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रंगीन फल सब्जियों से तंदरूस्त बनेगी आपकी सेहत

जीवन जीने के लिए शरीर का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है। स्वस्थ रहने के लिये शरीर में हर चीज की मात्रा का संतुलित होना बहुत आवश्यक है। जीवन की हर एक वस्तु बहुत उपयोगी होती है परन्तु एक संस्कृत श्लोक है कि 'अति सर्वत्र वर्जयेत्' अर्थात् किसी भी चीज की अति नुकसानदायक होती है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिये फल-सब्जियां बहुत ही उपयोगी सिद्ध हुई परन्तु वो भी एक सीमित मात्रा में लेना चाहिये।

फलों एवं सब्जियों का मानव भोजन में महत्वपूर्ण स्थान है, ये जो पोषक तत्वों से भरपूर तथा स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यन्त आवश्यक है। पौधों में पाये जाने वाले विभिन्न फाइटोकैमिकल्स, जो स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभकारी होते हैं। विभिन्न फाइटोकैमिकल्स की वजह से साग-सब्जी एवं फल भिन्न-भिन्न रंगों में (जैसेः-लाल, हरा, सफेद, नीले में) पाये जाते हैं। रंगीन फाइटोकैमिकल्स (पौधे रंजक) फलों एवं सब्जियों को रसायन आधार प्रदान करते हैं, एंटीऑक्सीडेंट शरीर में कैंसर को निष्क्रिय करने के लिये काम आते हैं।

हरी पत्तेदार सब्जियां बीटा-कैरोटीन एस्कॉर्बिक एसिड, फोलिक एसिड और फ्री-रेडिकल्स, राइबोफ्लोविन जैसे विटामिनों के अतिरिक्त लोहा, कैल्शियम और फास्फोरस आदि खनिजों व प्रोटीन के प्रचुर स्त्रोत माने गये हैं। हरी पत्तेदार सब्जियां बाजार में सब्जियों का सबसे सस्ता स्त्रोत माना गया है और इसे गरीब आदमी की सब्जियों के रूप में भी वर्णित किया गया है।

भारत विश्व में चीन के बाद सब्जियों और फलों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, नई दिल्ली द्वारा संतुलित आहार के लिए 125 ग्राम हरी पत्तेदार सब्जियां, 100 ग्राम जड़ सब्जियां और 75 ग्राम अन्य सब्जियां, प्रतिदिन प्रति व्यक्ति (वयस्क) को खाने की सलाह दी गयी है। प्रकृति में पायी जाने वाली रंगीन सब्जियां और फल मानव को आकर्षित करते हैं। भिन्न-भिन्न रंग के भिन्न-भिन्न पोषक तत्वों की फलों व सब्जियों में उपस्थिति को दर्शाते हैं। विभिन्न प्रकार के फल एवं सब्जी हमारे स्वास्थ्य के लिये अनिवार्य घटक हैं।

रंगीन फल और सब्जियां

नीले/बैंगनीः-

फलों एवं सब्जियों में पाये जाने वाले नीले एवं बैंगनी रंग फ्लेवोनोइडस और एन्थोसायनिन की उपस्थिति के कारण होते हैं। जो एक शक्तिशाली एंटीआक्सीडेंट है तथा शरीर की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत करने का तथा क्षति से बचाने का कार्य करते हैं, ये कुछ कैंसर के खतरों को भी कम कर देते हैं।

जामुनः-

जामुन की गुठली चिकित्सा की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी मानी गई है। इसकी गुठली के अंदर की गिरी में जंबोलीननामक ग्लूकोसाइट पाया जाता है। यह स्टार्च को शर्करा में परिवर्तित होने से रोकता है। इसी से मुधमेह के नियंत्रण में सहायता मिलती है। जामुन के कच्चे फलों का सिरका बनाकर पीने से पेट के रोग ठीक होते हैं। जामुन के नियमित रूप से सेवन करने से कब्ज दूर होती है और भूख बढ़ती है। कुछ देशों में जामुन के रस से विशेष औषधियों का निर्माण किया जा रहा है। जामुन की छाल को माउथवॉशके रूप में सेवन से गले के रोगों में आराम मिलता है। विषैले जंतुओं के काटने पर जामुन की पत्तियों का रस के सेवन लाभ मिलता है। जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है और मूत्राशय मे आई असामान्यता को सामान्य बनाने में सहायक होता है। जामुन की पत्तियों का रस के नियमित सेवन से रक्त की कमी , शारीरिक दुर्बलता, यौन तथा स्मरण, शक्ति हैजा जैसे रोगों के निवारण में बहुत उपयोगी होता है।

