1. खेती-बाड़ी

अरबी की खेती से कमाना है लाखों रुपए, तो अपनाएं कृषि वैज्ञानिक की ये सलाह

किसान फसलों की परंपरागत खेती में नई-नई तकनीक को अपना कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. वहीं, आजकल किसान अपना रुझान अरबी की खेती की तरफ भी दिखा रहे हैं. बता दें कि आने वाला महीना अरबी की खेती के लिए बहुत उचित माना जा रहा है. तो आइए आज हम आपको अरबी की कुछ उन्नत किस्मों के बारे में बताते हैं, जिनकी खेती कर किसान भाई अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

स्वाति राव
Agriculture
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किसान फसलों की परंपरागत खेती में नई-नई तकनीक को अपना कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. वहीं, आजकल किसान अपना रुझान अरबी की खेती की तरफ भी दिखा रहे हैं. बता दें कि आने वाला महीना अरबी की खेती के लिए बहुत उचित माना जा रहा है. तो आइए आज हम आपको अरबी की कुछ उन्नत किस्मों के बारे में बताते हैं, जिनकी खेती कर किसान भाई अच्छा मुनाफा कमा सकते  हैं.

इसके अलावा अखिल भारतीय समन्वित कंदमूल अनुसंधान परियोजना (All India Integrated Tuberculosis Research Project) तिरहुत कृषि महाविद्यालय ढोली केन्द्र पर किए गए अनुसंधान के परिणामों से यह साबित हो गया है कि अरबी के साथ और भी फसलों की खेती कर सकते हैं.

कृषि वैज्ञानिक ने दी सलाह (Agricultural Scientist Gave Advice)

  • अगर किसान भाई सिंचित अवस्था (irrigated condition) में अरबी की दो कतारों के बीच प्याज के तीन कतारों की अन्तर्वर्ती खेती करते हैं, तो इससे वह अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं.

  • अरबी की खेती के बीच लीची और आम के पेड़ों को लगते हैं, तो इससे भी अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. ऐसा करने से पेड़ों के कतारों के बीच पड़ी भूमि का सही ढ़ग से इस्तेमाल हो जाता है. इसके साथ ही बागों की निराई-गुड़ाई होने से फलों की अच्छी उपज प्राप्त होती हैं.

  • रबी मक्का की खड़ी फसल में कतारों के बीच अरबी की रोपाई फरवरी में करके भी अच्छी आय प्राप्त की जा सकती है. मक्का कटने के बाद अरबी की फसल मे वांछित कृषि का कार्य कर सकते हैं.

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अरबी की उन्नत किस्म (Improved Variety Of Arabic)

राजेन्द्र अरबी-1 (Rajendra Arbi-1)

राजेंद्र अरबी अगेती किस्म है. यह किस्म 160 से 180 दिनों में तैयार हो जाती है. इस किस्म को राजेन्द्र कृषि विष्वविद्यालय, बिहार, पूसा (समस्तीपुर) द्वारा साल 2008 में विकसित किया गया था. इस किस्म की औसत उपज 18-20 टन/हेक्टर है.

मुक्ताकेषी किस्म (Muktkoshi Kism)

अरबी की यह किस्म केन्द्रीय कन्दमूल फसल अनुसंधान संस्थान के क्षेत्रीय केन्द्र भुवनेष्वर (उड़ीसा) द्वारा साल 2002 में विकसित की गयी है. इस किस्म की औसतन उपज क्षमता 16 टन/हेक्टर है.

..यू. काल-46 (A. A. U. Call-46)

अरबी की यह किस्म अखिल भारतीय समन्वित कन्दमूल अनुसंधान के 15वें वार्षिक कर्मशाला द्वारा साल 2015 में विकसित की गयी है. यह किस्म 160 से 180 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इस किस्म की उपज क्षमता 18-20 टन/हे0 है.

English Summary: cultivation of arabic in this way will result in more profit, know what the agricultural scientist Published on: 30 November 2021, 05:06 IST

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