक मल्टी लेवल मार्केटिंग मॉडल पर आधारित है और हमारे पास किसानों के लिए कृषि और जलीय कृषि के आर्थिक रूप से टिकाऊ मॉडल स्थापित करने का एक मिशन है जो उन्हें आय और रोजगार के अवसरों में सुधार करने में मदद करेगा। वहीं एमएलएम की बात करें तो यह काफी अच्छा स्वरूप है जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों का विकास किया जा सकता है। और हमें पूर्ण विश्वास है किसानों के लिए भी यह काफी लाभदायक साबित होगा।

एमएलएम के प्रोजेक्ट पर पहले भी कंपनियां काम कर चुकी हैं? लेकिन उसके परिणाम सकारात्म की बजाय नकारात्मक ज्यादा रही हैं? आप इसमें क्या अलग करने की तैयारी कर रहै हैं?

वैसे तो मैं एमएलएम कंपनी खोलने का विचार नहीं कर रहा था लेकिन, मुझे लगता है की यह अच्छा जरिया है जिसके माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जल्दी पहुंचा जा सकता है। और अन्य कंपनियों की बात करें तो उनके पास कोई मकसद नहीं था और उनकी कार्यप्रणाली भी गलत है जिसके वजह से वह कर्ज और अंधेरे मे हैं। मेरे अनुसार अगर इसको सही तरीके से उपयोग किया जाए तो यह दुनियां का सबसे खूबसूरत काम है। मेरी कंपनी के पास एक उद्देश्य है और वो है किसानों का विकास और किसान आत्महत्या को रोकना। आज लगभग हर दिन हमें किसानों के आत्महत्या के बारे में सुनने को मिलता है और हमारी प्रथमिक्ता है की हम इसे रोकें। कंपनी में किसानों को बीजनेस के साथ-साथ किसानों को भी मत्सयपालन और फूलों की खेती के बारे में उचित प्रशिक्षण दिया जाएगा।

किसानों को आप किस प्रकार से खेती के लिए प्रेरित करते हैं या प्रशिक्षण देते हैं? इसके बारे में कुछ बताइए...

खेती की अगर बात करूं तो मैं एक किसान परिवार से हूं और मैं एक एग्रीकल्चर साइंटिस्ट हूँ। किसानों के लिए सबसे जरूरी होता है प्रयोग, जिसके अनुसार वो खेती के बारे में सोचता है। अगर सन् 1934-35 की बात करें तो मेरे दादा जी के दो दोस्तों ने खेती की समस्या के चलते आत्महत्या कर ली जिसके बाद मेरे दादा जी य़ूके, यूएस गए और वहां नर्सरी का काम सीखा और भारत में आकर किन्नू, माल्टा, मौसमी, संतरा की गंगापुर और नागपुर में नर्सरी की शुरूआत की और आज वहां लगभग 800 किलोमिटर की एरिया में किसान इसकी खेती कर रहे हैं और वहां किसान आत्महत्या नहीं कर रहे हैं। उसी तरह से मैंने भी कई देश घूमकर यह देखा की भारत में अन्य देशों के मुकाबले काफी कम फल हैं और उन फलों की खेती भारत में सुरू हो जाए तो किसानों की आत्महत्या को रोका जा सकता है। किसानों को अगर किसी भी फसल का सफल परिक्षण दिखा दिया जाए तो वह उसकी खेती से फिर घबराता नहीं है और हम अनेक राज्यों में किसी भी फलस को लगाकर किसानों को उसका सफल परिणाम दिखाते हैं और फीर किसान उस चीज की खेती करने से नहीं डरते हैं।

किन्नू, मौसमी, मालटा, संतरा की खेती करने वाला किसान इसलिए आत्महत्या नहीं करता क्योंकि इसमें लागत कम है और मुनाफा ज्यादा है। लेकिन यह मुनाफा भी मेरे अनुसार कम लगा तो मैंने किसानों के लिए कई और प्रयास किए। भारत में पिस्ते की खेती की शुरूआत करने वाला मैं पहला किसान हूं। भारत में कुछ राज्य जैसे हिमाचल प्रदेश, बीहार, उत्तर प्रदेस के कुछ इलाके की पानी काफी अच्छी है और यहां पिस्ते की खेती काफी आसानी से की जा सकती है। इसके साथ ही किसानों के लिए हमने पिस्ते का मदर प्लांट भी तैयार किया है जो किसानों को मात्र 25 रुपए में दिया जाता है। इसी तरह ड्रैग्नफ्रूट की खेती करने वाला भारत का पहला किसान भी मैं हूं। और इसमें कमाई भी दूसरे साल से हो जाती है और 20 लाख से 40 लाख के बीच होती है। 

कंपनी के कार्यप्रणाली के बारे में बताइए?

कंपनी प्रमुख तौर पर किसानों से तीन कामों के लिए पैसा लगवाएगी और वो है मछली पालन, फूलों की खेती और नर्सरी। किसानों के लिए सबकुछ पार्दर्शी रखा जाएगा और उनको इस बात की जानकारी भी रहेगी की किसानों का पैसा कहां लगाया गया है। और किसानों को ज्यादा परेशानी ना हो इसलिए उनका पैसा जिस राज्य से आएगा कंपनी उसी राज्य में उस पैसे का इस्तेमाल करेगी। और जैसा की हम किसानों के हित के लिए काम कर रहे हैं तो सब कुछ किसानों के सामने किया जाएगा।

कंपनी के द्वारा मछली पालन पर किए जाने वाले कार्यों के बारे में बताइए? और इससे किसानों की आय कैसे दोगुनी होगी?

