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Wheat Varieties : अधिक उपज पाने के लिए गेहूं की इन पछेती क़िस्मों की करें बुवाई

Wheat Varieties

Wheat Varieties

रबी सीजन की प्रमुख फसल गेहूं की खेती (Wheat Farming) कई राज्यों में लगभग हो चुकी है. और जहां नहीं हुई है वहां के किसान कुछ ही दिनों में बुवाई कर देंगे. ऐसे में जो किसान भाई अभी तक गेहूं की बुवाई (Wheat Sowing) नहीं कर पाएं है वो किसान भाई गेहूं की पछेती क़िस्मों (Late Varieties of Wheat ) की बुवाई कर सकते हैं, क्योंकि मौजूदा वक्त में गेहूं की कई ऐसी किस्में हैं जिनका देरी से बुवाई करने के बाद भी उत्पादन कम प्रभावित होता है. ऐसे में आइए जानते है इन पछेती किस्मों के बारे में -

गेहूं की किस्म नरेन्द्र गेहूं 1076 (Wheat Variety Narendra Wheat 1076)

गेहूं की ये एक पछेती किस्म हैं. जिसको सिंचित जगहों पर देरी से बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज बुवाई के लगभग 100 से 115 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. इस किस्म के पौधे लगभग तीन फीट लम्बे होते हैं. इसकी प्रति हेक्टेयर उपज 35 से 40 क्विंटल तक होती है.

गेहूं की किस्म यूपी 2425 (Wheat Variety UP 2425)

गेहूं की इस किस्म को उत्तर प्रदेश में अधिक उगाया जाता जाता है. जिसको सिंचित जगहों पर देरी से बुवाई के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज बुवाई के 126 से 134 दिन बाद पककर तैयार हो जाते हैं. जिनका प्रति हेक्टेयर उपज 36 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है.

गेहूं की किस्म एच.डी. – 2888 (Wheat Variety H.D. - 2888)

गेहूं की ये एक पछेती किस्म है. जिसको असिंचित जगहों पर देरी से उगाने के लिए तैयार किया गया है. इस किस्म के पौधे बीज रोपाई के 120 से 130 दिन बाद कटाई के लिए तैयार हो जाते है. जिनकी लम्बाई तीन फिट के आसपास पाई जाती है. इस किस्म के पौधों का प्रति हेक्टेयर उत्पादन 30 से 40 क्विंटल तक पाया जाता है. गेहूं का यह किस्म रतुआ रोगरोधी है.

गेहूं की किस्म एच.एस 490 (Wheat Variety HS 490)

यह मध्यम ऊंचाई वाली किस्म निचले मध्यवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में सीमीत सिचाई के लिए अनुमोदित की गई है. इसके दाने मोटे सफ़ेद शरबती एवं  अर्ध कठोर होते है. यह किस्म बिस्कुट बनाने के लिए उपयुक्त है. तथा इसकी चपाती भी अच्छी बनती है. यह किस्म 150 दिनो में पक कर तैयार हो जाती है. और इसकी औसत उपज लगभग 30 क्विटल /हेक्टेयर है.

English Summary: Wheat Varieties: Sow these late varieties of wheat to get higher yield

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