1. खेती-बाड़ी

जनवरी में किसान करेंगे ये कृषि और बागवानी के काम, तो मिलेगी बेहतर उपज

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आधुनिक खेती करने के लिए किसानों के पास ये जानकारी होनी बहुत ज़रूरी है कि वे किस महीने में कौन-सा कृषि कार्य करें क्योंकि मौसम में परिवर्तन आता रहता है और ये कृषि कार्य को बहुत ज्यादा प्रभावित करता है. ऐसे में देश में अलग-अलग फ़सली सीजन में अलग–अलग फसलों की खेती की जाती है ताकि फसल की अच्छी पैदावार ली जा सके. ऐसे में आइये जानते हैं कि जनवरी में किसान कौन-सा कृषि कार्य करें जिससे उनके फसल उत्पादन पर कोई प्रभाव न पड़े-

गेहूं

  • गेहूं में दूसरी सिंचाई बुवाई के 40-45 दिन बाद कल्ले निकलते समय और तीसरी सिंचाई बुवाई के 60-65 दिन बाद गांठ बनने की अवस्था पर करें.

  • गेहूं की फसल को चूहों से बचाने के लिए ज़िंक फॉस्फाइड से बने चारे अथवा एल्यूमिनियम फॉस्फाइड की टिकिया का उपयोग करें.

जौ

  • जौ में दूसरी सिंचाई, बुवाई के 55-60 दिन बाद गांठ बनने की अवस्था पर करें.

चना

  • फूल आने के पहले एक सिंचाई ज़रूर करें.

  • फसल में उकठा रोग की रोकथाम के लिए बुवाई से पूर्व ट्राइकोडर्मा 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर 60-75 किग्रा सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर भूमि शोधन करना चाहिए.

मटर

  • मटर में बुकनी रोग (पाउडरी मिल्ड्यू), जिसमें पत्तियों, तनों तथा फलियों पर सफेद चूर्ण फैल जाता है, की रोकथाम के लिए प्रति हेक्टेयर घुलनशील गंधक 80%, 0 किग्रा 500-600 लीटर पानी में घोलकर 10-12 दिन के अंतराल पर छिड़कें.

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राई-सरसों

  • राई-सरसों में दाना भरने की अवस्था में दूसरी सिंचाई करें.

  • माहू कीट पत्ती, तना और फली सहित सम्पूर्ण पौधे से रस चूसता है. इसके नियंत्रण के लिए प्रति हेक्टेयर डाइमेथोएट 30% ई.सी. की 1.0 लीटर मात्रा 650-750 लीटर पानी में घोलकर छिड़कें.

शीतकालीन मक्का

  • खेत में दूसरी निराई-गुड़ाई, बुवाई के 40-45 दिन बाद करके खरपतवार निकाल दें.

  • मक्का में दूसरी सिंचाई बुवाई के 55-60 दिन बाद और तीसरी सिंचाई बुवाई के 75-80 दिन बाद करनी चाहिए.

शरदकालीन गन्ना

  • आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें.

  • गन्ना को तनाछेदक कीटों से बचाने के लिए प्रति हेक्टेयर 30 किग्रा कार्बोफ्युरॉन 3% सी0 जी0 का उपयोग करें.

बरसीम

  • कटाई और सिंचाई 20-25 दिन के अन्तराल पर करें. प्रत्येक कटाई के बाद भी सिंचाई करें.

    बागवानी कार्य

सब्जियों की खेती

  • आलू, टमाटर तथा मिर्च में पछेती झुलसा से बचाव के लिए मैंकोजेब 75% डब्ल्यू. पी. की 2 किग्रा मात्रा प्रति हेक्टेयर 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिड़कें.

  • मटर में फूल आते समय हल्की सिंचाई करें. आवश्यकतानुसार दूसरी सिंचाई फलियाँ बनते समय करनी चाहिए.

  • गोभी वर्गीय सब्जियों की फसल में सिंचाई, गुड़ाई तथा मिट्टी चढ़ाने का कार्य करें.

  • टमाटर की ग्रीष्मकालीन फसल के लिए रोपाई कर दें.

  • जायद में मिर्च तथा भिंडी की फसल के लिए खेत की तैयारी अभी से शुरू कर दें.

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फलों की बागवानी

  • बागों की निराई-गुड़ाई एवं सफाई करें.

  • आम के नवरोपित एवं अमरूद, पपीता, लीची के बागों की सिंचाई करें.

  • आम के भुनगा कीट से बचाव के लिए मोनोक्रोटोफास 36% एस.एल.1.5 मिली. प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें.

  • आंवला के बाग में गुड़ाई करें एवं थाले बनायें.

पुष्प और सगन्ध पौधे

  • गुलाब में समय-समय पर सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई करें तथा आवश्यकतानुसार बंडिंग और इसे जमीन में लगाने का कार्य कर लें.

  • मेंथा के सकर्स की रोपाई कर दें. एक हेक्टेयर के लिए 2.5 - 0 कुन्टल सकर्स आवश्यक होगा.

English Summary: Farmers should do these agricultural and horticultural works in January for better yield

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