आपके फसलों की समस्याओं का समाधान करे
  1. खेती-बाड़ी

गन्ने की फसल में लाल सड़न रोग (रेड रॉट) का प्रकोप, जानें कैसे करना है रोकथाम

कंचन मौर्य
कंचन मौर्य
sugar cane

भारत की महत्वपूर्ण वाणिज्यिक फसलों में गन्ना (Sugarcane) एक है. इसका नकदी फसल के रूप में एक प्रमुख स्थान है. यह चीनी का मुख्य स्रोत है. भारत दुनियाभर में चीनी का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है, इसलिए गन्ना की खेती (Sugarcane cultivation) बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देती है. देश के कई किसानों के खेतों में गन्ने की फसल खड़ी है, लेकिन इस वक्त उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में गन्ने की फसल में रेड रॉट रोग (लाल सड़न रोग) तेजी से फैल रहा है. किसान इस रोग के निदान के लिए तौर-तरीके खोज रहे हैं. बता दें कि गन्ने की फसल में यह रोग अगस्त से अक्टूबर तक रहता है. कई जिलों के किसानों की फसलों में रोग का फैलाव हो चुका है. इसकी रोकथाम के लिए किसान कीटनाशी दवाओं का प्रयोग कर रहे हैं. फिलहाल, जहां इस रोग का प्रकोप हो रहा है, वह जल जमाव वाला क्षेत्र है.

क्या है लाल सड़न रोग

गन्ने की फसल में लगने वाला यह जलजनित रोग है, जो कि जल निकासी नहीं होने से पूरे फसल में लग जाता है. यूपी के कई जिलों में यह रोग दस्तक दे चुका है. इस बीमारी में गन्ने की पत्तियां पीली होकर सूखने लगती हैं.  इस रोग की पहचान यह है कि गन्ने की पत्तियां पीली पड़ जाती हैं और उस पर लाल रंग के धब्बे पड़ जाते हैं. अगर गन्ने का गूदा लाल रंग का दिखाई दे, साथ ही उसमें से सिरके की तरह सुगंध आ रही है, तो समझ जारिए कि खेत में रेड रॉट यानी लाल सड़न रोग का प्रकोप है. बता दें कि यह रोग पौधे के ऊपरी सिरे से शुरू होता है.

ये खबर भी पढ़े: हाईब्रिड मिर्च के पौधों को बीमारियों से बचाने के लिए इस्तेमाल करें साड़ी, जानें क्या है देशी क्रॉप कवर तकनीक

ganna

लाल सड़न रोग का फसल पर असर

इस रोग के चलते गन्ने की मिठास,उत्पादन और बिक्री पर असर पड़ता है. इस रोग का प्रकोप गन्ने के जड़ से लेकर ऊपरी भाग तक रहता है.

लाल सड़न रोग की रोकथाम

  • यह रोग संक्रमित बीज का प्रयोग और अच्छे ढंग से बीज का शोधन करने से नहीं फैलता है.

  • गन्ना उत्पादक किसानों को पहले ही गन्ना बीज को फफूंदनाशी दवा से उपचारित कर लेना चाहिए.

  • इसके साथ ही प्रतिरोधक किस्मों का चुनाव करना चाहिए.

  • इसके अलावा खेत में जल निकासी के लिए रास्ता बनाना चाहिए.

  • खेत से रोग ग्रस्त वाले गन्ने को काट कर बीच से दो फाड़ कर दें.

  • गन्ने की फसल पर कार्बेंडाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यूपी को 1 ग्राम प्रति लीटर की दर से घोल तैयार कर 15 दिन में 2 बार छिड़कते रहें.

ये खबर भी पढ़े: Plum Cultivation: आलूबुखारा के पौधरोपण का समय, विधि, किस्में, खाद व उर्वरक और पौधों के बीच अंतर जानने के लिए पढ़िए ये लेख

English Summary: Information on prevention of red rot disease in sugarcane crop for farmers

Like this article?

Hey! I am कंचन मौर्य. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

Share your comments

हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें. कृषि से संबंधित देशभर की सभी लेटेस्ट ख़बरें मेल पर पढ़ने के लिए हमारे न्यूज़लेटर की सदस्यता लें.

Subscribe Newsletters

Latest feeds

More News