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अरहर की IPA-203 किस्म प्रति हेक्टेयर देगी 18 से 20 क्विंटल पैदावार, बुवाई से पहले किसान इन बातों का रखें ख्याल

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हमारे देश में दलहनी फसलों में चने के बाद अरहर का प्रमुख स्थान है. यह फसल अकेली या दूसरी फसलों के साथ भी बोई जाती है. किसान इस फसल के साथ ज्वार, बाजरा, उर्द और कपास की बुवाई कर सकते हैं. बारिश के बाद अरहर की बुवाई शुरु हो जाती है, लेकिन कई बार सही बीज न बोने से कई प्रकार को रोग लग जाते हैं. ऐसे में किसानों को अरहर की उन्नत किस्मों का चुनाव करना चाहिए, ताकि फसल को रोगों से बचाया जा सके. इसी कड़ी में केन्द्रीय दलहन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने 7 साल के शोध के बाद दाल की नई किस्म आईपीए-203 विकसित की है. यह किस्म रोग मुक्त है.

कई किसान बारिश के कारण अरहर की बुवाई नहीं कर पाए हैं. ऐसे में वह अगस्त के दूसरे पखवारे में बहार बुवाई कर सकते हैं. इस समय बोई गई अरहर की फसल जनवरी के अंत में फूल देने लगती है. उस समय कोहरे का प्रकोप कम होता है, इसलिए इसके फूलों के गिरने की सम्भावना कम हो जाती है. इस तरह किसान फसल से अधिक पैदावार भी हासिल कर सकते हैं. मगर अरहर में लगने वाले रोगों से किसानों को हर साल हजारों टन अरहर की फसल का नुकसान होता है. ऐसे में इस समय कई नई किस्में आईपीए-203 विकसित की बुवाई कर सकते हैं. आमतौर पर प्रति हेक्टेयर अरहर का उत्पादन 9 से 10 क्विंटल होता है, लेकिन अरहर की एक ऐसी नई किस्म है, जिससे किसानों को फसल का अधिक उत्पादन मिल सकता है.

अरहर की नई किस्म

किसान अरहर की नई किस्म आईपीए 203 की बुवाई कर सकते हैं. इससे किसानों को प्रति हेक्टेयर करीब 18 से 20 क्विंटल तक उत्पादन मिल सकता है. इस किस्म के अलावा किसान दूसरी उन्नतशील किस्मों का भी प्रयोग कर सकते हैं. पहली अगेती किस्में होती हैं. इसमें पारस, टाइप-21, पूसा-992, उपास-120 आदि किस्म शामिल हैं. इसके अलावा दूसरी पछेती यानी देर से पकने वाली किस्में होती हैं. इसमें पूसा-9, नरेन्द्र अरहर-1, आजाद अरहर-1, मालवीय विकास, मालवीय चमत्कार आदि किस्में शामिल हैं.

किसानों को सलाह

  • किसान फसल बुवाई पहले बीज को 2 ग्राम थीरम या 1 ग्राम कार्बेन्डाजीम से 1 किलो ग्राम बीज को शोधित कर लें.

  • इसके बाद बुवाई से पहले राईजोबियम कल्चर के 1 पैकेट को 10 किलो ग्राम बीज को शोधित करके बुवाई कर देनी चाहिए.

  • अगर खेत में पहली बार अरहर की बुवाई की जा रही है, तो वहां पर कल्चर का प्रयोग करना बहुत जरूरी होता है.

  • किसानों को बुवाई हल के पीछे कूड़ों में ही करने की सलाह दी जाती है.

  • अरहर के साथ उन्नत किस्मों के ज्वार, बाजरा, उर्द की भी खेती करने की सलाह दी जाती है.

  • बारिश के कारण अरहर की बुवाई में देर हो, तो अगस्त के दूसरे पखवारे में बहार बुवाई की जा सकती है.

  • फसल की अच्छी उपज लेने के लिए फास्फोरस युक्त उर्वरकों जैसे सिंगल सुपर फास्फेट, डाई अमोनियम फास्फेट का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है.



English Summary: IPA-2030 variety of Arhar Sowing yields 18 to 20 quintals per hectare

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