जामुन स्वाद में खट्टा-मीठा होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद है। इसमें उत्तम किस्म का शीघ्र अवशोषित होकर रक्त निर्माण में भाग लेने वाला तांबा पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। यह त्वचा का रंग बनाने वाली रंचक द्रव्य मेलेनिन कोशिका को सक्रिय करता है। अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है।

सफेदः-  सफेद फल और सब्जियों मे पाये जाने वाले बीटा-ग्लूकेन्स, एपिगैलेक्टा चेनगैलेट, सिकोयसोलेरिसिलेरिसनोल, डायग्लुकोसाइड और लिग्नांस जैसे पोषक तत्व जो शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सामान्य रखने के साथ ही साथ कैंसर को भी नियंत्रित करते हैं और रक्तचाप को भी स्थिर बनाये रखने में सहायक होते हैं। ये पोषक तत्व शरीर में बी और टी कोशिकाओं को सक्रिय कर देते हैं। जो स्तन और प्रोस्टैट कैंसर से सम्बंधित कैंसर के जोखिम को भी कम करने में सहायक होते हैं। सफेद फलों एवं सब्जी में प्रचुर मात्रा में पोटेशियम होता है। उदाहरण-केला, प्याज, फूलगोभी, पार्सेनिप्स, लहसुन, अदरक, शलज़म और मशरूम हैं।

मूली को सलाद के रूप में ज्यादातर प्रयोग किया जाता है। मूली में प्रोटीन, कैल्शियम, आयोडीन और आयरन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। अधिकतर सलाद के रूप में खायी जाने वाली मूली में क्लोरीन, फास्फोरस, सोडियम और मैग्नीशियम भी पाया जाता है।  ताजा मूली खाने से पाचनशक्ति बढ़ती है। मूली में विटामिन ए, बी और सी भी होता है। पेट और मूत्र विकार के अलावा यह अन्य कई लाभ भी पहुंचाती है। आइए हम आपको बताते है कि मूली हमारे स्वास्थ्य के लिए कितनी फायदेमंद है।

 मूली के लाभः-

पेट के लिए मूली बहुत लाभदायक होती है। पेट की कई बीमारियों में मूली का रस बहुत फायदेमंद होता है। पेशाब होने में दिक्कत हो तो मूली के रस का सेवन फायदेमंद होता है। अगर पेशाब आना बंद हो जाए या पेशाब में जलन हो तो मूली का रस बहुत फायदेमंद होता है। लीवर व प्लीहा के मरीजों को अपने दैनिक भोजन में मूली का जमकर सेवन करना चाहिए। मूली का रस दिल के लिए बहुत फायदेमंद होता है। मूली के रस से गला भी साफ हेता है। मूली को हल्दी के साथ खाने से बवासीर में फायदा होता है। बवासीर के मरीजों को हर रोज मूली का सेवन करना चाहिए। मूली दांतों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। मूली खाने से दांत मजबूत होते है। मूली में कैल्शियम पाया जाता है, इसलिए यह हड्डियों को भी मजबूत करता है। मूली के रस को अनार के रस में मिलाकर पीने से हीमाग्लोबिन बढ़ता है। दमा और खांसी के मरीजों को मूली का सेवन करना चाहिए। त्वचा के रोगों में मूली के पत्तों और बीजों के लेप से त्वचा सम्बन्धी रोग खत्म हो जाते है। थकान मिटाने और अच्छी नींद लाने में भी मूली काफी फायदेमंद होती है। पेट के कीड़ों को नष्ट करने में भी कच्ची मूली फायदेमंद साबित होती है। हाई ब्लड प्रेशर को शांत करने में मूली मदद करती है। पेट सम्बन्धी रोगों में यदि मूली के रस में अदरक का रस और नींबू मिलाकर नियमित सेवन से भूख बढ़ती है।

