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Lal Chandan: लाखों नहीं 'करोड़ो' का मुनाफा देती है लाल चंदन की खेती, जानें कैसे उगाते हैं इस दुर्लभ पेड़ को

लाल चंदन लकड़ी का एक अनूठा और दुर्लभ रूप है, जिसे भारत के गौरव के रूप में व्यक्त किया जा सकता है. लाल चंदन के रूप में जानी जाने वाली इस कीमती नकदी फसल से भारतीय लंबे समय से वंचित हैं. यह जंगली पेड़ करोड़ों रुपये की उपज देता है. यह मुख्य रूप से केवल दक्षिण भारत में पाया जाता है.

रुक्मणी चौरसिया

क्या आपको पता है सफ़ेद चंदन (White Sandalwood) के अलावा लाल चंदन (Red Sandalwood) भी होता है. जी हां, यह लकड़ी का एक अनूठा और दुर्लभ रूप है, जिसे भारत के गौरव के रूप में व्यक्त किया जा सकता है. खास बात यह है कि लाल चंदन की खेती (Red Sandalwood Farming Profit) आपको लाखों में नहीं बल्कि करोड़ों में कमा कर दे सकती है, क्योंकि इसकी मार्किट में डिमांड 'लाल सोने' की तरह ही बनी रहती है.

क्या है लाल चंदन (What is Red Sandalwood)

लाल चंदन का पेड़ केवल भारत के पूर्वी घाट के दक्षिणी भागों में ही पाया जा सकता है. Lal Chandan के अलग-अलग नाम हैं जैसे अल्मुग, सौंडरवुड, रेड सैंडर्स, रेड सैंडर्सवुड, रेड सॉन्डर्स, रक्त चंदन, लाल चंदन, रागत चंदन, रुखतो चंदन. लाल चंदन के पेड़ का वैज्ञानिक नाम पटरोकार्पस सैंटालिनस है.

लाल चंदन की विशेषताएं (Features of Red Sandalwood)

  • लाल चंदन एक छोटा पेड़ है, जो 5-8 मीटर ऊंचाई तक बढ़ता है और यह गहरे लाल रंग का होता है.

  • लकड़ी की घरेलू, पूर्वी एशियाई देशों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से अत्यधिक मांग है.

  • आम तौर पर, लाल चंदन की लकड़ी का उपयोग मुख्य रूप से नक्काशी, फर्नीचर, डंडे और घर के लिए किया जाता है.

  • दुर्लभ लाल चंदन अपने ध्वनिक गुणों के लिए अत्यधिक मूल्यवान है और इसका उपयोग ज्यादातर संगीत वाद्ययंत्र बनाने के लिए किया जाता है.

  • इसके अलावा, लकड़ी का उपयोग सैंटालिन, दवा और सौंदर्य प्रसाधन के निष्कर्षण के लिए किया जाता है.

लाल चंदन की खासियत (Specialty of Red Sandalwood)

"लाल चंदन" (Red Sandalwood) के रूप में जानी जाने वाली इस कीमती नकदी फसल से भारतीय लंबे समय से वंचित हैं. यह जंगली पेड़ करोड़ों रुपये की उपज देता है, लेकिन इसके विकास के लिए कम से कम मानवीय देखभाल की आवश्यकता होती है. भारत केवल छह देशों में से एक है और यह मुख्य रूप से केवल दक्षिण भारत में पाया जाता है.

लाल चंदन की खेती (Red Sandalwood Cultivation)

  • बजरी वाली दोमट मिट्टी के साथ जल निकास वाली लाल मिट्टी मुख्य रूप से Laal Chandan Ki Kheti के लिए उपयुक्त होती है.

  • यह शुष्क गर्म जलवायु में अच्छी तरह से उग पाता है.

  • लाल चंदन को भारत में कहीं भी उगाया जा सकता है.

  • इसको 10 x 10 फीट की दूरी में लगाया जा सकता है.

  • प्रत्येक पेड़ 500 किलोग्राम लाल चंदन की 10 साल की उपज देता है.

  • लाल चंदन के पेड़ों को अपने पहले दो वर्षों में खरपतवार मुक्त वातावरण में उगाएं.

  • भूमि की बार-बार जुताई की जाती है और इसकी 45 सेमी x 45 सेमी x 45 सेमी आकार के साथ 4 मीटर x 4 मीटर की दूरी पर गड्ढे खोदे जाते हैं.

  • Red Sandalwood की बुवाई का सबसे अच्छा समय मई से जून है.

  • लाल चंदन के पौधों को रोपाई के तुरंत बाद सिंचित कर दिया जाता है. फिर मौसम की स्थिति के आधार पर 10-15 दिनों के अंतराल पर सिंचाई की जा सकती है.

  • लाल चन्दन के पेड़ की पत्ती खाने वाली इल्ली अप्रैल से मई तक फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. इसलिए साप्ताहिक अंतराल पर दो बार 2% मोनोक्रोटोफॉस का छिड़काव करके नियंत्रित किया जा सकता है.

  • इस लाल चंदन के पेड़ की प्रजाति का विकास बेहद धीमी गति से होता है और सही मोटाई हासिल करने में कुछ दशक लग जाते हैं.

  • यह एक उच्च मांग वाला छोटा पेड़ है जो 150 से 175 सेमी . के तने के साथ 9 मीटर लंबा होता है.

  • यह बड़ा होने पर 3 साल में 6 मीटर लंबा हो जाता है.

  • यह पेड़ पाले से सहने योग्य नहीं है.

  • इसकी तीन पत्तों वाली त्रिकोणीय पत्तियां होती हैं.

  • लाल चंदन को चीन में ऐतिहासिक रूप से महत्व दिया गया है जिन्होंने शास्त्रीय चीनी की शुरुआत की थी.

  • Lal Chandan मुख्य रूप से बेशकीमती लकड़ियों में से एक है.

लाल चंदन का उपयोग (Use of Red Sandalwood)

माना जाता है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक टन लकड़ी की कीमत 20 से 40 लाख रुपये के बीच होती है. लाल चंदन और इस लकड़ी से बने उत्पादों की विशेष रूप से चीन और जापान जैसे देशों में भारी मांग है.

इसका ज्यादातर उपयोग संगीत वाद्ययंत्र, फर्नीचर, मूर्तियां आदि बनाने के लिए किया जाता है. लाल चंदन से तैयार की जाने वाली हस्तशिल्प की वस्तुओं की हमेशा काफी मांग रहती है.

English Summary: Cultivation of red sandalwood gives profit of 'crores', not lakhs, learn how to grow this rare tree Published on: 25 January 2022, 03:56 IST

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