महाराष्ट्र में डेयरी किसानों का आंदोलन सफल रहा और सरकार को किसानों के आगे झुकना पड़ा: राजू शेट्टी - Raju Shetti

राजू शेट्टी महाराष्ट्र में किसानों के बीच एक मसीहा के तौर पर उभर रहे हैं. महाराष्ट्र में डेयरी किसानों के लिए उन्होंने पिछले महीने एक बड़ा डेयरी आंदोलन किया जिसका मकसद था किसानों को मिल रहे दूध के दामों में इजाफा करना. इस आंदोलन में किसानों ने उनका साथ दिया और आंदोलन को सफल बनाया. आंदोलन के बाद किसानों को महाराष्ट्र में रु.17 प्रति लीटर दूध से बढ़कर रु.25 प्रति लीटर मिल रहा है. इस संदर्भ में उन्होंने कृषि जागरण को दिए साक्षात्कार में कृषि क्षेत्र से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें साझा की.

देश में किसान और खेती को आप किस तरह से देखते हैं ?

देश में किसानों की स्थिति अच्छी नहीं है और इसका अनुमान किसानों की बढ़ती आत्महत्या से लगाया जा सकता है. किसानों के विकास के लिए सरकार कोई भी सार्थक कदम नहीं उठा रही है. आज देश में किसानों को काफी तरह से सहायता देने की जरूरत है, जिसमें उनको कर्जमुक्त करना, वित्तीय सहायता देना, नई तकनीक प्रदान करना इत्यादि की आवश्यकता है. केंद्र में आज तक जो भी सरकारें बनी हैं उन्होंने किसानों के लिए कम और उपभोक्ताओं के बारे में ज्यादा सोचा है. देश में हर रोज़ किसान एक नए आंदोलन कर रहे हैं और उसकी वजह यह है कि किसान असंतुष्ट हैं और गरीबी में हैं.

महात्मा ज्योतिबा फुले ने वर्षों पहले ही कहा था कि गांव के ढ़ांचे को अंग्रेजों के शासन में बर्बाद किया. और यही हाल आज देश की केंद्र में बैठी सरकारें भी कर रही हैं. गांव के पिछड़े, दलित, ओबीसी इत्यादि इन सभी किसानों की जमीनों के टुकड़े कर दिए गए, आज अगर किसानों को उनकी लागत से ज्यादा मिलता तो पूरे देश में किसान आंदोलन नहीं होते. आज किसानों के जड़ तक जा कर उनके समस्याओं के समाधान करने की जरूरत है.

किसानों के लिए घोषित एमएसपी का विरोध क्यों? और मौजूदा एमएसपी में क्या बदलाव चाहते हैं?

वर्ष 2004 में गठित स्वामीनाथन आयोग द्वारा वर्ष 2006 में अपनी रिपोर्ट को प्रस्तुत किया था. इस रिपोर्ट में किसानों के लिए एमएसपी को सी 2 लागत (फसल उत्पादन में आई नकदी और गैर नकदी के साथ ही जमीन पर लगने वाले लीज रेंट और जमीन के अलावा दूसरी कृषि पूंजियों पर लगने वाला ब्याज भी शामिल होता है) किसानों को देने की शिफारिश की गई थी. वर्ष 2014 में लोकसभा के चुनाव के वक्त किसानों से वादा किया था कि वो स्वामीनाथन आयोग की सिफारीशों को लागू करेंगे. लेकिन, चार वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी सरकार ने इसे लागू नहीं किया तो हमने किसानों के लिए अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिती बनाया और देश में 15 हजार किलोमीटर की पदयात्रा करके गांव-गांव में किसानों को जागरुक किया और नवंबर में किसान कर्जमुक्ति को लेकर बिल भी बनाए और जब मोदी सरकार को लगा की देश के किसान अब चुप नहीं बैठेंगे तो उन्होंने एमएसपी की घोषणा की. लेकिन, उन्होंने किसानों के लिए एमएसपी की घोषणा ए2+एफएल (लागत में नकदी लागत के साथ ही परिवार के सदस्यों की मेहनत की अनुमानित लागत को भी जोड़ा जाता है) के द्वारा की जो देश किसानों के साथ एक बड़ा धोखा है. मौजूदा समय में हमारी मांग है कि किसानों को कर्ज से मुक्त किया जाए और उसके बाद उनको सी2 लागत के अनुसार एमएसपी दी जाए.

महाराष्ट्र में डेयरी आंदोलन कितना सफल रहा? और इससे डेयरी किसानों को कितना फायदा हुआ ?

