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नाशपाती की खेती किसानों के लिए बन रही वरदान!

- हमेशा से खेती-किसानी को कमतर आंका जाता रहा है. यहां तक कि यदि कोई किसान का बेटा है तो वो इस बात को कहने में झिझकता है, लेकिन अब खेती में हो रही बंपर कमाई ने इस सोच को बदल दिया है. कई फसलें ऐसी हैं जो किसान को बेहतर मुनाफा दे रही हैं उनमें से एक है नाशपाती की फसल.

राशि श्रीवास्तव
नाशपाती की खेती
नाशपाती की खेती

हमेशा से खेती-किसानी को कमतर आंका जाता रहा है. यहां तक कि यदि कोई किसान का बेटा है तो वो इस बात को कहने में झिझकता है, लेकिन अब खेती में हो रही बंपर कमाई ने इस सोच को बदल दिया है. कई फसलें ऐसी हैं जो किसान को बेहतर मुनाफा दे रही हैं उनमें से एक है नाशपाती की फसल. इस फल को खाने के काफी फायदे होते हैं. इसमें प्रचूर मात्रा में फाइबर होता है. इसके अलावा आयरन भी भरपूर होता है, इसके सेवन से हिमोग्लोबिन बढ़ता है, बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा भी कम होती है. यही वजह है कि बाजार में इसकी मांग है. इसलिए इसकी खेती मुनाफेमंद है आइये जानते हैं खेती का तरीफा 

उपयुक्त मिट्टी 

इसकी खेती कई तरह की मिट्टी जैसे कि रेतली दोमट से चिकनी दोमट में की जा सकती है, यह गहरी, बढ़िया निकास वाली, उपजाऊ मिट्टी, जो 2 मीटर गहराई तक कठोर ना हो, उसमें बढ़िया पैदा होता है. इसके लिए मिट्टी का pH 8.7 होना चाहिए.

अनुकूल जलवायु

नाशपाती को ठंडी जलवायु में उजाया जा सकता है. लेकिन यदि जलवायु गर्म और धूपदार हो तो पौधे वास्तव में अच्छी तरह से विकसित होते हैं. पौधे के लिए आवश्यक तापमान 15 से 25 डिग्री सेल्सियस है.  नाशपाती फल की बुवाई और कटाई के दौरान तापमान ज्यादा होना चाहिए. पौधों को समुद्र तल से 1700-2400 मीटर की ऊंचाई पर भी उगाया जा सकता है. बढ़ते हुए नाशपाती के लिए उपोष्णकटिबंधीय और उष्णकटिबंधीय तापमान अच्छा है

जमीन की तैयारी - नाशपाती की खेती के लिए जमीन झाड़ियों या पत्थरों या किसी स्थिर पानी से मुक्त हो. मिट्टी की जुताई करें और इसे रोपण के लिए सर्वोत्तम बनाने के लिए स्तर दें. भूमि की स्थलाकृति और विविधता रोपण की प्रणाली को निर्धारित करती है. हालांकि, आयताकार या रोपण की वर्ग प्रणाली का मैदानी इलाकों में प्रमुखता से पालन होता है पहाड़ी क्षेत्रों में समोच्च प्रणाली का पालन होता है. 

नाशपाती का रोपण- रोपण की दूरी नाशपाती, मिट्टी के प्रकार, रूट स्टॉक, जलवायु और रोपण की प्रणाली के आधार पर तय होती है. व्यावसायिक खेती के लिए 6 X 6 मीटर की रोपण दूरी होती है. गड्ढे का आकार 60 सेमी X 60 सेमी X 60 सेमी तैयार करके और इसे मिट्टी और खेत की खाद और लगभग 20 से 25 ग्राम एल्ड्रिन या BHC धूल से भरें. रोपण बेसिनों को तुरंत बनाना चाहिए और ट्रंक पर पानी के अनावश्यक रिसाव से बचने के लिए मिट्टी के स्तर को ट्रंक के पास थोड़ा अधिक रखना चाहिए.

सिंचाई - ट्रंक को बसाने के लिए रोपण के बाद पानी देना चाहिए. नाशपाती के पौधों को फिर से पानी देने से पहले 2 से 3 दिनों के लिए ऐसे ही छोड़ दें. क्रमिक सिंचाई आवश्यक आधार हो पर हो. गर्मियों में सिंचाई को 5 से 7 दिनों के अंतराल में और सर्दियों में, लगभग 15 दिनों में बदलना पड़ता है. मिट्टी की नमी के हिसाब से सिंचाई करें.

English Summary: Pear cultivation is becoming a boon for the farmers! Published on: 13 January 2023, 11:57 AM IST

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