पीले एवं नारंगी रंग के फल एवं सब्जीः-

पीले एवं नारंगी रंग के फल एवं सब्जी विटामिन सी, एंटीऑक्सीडेन्ट, कैरोटीनॉइडस, बीटा कैरोटीन, जियेजैथिन इत्यादि और बायोफ्लेवोनोइडस प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। बायोफ्लेवोनोइडस जो कि समूह फाइटोकैमिकल्स के अंतर्गत आते हैं। जो हृदय रोग में अत्यंत लाभकारी साथ ही साथ यह एलडीएल और रक्तचाप को बनाये रखने में सहायक है। यह मानव अस्थियों के निर्माण, मरम्मत व जोड़ने में सहायक होता है और यह शरीर में यह क्षारीय संतुलन को प्रोत्साहित करते हैं। यह मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता और दृष्टि क्षमता को बनाये रखने में हितकारी सिद्ध हुआ है। नारंगी और पीले फल एवं सब्जियों के अंतर्गत पीले रंग के सेब, आड़ू, खुबानी, नाशपाती, पीली मिर्च, नांरगी गाजर, पीले रंग के कद्दू, पपीता, बर्टनट स्क्वैश समूह सम्मिलित हैं।

लालः-

लाल रंग के फल एवं सब्जियों में प्रचुर मात्रा में एंथोसायनिन, एललगिक एसिड और हिस्पपरिडिन पाया जाता है। जो शरीर में कोशिकाओं को क्षति होने से बचाये रखने में सहायक होते हैं तथा स्मरणशक्ति को लंबे समय तक बनाये रखने में सहायक होते हैं और शरीर में एलडीएल, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके हृदय आघात के जोखिम को कम कर देता है, साथ ही साथ यह पोषक तत्व कैंसर विकार, मूत्र संबंधी विकार और गठिया संबंधी रोग में सहायक सिद्ध हुए हैं। लाल समूह के अंतर्गत लाल सेब, लाल गोभी, चेरी, गुलाबी अंगूर, स्ट्रॉबेरी, टमाटर और तरबूज इत्यादि फल एंव सब्जी आते हैं।

लाल गाजर केवल देखने में ही आकर्षक नहीं होती है, बल्कि इसके कई चमत्कारिक फायदे भी है। इस लेख में हम जानेंगे कि गाजर के लाभ क्या हैं, इसके जूस के क्या फायदे हैं, इसका उपयोग किस तरह करना चाहिए। यह आंखों और दांतो के लिए फायदेमंद है। गाजर का नियमित सेवन आपको निरोगी रहने में मदद करता है। गाजर का सेवन पुरूषों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है।

गाजर के फायदे और उपयोगः-

गाजर का जूस पीने से खून साफ होता है। यह बीपी को नियंत्रित रखने में मदद करता है। गाजर का जूस नियमित पीने वाले लोगों को कैंसर नहीं होता है। गाजर का जूस पाचनतंत्र को स्वस्थ रखता है। त्वचा, बाल या नाखून ड्राई हो जाने पर गाजर का जूस का सेवन करना चाहिए।

 गाजर के रस में नमक, धनिया पत्ता, जीरा, काली मिर्च और नींबू का रस डालकर पीने से पाचन संबंधित परेशानी दूर होती है। नियमित गाजर खाने वाले लोगों को रतौंधी की समस्या नहीं होती है। गाजर का नियमित सेवन सूरज की किरणों से होने वाले नुकसान से त्वचा को बचाता है। इसके नियमित सेवन से कब्ज दूर होती है। गाजर हमारे शरीर में विटामिन ए की कमी नहीं होने देता है जिस कारण विटामिन ए की कमी से होने वाली कोई भी बीमारी नहीं होती है। सर्दी-जुकाम में गाजर नियमित खाना चाहिए। गाजर का नियमित सेवन शुगर लेवल को नियंत्रित में रखने में मदद करता है। गाजर का नियमित सेवन शुक्राणु की गुणवत्ता बढ़ाने में भी मदद करता है।