महाराष्ट्र में किसानों के प्रयास से डेयरी आंदोलन काफी सफल रहा. अभी तक के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि किसानों को इतनी बड़ी सफलता मिली है. "लगभग 11 साल पहले मैंने महाराष्ट्र में एक डेयरी आंदोलन किया था लेकिन उसमें इतनी बड़ी सफलता नहीं मिली थी जितना इस बार मिली है". आंदोलन के पहले किसानों को दूध के रु.17 प्रति लीटर मिल रहे थे लेकिन, आंदोलन के बाद किसानों को दूध के रु.25 प्रति लीटर मिल रहे हैं. तो एक किसान के लिए आठ रुपए काफी मायने रखते हैं और यह सिर्फ और सिर्फ किसानों की जीत है और किसान इससे काफी खुश हैं.

आंदोलन के वक्त लोगों ने आरोप लगाए की एसएसएस (स्वाभिमानी शेतकारी संगठन) के कार्यकर्ताओं ने हजारों लीटर दूध बहाया और टैंकरों में आग भी लगाए, इस पर क्या कहेंगे ?

हमारा यह आंदोलन एक सत्याग्रह था और हम किसी भी तरह से आंदोलन को आक्रमक नहीं बनाना चाहते थे. आंदोलन से पूर्व मैंने लोगों को गांव-गांव जा कर समझाया की घाटे में अपने दूध को बेचने से फायदा नहीं होगा अपने हक के लिए आवाज़ उठाओ. मैंने किसानों से सिर्फ एक हफ्ते तक अपना दूध बेचने को मना किया और कहा की सिर्फ एक हफ्ते के लिए हमारा साथ दो. लेकिन, आंदोलन के वक्त कुछ लोगों ने किसानों पर दवाब बनाना शुरू कर दिया कि आप लोगों को दूध देना होगा. इतना ही नहीं सरकार ने पुलिस के जरिए किसानों पर दवाब बनाना शुरू कर दिया और इस वजह से किसान गुस्सा हो गए और गुस्से में आकर उन्होंने दूध बहाया और इस तरह की घटनाओं को अंजाम दिया. जहां तक दूध बहाने का सवाल है बता दूं की महाराष्ट्र में हर रोज़ लगभग 2 करोड़ लीटर दूध का संकलन होता है और जो दूध बहाया गया है वो है लगभग 2 से 3 लाख लीटर मतलब इसे आप ज्यादा नहीं कह सकते हैं. और इस बात का हमें कोई ग़म नहीं है की दूध बहाया गया क्योंकि किसानों को इससे फायदा हुआ है.

भारत में खेती के लिए दूसरे देशों से जमीन ज्यादा है और किसानों की आय कम ऐसा क्यों ?

इसकी कोई एक वजह नहीं है बल्कि इसमें कई सारी चीजे हैं जिसपर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत है. कई बुनियादी सुविधा के आभाव में भी ऐसा होता है जैसे जमीन- देश में खेती के लिए उपयुक्त जमीन के छोटे- छोटे टुकड़े हो चुके हैं. और छोटे जमीन में किसानों को खेती करने से काफी घाटा हो रहा है क्योंकि इसमें लागत ज्यादा हो जाता है.

तकनिकी सहायता- देश में आज भी कई किसान परंपरागत ढंग से खेती करने को मजबूर हैं उन्हें खेती के लिए सरकार से किसी तरह की तकनिकी सहायता नहीं मिलती है.

रिसर्च एंड डेवलपमेंट- वहीं देश में एग्रीकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की व्यवस्था भी काफी लचर है. पिछले कई वर्षों से विभाग के द्वारा कुछ भी नया नहीं किया गया है. वहीं दूसरे देशों से आने वाली वस्तुएं यहां महंगी होती हैं.

भंडारण क्षमता- देश में जितना अनाज होता है उसके मुकाबले भंडारण क्षमता काफी कम है और इसके वजह से भी कई बार नुकसान होता है.

मांग और आपूर्ति (डिमांड और सप्लाई)- हमारे देश में मांग और आपूर्ति की व्यवस्था भी सही नहीं है. मांग ज्यादा होने की वजह से भी दाम गिर जाते हैं और किसानों को काफी नुकसान सहना पड़ता है. और सबसे ज्यादा जरूरी है खपत के अनुसार मांग जो ज्यादा है उस पर कार्य करना. खाद्य और प्रसंस्करण उद्योग भी हमारे देश में काफी सामान्य रूप से कार्य कर रहा है इसका बजट भी मात्र 100 करोड़ रखा गया है जो कि काफी कम हैं. और आखिर में आयात- निर्यात की स्थिति भी साफ और सही नहीं है.

सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है, आपके अनुसार इस पर कितना काम हो रहा है ?

किसानों की आय दोगुनी करने के लिए सबसे पहले जरूरी है लागत कम करना. और लागत कम करने के लिए उनको तकनीकि सहायता देनी होगी,बेहतर इंफ्रास्ट्रकचर देना होगा, वित्तीय सहायता देना होगा, खाद्य उद्दोग को बढ़ावा देना होगा, और किसानों के लिए विपणन व्यवस्था भी दुरूस्त करनी होगी. और इनमें से सरकार किसी भी कार्य को सही और उचित ढ़ंग से नहीं कर रही है. इसके साथ ही देश की आयात- निर्यात की निती भी स्थिर नहीं है. किसानों को अगर नए प्रकार की चीजें जैसे बीज, मशीन, इत्यादि नहीं मिलेगी तो किसानों की आय कैसे दोगुनी होगी इसलिए मेरे हिसाब से यह एक जुमला है.

आपको क्या लगता है, देश में गन्ना किसानों की समस्या कितनी बड़ी है ?

देश में गन्ना किसानों की समस्या काफी बड़ी है. आज उनको सबसे ज्यादा परेशानी भुगतान में आ रही है. गन्ना किसानों का बकाया लगातार बढ़ रहा है और आने वाले लोकसभा चुनाव में यह 50 हजार करोड़ होने का अनुमान है. समस्या यह है कि गन्ने का उत्पादन हर साल बढ़ रहा है और खपत उस मुकाबले कम है. निर्यात में भी कई तरह की समस्या खड़ी हो रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हर बार इथेनॉल, स्पिरिट इत्यादि का उत्पादन बढ़ाने पर चर्चा करते हैं लेकिन इस विषय पर शायद ही कोई कार्य हो रहा है. निर्यात की बात करें तो इसमें भी कई तरह की समस्या आ रही है. ब्राजील की अगर बात करें तो उनकी इस पर व्यवस्था काफी अच्छी है. जब चीनी के दाम कम होती है तो वह इथेनॉल का उत्पादन बढ़ाता है और जब क्रूड ऑयल के दाम कम होते हैं तो चीनी का उत्पादन बढ़ाता है और इस प्रकार की व्यवस्था हमारे देश में भी होनी चाहिए तभी गन्ना किसानों को फायदा होगा.

गन्ना किसानों के भुगतान की व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए सरकार को और क्या करना चाहिए ?

उपरोक्त जो सारी बातें मैंने कही है उस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए और इसके साथ कुछ और पहलुओं पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए जैसे- अंतरराष्ट्रीय बाज़ार का रुझान अपनी नीतियों पर काम करना चाहिए इसके साथ ही अमेरिका औऱ चीन के बीच चल रहे व्यापारिक युद्ध का भी फायदा उठाना चाहिए. चीनी के लिए निर्यात नीति को और बेहतर बनाने की जरूरत है. इन सब नीतियों से भारत का किसान सशक्त और खुशहाल हो सकता है.

किसान ऋणमुक्ति बिल जो आपके द्वारा सदन में पेश किया गया है उसके बारे में कुछ बताइए ?

किसानों के उपर आज जो कर्ज है वो सरकार की गलत नीतियों की वजह से है. सरकार ने कई सालों तक किसानों के उत्पादों को दबाकर रखा है जिसकी वजह से उन्हें घाटा होता है और वो कर्ज में डूब जाते हैं. इस बिल के जरिए हम किसानों के उपर सिर्फ बैंकों के कर्ज को नहीं बल्कि साहूकार, लेनदार, इत्यादि सभी के कर्जों से किसानों को मुक्त कराना चाहते हैं.

देश के किसानों को क्या संदेश देना चाहेंगे ?

"आज 543 सांसद वाले इस सदन में एक अकेला सांसद हूं जो किसानों के हक़ के लिए लड़ाई लड़ रहा हूं".आज देश में आधे से ज्यादा आबादी किसानों की है और मैं उनसे अपील करता हूं कि वो एक मजबूत वोटबैंक बनाएं और ऐसे लोगों को संसद में चुनकर भेजें जो उनके हक की बात करें तभी उनकी समस्याओं का समाधान हो पाएगा.

 

जिम्मी (पत्रकार)

कृषि जागरण

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