1. खेती-बाड़ी

ये हैं धान की प्रमुख उन्नत किस्में, 60 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की पैदावार

श्याम दांगी
श्याम दांगी

Paddy Variety

खरीफ की मुख्य फसलों में धान का अव्वल स्थान है. इसकी खेती भारत के उत्तरी से दक्षिणी प्रदेशों तक होती है. कुछ प्रांतों में धान की खेती साल में दो से तीन बार की जाती है. धान की खेती सिंचित और असिंचित दोनों प्रकार के क्षेत्रों में की जा सकती है. इसकी खेती छिड़काव और रोपाई विधि से की जाती है. 

हालांकि रोपाई विधि में धान का उत्पादन अधिक होता है. धान की कई किस्में मौजूद है जिनकी खेती करके अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है. तो आइए जानते हैं धान इन किस्मों के बारे में विस्तार से-

धान की प्रमुख उन्नत किस्में और उनकी खासियतें (Major improved varieties of paddy and their characteristics)

पूसा 1460 (PUSA 1460)

धान की इस किस्म का दाना छोटा और पतला होता है. इसका पौधा भी छोटे आकार का होता है. यह किस्म 120 से 125 दिनों में पक जाती है. इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 50 से 55 क्विंटल की पैदावार होती है.

डब्ल्यूजीएल 32100 (WGL 32100)

इसका पौधा और दाना छोटा होता है. यह 125 से 130 दिनों परिपक्व हो जाती है. इसका उत्पादन प्रति हेक्टेयर 55 से 60 क्विंटल होता है.

पूसा सुगंध 3 (PUSA Sugandh 3)

इसका दाना पतला और सुंगधित होता है. यह किस्म 120 से 125 दिनों में पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 40 से 45 क्विंटल होता है.

एमटीयू 1010 (MTU 1010)

इसका दाना और पौधा छोटा होता है. 110 से 115 दिनों में यह पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 50 से 55 क्विंटल होता है.

आईआर 64 (IR 64)

इसका दाना लंबा लेकिन पौधा छोटा होता है. 120 से 125 दिनों में यह पककर तैयार हो जाती है. उत्पादन प्रति हेक्टेयर 50 से 55 क्विंटल होता है.

डीआरआर 310 (DRR 310)

धान की यह किस्म मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और उड़ीसा के लिए अनुमोदित है. 125 दिनों में पकने वाली यह किस्म धान की काफी लोकप्रिय किस्म है. इसमें चमक काफी अच्छी और प्रोटीन की 10.3 मात्रा होती है. पैदावार की बात की जाए तो प्रति हेक्टेयर 45 क्विंटल होती है.

डीआरआर 45 (DRR 45)

इसमें जिंक की उच्च मात्रा 22.6 पीपीएम होती है. यह तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्य के लिए अनुमोदित है. इस किस्म को हैदराबाद स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के राष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान ने विकसित किया है. 125 से 130 दिनों में पकने वाली इस किस्म से प्रति हेक्टेयर 50 क्विंटल तक की पैदावार हो सकती है.

English Summary: these are the major improved varieties of paddy, yielding up to 60 quintals per hectare

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