हराः-  हरे रंग के फलों और सब्जियों में क्लोरोफाइल, ल्यूटिनस, बीटा-कैरोटिन, कैल्शियम, फोलेट, विटामिन्स और फाइबर (रेशा) आदि पोषक तत्व पाये जाते हैं जो कैंसर के खतरे को नियंत्रित कर देते हैं। शरीर में रक्तचाप और एलडीएल कोलेस्ट्राल के स्तर को कम कर देते हैं। शरीर में पाचन प्रक्रिया को सामान्य बनाये रखने में, नेत्र सम्बन्धी (रेटिना विकार) रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखते हैं। हरे सेब, हनीदयु, (शरद खरबूजद्ध तरबूज, आर्टिचोक, कीवी, शतावरी, सलाद, हरी बीन्स, प्याज, ब्रोकेली, मटर, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, हरी मिर्च, हरी गोभी, पालक, हरे अंगूर आदि इस वर्ग के अंतर्गत आते हैं।

ब्रोकली एक क्रूसीफेरी वनस्पति है और यह ब्रेसिका परिवार की सदस्य है। ब्रेसिका परिवार के सदस्य फाइटोकैमिकल्स में समृद्ध होते हैं जिनमें ऑक्सीडेंट गुण होता है। ब्रोकली इसी वर्ग में होती है। यह हरे रंग की, एक पौष्टिक सब्जी है जो कि विटामिन सी’, खनिज लवण, कैल्शियम, फाइबर और विटामिन्स से समृद्ध शाक है। इसमें एक सल्फोरोफेन (सल्फरयुक्त) नामक रसायन जो कैंसर विकार रोधक होता है। कच्ची ब्रोकली के सेवन से यह त्वचा में होने वाले नुकसान से जैसे- दैनिक जीवन के प्रदूषण और सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों और असमय झुर्रियों से मुक्त के सुधार में सहायक होती है। शोध के अनुसार यह पाया गया है कि एक कप ब्रोकली के सेवन से आवश्यक विटामिन ए, सी, फोलिक एसिड, और पोटेशियम, खनिज लवण उचित मात्रा में शरीर को मिलते है।

रंगीन फल एवं सब्जियों का सेवन क्यों आवश्यक है?

हरे पत्तेदार सब्जियां वजन संतुलन में सहायक हैं क्योंकि वे आमतौर पर कैलोरी में कम होती है जो कि कैंसर और हृदयरोग के प्रभाव को कम करते हुए उपयोगी होती है। यह कम वसायुक्त उच्च फाइबर, फोलिक एसिड, विटामिन सी, पोटेशियम और मैग्नीशियम में समृद्ध हैं। साथ ही साथ यह फाइटोकैमिकल्स, जैसेः ल्यूटिन, बीटा-क्रिटसोथिन, नैक्सैथिन, बीटा-कैरोटीन से भी समृद्ध होते हैं।

हरे रंग में विटामिन्स के उच्च स्तर औस्टोकैल्सीन के उत्पादन के लिये महत्वपूर्ण है जो हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक प्रोटीन है। इन हरे पत्तेदार सब्जियों के उपयोग से मध्य उम्र की महिलाओं में हिप-फ्रैक्चर के खतरे को 45 प्रतिशत कम कर देती है। गहरे हरे पत्तेदार सब्जियों में उपस्थित ल्यूटिन और जैथिनस, कैरोटिनॉयडस आंखों की रेटिना, लैंस और मेक्यूलर क्षेत्र में क्रेंदित ऑंखों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह वर्णक मोतियाबिंद और वयस्को में उम्र से संबंधित रोग जैसे अंधापन से रक्षा करने में सहायक होते हैं।

लाल फूल एवं सब्जियां-

गहरे लाल एवं गुलाबी रंग के फल एवं सब्जियों को प्रतिदिन भोजन के रूप में लेना चाहिये। लाइकोपिन वर्णक शरीर में प्रोस्टेट कैंसर सहित कई प्रकार के कैंसर के खतरों को कम करने में मदद करता है। टमाटर के उत्पाद जैसे, सॉस पेस्ट, प्यूरी आदि लाइकोपिन के अच्छे स्त्रोत हैं। अन्य लाल फल एवं सब्जियॉ जैसे स्ट्राबेरी, रास्पबेरी और चुकुंदर में एन्थोसायनिन फाइटोकैमिकल्स के समूह शामिल होते हैं, जो शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। जो उच्च रक्तचाप को नियंत्रित और मधुमेह संबंधी रोग को भी नियंत्रित करते हैं। 

