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क्यारियां बनाकर करें धान की खेती, 20 प्रतिशत ज्यादा होगी फसल की पैदावार

धान की खेती में नर्सरी से लेकर बुवाई करने तक पानी का अधिक उपयोग होता है, जिससे भू-जल तेजी से गिर भी रहा है. इस कारण पंजाब के किसानों को धान की खेती न करने की सलाह दी जा रही है. अगर किसान धान की बुवाई का तरीका बदल दें, तो पानी की बचत करने के लिए इस तरह के फैसले लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

कृषि विशेषज्ञों की सलाह

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों के लिए एक तकनीक बताई है. इस तकनीक से किसान धान की खेती में पानी और लागत की बचत कर पाएंगे, साथ ही कम से कम 20 प्रतिशत पैदावार भी बढ़ा सकते हैं. इस तकनीक में किसानों को क्यारियां बनाकर उनके किनारे धान की बुवाई करनी होगी.

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इन राज्यों में मिल चुके हैं अच्छे परिणाम

उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, श्रीलंका और बांग्लादेश में इसके अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं. यहां किसानों नें क्यारियों में धान की बुवाई की, जिसमें 30 दिन की जगह 20 दिन की पनीरी लगाने से फसल तैयार हो गई. खास बात है कि इसमें कम कीटनाशकों का उपयोग करना पड़ा है. इसके साथ ही मशीनों में होने वाली डीजल की बर्बादी पर रोक लग पाएगी. इतना ही नहीं, किसानों की मेहनत, समय, लागत औऱ पानी की बचत हो पाई है. इस तरह आर्थिक तंग झेल रहे किसानों को काफी अच्छा लाभ मिल सकता है.

अन्य जानकारी

नया तरीका इजाद करने वाले रिटायर एग्रीकल्चर डेवेलपमेंट अफसर का कहना है कि जब 70 के दशक में पंजाब में कद्दू विधि से धान की बुवाई की गई. शायद उस वक्त किसी ने सोचा नहीं होगा कि एक दिन पंजाब का भू-जल इतना नीचे चला जाएगा. आज किसान को अपनी कैश क्रॉप छोड़ने के लिए कहा जा रहा है, लेकिन इसकी कोई जरूरत नहीं है. उनका कहना है कि बिना कद्दू बुवाई से पानी की खपत घटती है. अगर किसान परंपरागत धान की बुवाई के लिए खेत में पानी भरकर ट्रैक्टर से सोडियम लेयर बनाता है, तो इससे फसल के मित्र कीड़े यानी गंडोए खत्म हो जाते हैं, साथ ही मिथेन गैस बढ़ने का खतरा रहता है.

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English Summary: Knowledge of paddy sowing for farmers

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