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100 एकड़ की बंज़र ज़मीन से किसान ले रहे हैं कॉफी की खेती, हो रही लाखों रुपये की कमाई

छत्तीसगढ़ राज्य का बस्तर जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र के नाम से जाना जाता है लेकिन अब इस जिले को कॉफी के नाम से पहचान मिल रही है. यहां के 34 से अधिक किसान कॉफी की फसल कर रहे हैं. कॉफी की खेती यहां की बंजर ज़मीन में की जा रही है.

श्याम दांगी
Coffee
Coffee

छत्तीसगढ़ राज्य का बस्तर जिला नक्सल प्रभावित क्षेत्र के नाम से जाना जाता है लेकिन अब इस जिले को कॉफी के नाम से पहचान मिल रही है. यहां के 34 से अधिक किसान कॉफी की फसल कर रहे हैं. कॉफी  की खेती यहां की बंजर ज़मीन में की जा रही है. जगदलपुर के उद्यानिकी कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. केपी सिंह के मुताबिक, हाल ही में यहां लगभग 100 एकड़ की ज़मीन में 1 लाख अरेबिका और रोबस्टा किस्म की कॉफी के पौधे लगाए गए हैं.

जिनसे चार साल बाद 7 से 10 क्विंटल की पैदावार प्रति एकड़ से मिलने लग जाएगी. डॉ. सिंह ने आगे बताया कि उद्यानिकी विभाग और जिला प्रशासन किसानों को आर्थिक मदद दे रहा है. इसके लिए किसानों को कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ रहा है. साथ ही किसानों को मनरेगा के तहत मजदूरी दी जाएगी. साथ ही किसानों की कॉफी  के उत्पादन में भी हिस्सेदारी रहेगी. 

दूसरे राज्यों के किसान देखने आते हैं 

बस्तर के दरभा के नजदीक कोलेंग मार्ग पर 20 एकड़ की ज़मीन में कॉफी  की उपज ली जा रही है. इन पौधों को 2017 में लगाया गया था. जिससे अच्छी पैदावार ली जा रही है. कॉफी  के इस बगीचे को देखने अन्य राज्यों जैसे बंगाल, तमिलनाडु, झारखण्ड, ओडिशा और केरल के बड़े किसान देखने आते हैं. बता दें एक एकड़ में कॉफी  की खेती करने के लिए 80 हज़ार से एक 1 लाख रुपये तक खर्च आता है. जिससे तकरीबन 30 साल तक फसल आती रहती है. 

प्रोसेसिंग यूनिट का प्रस्ताव

बस्तर जिले की बंजर भूमि को उपजाऊ ज़मीन बनाने की कवायद तेजी से की जा रही है. इसमें यहां के किसानों का भी सहयोग मिल रहा है. जगदलपुर के कलेक्टर रजत बंसल के मुताबिक यहां कि भूमि भौगोलिक और मौसम के लिहाज से कई तरह की फसलों के अनुकूल है. यही वजह है कि यहां खेती के नित नए प्रयोग किए जा रहे हैं. हाल ही में यहां प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव है. इससे स्थानीय किसान भी उत्साहित हैं. 

कितनी कमाई होगी

कॉफी  की खेती किसानों के लिए कमाई का अच्छा जरिया हो सकता है. इंदिरा गांधी कृषि यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर डॉ. संजय पाटिल का कहना हैं कि किसान एक एकड़ से 50 हज़ार का मुनाफा ले सकते हैं. किसानों की आवक बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों की टीम उनकी पूरी मदद कर रही हैं. बता दें कि बस्तर जिले में कॉफी  बेहतर किस्म की पैदावार होती है. 

कॉफी  का इतिहास 

गौरतलब हैं कि कॉफी बींस की खोज सबसे पहले इथियोपिया के एक बकरी चरवाहे काल्दी ने की थी. विश्व में तेल के बाद कॉफी  का सबसे बढ़ा कारोबार होता है. कॉफी  उत्पादक देशों में भारत दुनिया का छठां सबसे बड़ा देश है. दुनिया की 4 प्रतिशत कॉफी  का उत्पादन भारत करता है. 

English Summary: chhattisgarh 34 farmers of bastar are taking coffee crop in 100 acres of barren land Published on: 02 October 2020, 09:33 AM IST

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