चुकुंदरः-

यह फल लाल रंग का होता है। इसलिये कई लोग इसे खून बढ़ाने वाला फल भी मानते हैं। इसमें उपस्थित सोडियम, पोटैशियम, फास्फोरस, कैल्शियम, सल्फर, आयोडीन, आयरन, विटामिन बी, बी2 और सी उचित मात्रा में पाया जाता है। इसमें उपस्थित फोलिक एसिड, गर्भवती महिलाओं के लिये फायदेमंद होता है। यह पोषक तत्व उनके गर्भ में पल रहे बच्चे के लिये महत्वपूर्ण होता है। यह स्पाइनल कॉड के विकास मे मदद करता है और ऊर्जा प्रदान करता है। चुकुंदर का उपयोग हमारे शरीर में खून बढ़ाने के लिये बहुत उपयोगी होता है। चुकुंदर में आयरन भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जिसके कारण यह लाल रक्त कोशिकाओं को सक्रिय और शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या बढ़ाने में मदद करता है। यह एनीमिया रोग में बहुत ही उपयोगी होता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी सहायक होता है।

चुकुंदर में अच्छी मात्रा में फाइबर पाया जाता है। जो पेट संबंधित बीमारियों जैसे-कब्ज और बवासीर के लिये फायदेमंद होता है। चुकुंदर में बीटासायनीन की मात्रा पायी जाती है जिसके कारण चुकुंदर का रंग हल्का भूरा बैंगनी होता है। इसी वजह से यह हमारे शरीर को कैंसर जैसी घातक बीमारियों से लड़ने में भी मदद करता है। एक शोध अनुसार यह पाया गया है कि चुकुंदर के रस में टमाटर का रस और हल्दी पाउडर का घोलकर पीने से त्वचा में चमक बनी रहती है और त्वचा मुलायम बनती है।

कीवी

कीवी में 27 से ज्यादा खनिज लवण एवं विटामिन्स होते हैं। विटामिन सी, के, ई एवं फाइबर इत्यादि। यह वजन संतुलित करने, डेंगू जैसे खतरनाक बीमारी में भी उपयोग किया जाता है। यह कोलेस्ट्रॉल से होने वाले हृदयरोग के खतरे को कम कर देता है। कीवी के नियमित सेवन से खून में ट्रायग्लिसरोइड की मात्रा घटती और यह शरीर में चर्बी जमने पर रोक लगाता है। विटामिन ई, एंटी ऑक्सीडेन्टस की मात्रा कीवी में ज्यादा होने के कारण इससे रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाती है। जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस जैसी समस्याओं के होने पर भी कीवी का उपयोग करने से बड़ा आराम मिलता है। यह अस्थिरोग ऑस्टियोपोरोसिस के लिये फायदेमंद माना गया है।

नीले रंग के फलः  नीले फल एवं सब्जी में उपस्थित फाइटोकैमिकल्स, एन्थोसायनिन एवं फिनोलस रसायन रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं और रोगों से बचाते हैं और बुढ़ापे की प्रक्रिया को कम कर देते हैं। शोध के अनुसार यह ज्ञात हुआ है कि विशेष रूप से ब्लूबेरी का सेवन करने से शरीर में रक्त संचार एवं कोशिकाओं का निर्माण होता है जो कि स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है।