मछली पालन:

वैसे तो कृषि क्षेत्र में मेरा अनुभव काफी अच्छा है लेकिन, जो मैं किसानों को प्रमुख तौर पर सिखाउंगा वो है मछली पालन। इसको करने के कई तरीके हैं और हमारे किसान भाई इसे कई प्रकार से करते भी हैं लेकिन, किसानों के लिए एक संदेश देना चाहूंगा की जो किसान मछली पालन से अधिक लाभ चाहते हैं वह पिंजरा (केज) लगाकर मछली पालन करें। क्योंकि अगर बीना पिंजरे के मछली पालन करते हैं तो मछलियों के बर्बाद होने या मरने की संभावना काफी अधिक है। मछली पालन किसी भी तरह की पानी में किया जा सकता है। हर जगह की मिट्टी, पानी, जलवायु अलग-अलग होती है और इनके अनुसार ही मछली पालन की जा सकती है। हमने मिट्टी, पानी, क्लाइमेट और सभी चीजों को देखते हुए मछली के 67 प्रकार का इजाफा किया है। और इनका मार्केट आसाम में है और यह अलग-अलग दामों पर बेची जाती है।

वहीं किसानों की सबसे बड़ी समस्या सेम/ चोवा की पानी में मछली पालन करना है और इसके लिए मछली के दो प्रकार तैयार किए हैं ड्रेन और ड्रैकेन। यह दोनों प्रकार की मछली सेम की पानी में आसानी से होते हैं। और इससे किसान प्रति एकड़ लगभग 20 लाख की कमाई भी कर सकते हैं। वहीं विदेशों से कई प्रकार की मछली लाकर भारत में उसकी शुरूआत की है। इसके साथ ही देश में कई ऐसी मछली हैं जिन्हें विलुप्त होने से भी बचाया है। वहीं अभी दो प्रकार की मछलियों का मैनें इजात किया है तेजस-1 और डैनियल इसका सेवन लोग वजन कम करने के लिए कर सकते हैं मतलब पूरी दुनियां में लोग इसे वजन कम करने के लिए खाएंगे। इसकी पेटेंट करने की प्रकिया जारी है और इसे यूएस में पेटेंट कराने के लिए भेजा गया है। और इसका फाइनल टेस्ट अप्रेल 2019 में किया जाएगा।

आपने किसानों की आय वृद्धि के लिए मछली पालन को ही क्यों चुना?

मछली पालन की अगर बात करें तो यह किसानों को काफी लाभ देने वाला वयव्साय है। इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है। वहीं इसकी मार्केट भी काफी बड़ी है और भारत के लगभग हर राज्य में इसकी काफी बिक्री है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में इसे खाने वालों की संख्या काफी ज्यादा है। किसानों को इसके जरिए आमदनी दोगुनी करने में काफी मदद मिलेगी बस उन्हें अच्छा प्रशिक्षण और इसकी मार्केटिंग की जानकारी देने की जरूरत है। और आने वाले समय में इसकी मांग ज्यादा हो सकती है और ऐसे में पूर्ति के लिए अधिक मछली पालन की जरुरत पड़ेगी।

फ्लोरिकल्चर/ फूलों की खेती के जरिए किसानों की आय कैसे दोगुनी करेगी आपकी कंपनी स्टार ग्लोबल स्टार?
फूल एक ऐसी चीज है जो पूरी दुनियां के लिए काम आने वाला उपयोगी चीज़ है। वहीं किसानों के लिए एक जरुरी बात कहना चाहूंगा की जो किसान एक, दो, पांच या दस एकड़ जमीन में फूलों की खेती करते हैं उन्हें मार्केटिंग की दिक्कत आएगी और इसलिए किसानों को ज्यादा से ज्यादा जमीन में फूलों की खेती करना चाहिए। अगर फूलों की खेती करने वाले किसान क्वालिटी और क्वांटिटी दोनो है तो किसान आसानी से विश्व की सबसे बड़ी फूल मंडी हॉलैंड तक पहुंच सकता है। और वहां फूलों को बेचने पर किसनों को लगभग 50 से 60 रु प्रति किलो( हॉलैंड में फूलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 90रु, प्लेन का खर्च 37 रु और सरकार की तरफ से सब्सिडी) का फायदा होगा। तो इस तरह से किसान अगर समूह बनाकर फूलों की खेती करें तो छोटी जमीन वाले किसान भी फूलों की खेती करके लाभ कमा सकते हैं। वहीं हॉलैंड में फूलों की अंतर्राष्ट्रीय मंडी होने के कारण वहां फूलों से प्रोडक्ट बनाने वाली कई बड़ी कंपनीयां आती हैं जो फूलों की खरीदारी करती हैं।

नर्सरी

इसके साथ ही अगर नर्सरी की बात करें तो हमने दुनियां को ग्लोबल वार्मिंग से बचाने के लिए एक मुहिम चला रखी है जिसके जरिए हम भारत के साथ-साथ पूरे देश को पेड़ की आपूर्ति करेंगे। सबकुछ मिलाकर हम एक पेड़ तैयार करेंगे तो उसके लिए 3 रुपए लगेगा और अगर उसे कहीं बेचते हैं तो वह 5 से 6 गुणा ज्यादा दामों तक भी बीकता है।

देश के युवाओं के लिए क्या संदेश देना चाहेंगे?

पिछले कुछ समय से देश का युवा खेती से दूर हो रहे हैं और यह एक चिंता का विषय है। लेकिन, उन युवाओं से बस यह कहना चाहता हूं की खेती में बहुत सारे सुनहरे मौके हैं जिसके जरिए आप देश की सेवा में मदद कर सकते हो तो इसलिए हमारे साथ जुड़ें और खेती में लाभ कमाएं।

 

जिम्मी (पत्रकार)

कृषि जागरण दिल्ली

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