1. खेती-बाड़ी

मिर्च की नर्सरी के लिए स्थान का चुनाव और मिट्टी उपचार के फायदे

Chilli Crop

Chilli Crop

नर्सरी का चयन करते समय निम्न तथ्यों का ध्यान रखें (Keep the following facts when choosing a nursery)

  • जमीन कार्बनिक पदार्थ से भरपूर उपजाऊ, दोमट, खरपतवार रहित व अच्छे जल निकास वाली होनी चाहिए. 

  • नर्सरी में लंबे समय तक धूप रहती हो और इसके पास सिंचाई की सुविधा मौजूद हो.

  • चुना हुआ क्षेत्र ऊंचा हो ताकि पानी न ठहरे और कीट व रोग से पौध को नुकसान न हो.  

  • अम्लीय या क्षारीय जमीन का चयन भी नहीं करना चाहिए. इसके लिए मिट्टी जांच अवश्य करा लें और नर्सरी के पास बहुत बड़े पेड़ न हों. 

  • एक स्थान पर बार-बार नर्सरी का निर्माण न करें, नहीं तो पिछली फसल के बीजाणु मिर्च की पौध को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

मिर्च की नर्सरी में मिट्टी उपचार के फायदे (Benefits of soil treatment in Chilli nursery)

  • अनेक प्रमुख कीटों की प्रावस्थायें व मिट्टी जनित रोगों के कारक मिट्टी में पाये जाते हैं, जो फसलों को विभिन्न प्रकार से नुकसान पहॅुचाते हैं. प्रमुख रूप से दीमक, सफेद गिडार (व्हाइट ग्रब), कटवर्म, सूत्रकृमि, आदि को मिट्टी उपचार द्वारा नष्ट किये जा सकते हैं. 

  • फफूंद/जीवाणु रोगों के भी मिट्टी जनित कारक मिट्टी में पाये जाते हैं, जो अनुकूल परिस्थितियों में पौधे की विभिन्न प्रावस्थाओं को संक्रमित कर फसल उत्पादन में बाधक बन हानि पहॅुचाते हैं. 

  • मिट्टी उपचार करने से मिर्ची के पौधें का सम्पूर्ण विकास, सम्पूर्ण पोषण वृद्धि तथा भरपूर गुणवत्तायुक्त उत्पादन प्राप्त होता है. 

  • मिट्टी की संरचना सुधरने के साथ-साथ रसचूसक कीटों और रोगों का भी आक्रमण कम हो जाता है.  

  • कीट व रोगों के आक्रमण करने के बाद उपचार करने से कृषि रसायनों का अधिक उपयोग किया जाता है, जिससे अधिक खर्चा हो जाने के कारण उत्पादन लागत में वृद्धि होती है.  

नर्सरी तैयार करने की प्रक्रिया (Nursery preparation process) 

नर्सरी के लिए चयनित क्षेत्र को सबसे पहले साफ करके देसी हल से 2 बार खेत की जुताई कर लें. मिर्च के बीजों की बुवाई हेतु 3 मीटर लम्बाई और 1.25 मीटर चौड़ाई की क्यारियां जमीन से 8-10 सेमी ऊँची उठी हुई बना लें, ताकि पानी इक्क्ठा होने से बीज व पौध न सड़ जाये. एक एकड़ के लिए खेत के लिए लगभग 16 से 18 क्यारियां नर्सरी के लिए पर्याप्त रहती है.  

इन क्यारियों में 150 किलो अच्छी सड़ी गोबर की खाद के साथ एक किलो डीएपी और 250 ग्राम कॉम्बैट (ट्राइकोडर्मा विरिडी) प्रति वर्ग मीटर की दर से भूमि में समान रूप से मिलाएं, ताकि इससे मिट्टी की संरचना सुधार, मिर्च का संपूर्ण विकास, पौध में संपूर्ण पोषण वृद्धि के साथ-साथ कवकजनित रोगों से बचाव हो सके. यदि मृदा जनित कीट जैसे दीमक के समस्या हो तो कार्बोफ्युरॉन 15 ग्राम प्रति क्यारी की दर से उपयोग करें.

अब इन क्यारियों में 5 सेमी की दुरी पर 0.5-1 सेमी गहरी नालियां बनाकर बीजों की बुवाई करे. एक एकड़ के लिए 60-80 ग्राम मिर्च के बीजों की आवश्यकता नर्सरी में होती है. बुआई के बाद आवश्यकता अनुसार नर्सरी में सिंचाई करते रहें.

खरपतवारों को कैसे दूर करें? (How to remove weeds)

खरपतवारों को यदि उचित समय पर नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह सब्जियों की उपज एवं गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं. खरपतवारों की वजह से 50-70 प्रतिशत तक हानि हो सकती है. खरपतवार मिर्ची के उत्पादन को कई तरह से प्रभावित करते हैं. जैसे- संक्रमण फैलाने वाले कीट एवं फफूंद को आश्रय देते हैं. मिर्च के बीजों की बुआई के 72 घंटों के भीतर 3 मिली पेंडीमेथालिन 38.7 CS प्रति लीटर पानी में मिलाकर मिट्टी में छिड़काव कर देना चाहिए. समय समय पर खरपतवार उग जाने पर हाथों से ही उखाड़ कर नर्सरी को खरपतवार मुक्त रखना चाहिए. 

English Summary: How to choose a nursery location for Chilli and know the benefits of soil treatment

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