बेहतर स्वास्थ्य हेतु हरी सब्जियों का सेवनः-

एक शोध के अनुसार अधिक हरी साग-सब्जियों के सेवन करने से स्वास्थ्य में उतना ही अधिक लाभ प्राप्त होता है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसेः पालक, सलाद, हरा प्याज, ब्रोकली आदि का सेवन हर रोज करना चाहिये। फ्राइटोकैमिकल्स प्रचुर मात्रा में हरी पत्तेदार सब्जियों में उपस्थित होते हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों में लाइरीन नामक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट उपस्थित होता है जो नेत्र-दृष्टि के लिये लाभकारी सिद्ध हुआ है। कॉटेज (अस्थिभंग), जो बुढ़ापे (वृद्धावस्था) के दौरान स्वाभाविक रूप से होता है। वृद्धावस्था में अस्थिभंग एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, हरी पत्तेदार सब्जियों के सेवन से लाइरीन एंटी ऑक्सीडेन्ट के कारण यह प्रक्रिया धीमी तथा नियन्त्रित हो जाती है, उसमें यह लाइरीन लाभकारी होता है। यही कारण है कि प्रतिदिन हरी सब्जियां दैनिक भोजन में लेना चाहिये। इसके अतिरिक्त हरी पत्तेदार सब्जियों में अन्य फाइटोकैमिकल्स समूह उपस्थित होते हैं। इंडोल्स के अच्छे स्त्रोत ब्रोकली एवं फूलगोभी स्तन और प्रोस्टेट कैंसर से बचाव करने में सहायक हैं।

गहरे नारंगी और गहरे पीले रंग के फल एवं सब्जियॉ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायकः-

शकरकंद, गाजर, कद्दू एवं चुकुंदर में बीटा-कैरोटीन, प्रचुर मात्रा में होते हैं। सिट्स समूह के फलों में अन्य फाइटो कैमिकल्स जिन्हें सिट्स बायोफ्लेवोनोइडस  के नाम से जाना जाता है। यह शरीर को रोगों से लड़ने की क्षमता और स्वास्थ्य को स्वस्थ रखने में सक्षम होते हैं। बायोफ्लेवोनोइडस व अन्य फाइटोकैमिकल्स समूह जो विटामिन सी के साथ मिलकर कैंसर विकार, घाव भरने और हड्डियों और दांतों को मजबूत करते हैं। यह त्वचा संबंधी रोगों और शरीर को हृदयघात से बचाव में सहायक हैं।

स्वस्थ स्वास्थ्य के लिये लहसुनः-

प्याज समूह में प्याज, लीफ, लहसुन आते हैं। इस समूह के पौधों में विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेन्टस् उच्च मात्रा में होते हैं। यह मोटापा, हृदय रोग और कैंसर से बचाव में सहायक हैं। प्याज पेट की परेशानी और पित्ताशय की थैली के विकारों सहित पाचन समस्याओं के इलाज में प्रयोग किया जाता है। यह सीने के दर्द (एनजाइना) और उच्च रक्तचाप सहित हृदय और रक्तवाहिनियों के इलाज के लिये और धमनियों के .(एथीरोस्कोरोसिस) को रोकने के लिये प्रयोग आता है। प्याज मूत्रवर्धक के रूप में काली खांसी, अस्थमा, निर्जलीकरण और मधुमेह, कब्ज में भी लाभकारी होता है। विश्व युद्ध के दौरान, लहसुन का उपयोग घावों में संक्रमण को नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध हुआ है। लहसुन के पेस्ट का उपयोग सन् 1963 में रूस में एक महामारी (फ्लू) को नियंत्रित करने में किया गया था।

सारांश -

फल एवं सब्जियां एक स्वस्थ आहार के बहुत महत्वपूर्ण घटक हैं। यह दैनिक जीवन में आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। ये प्रकृति में उपलब्ध स्वाभाविक रूप से एक अच्छे विटामिन्स और खनिज लवणों के स्त्रोत हैं। यदि हम उन्हें पर्याप्त मात्रा में रोजाना खाते हैं, तो बहुत से घातक रोगों जैसे हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर, के बचाव में सहायक होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानव को न्यूनतम 400 ग्राम फलों एवं सब्जियों को खाने (सेवन) की सलाह दी है। जो कैंसर, मधुमेह एवं मोटापे जैसे विकारों को रोकने में सहायक होते हैं। इस प्रकार बेहतर स्वास्थ्य हेतु भिन्न-भिन्न रंगों की शाक-सब्जी और फलों का दैनिक आहार में समावेश आवश्यक ले।

एम के नौटियाल

प्रध्यापक, अनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर और

लीला भट्ट

शोध छात्रा, सब्जी विज्ञान विभाग, कृषि महाविद्यालय, गोविन्द बल्लभ पन्त कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, पंतनगर



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