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सबसे कम उम्र में 12वीं करने वाली पहली भारतीय

संहिता तेलंगना सबसे कम उम्र की लड़की है जिसने 17 साल की उम्र में कैट 2018 की परीक्षा पास कर अपने पहले प्रयास में 95.5 प्रतिशत स्कोर किया है. इसके तुरंत बाद वह इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग कोर्स पूरा करने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय बन गई. उन्हें 9.5 सीजीपीए के साथ अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा में टॉप करने के लिए गोल्ड मेडल और मेरिट सर्टिफिकेट भी दिया गया. इससे पहले उन्होंने सबसे कम उम्र में बारहवीं पास करने का रिकॉर्ड भी अपने नाम किया था. कैट की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद, संहिता अब वित्त विषय में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की मास्टर डिग्री ले रही है.

उसे 3 वर्ष की उम्र से ही शिक्षा के प्रति प्रेम हो गया था. वह अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने माता- पिता को देती है. वह कहती है कि जिन्होंने उसकी इच्छा और रुचियों को समझ कर उसे हौसला और हिम्मत दी जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा.

उसके पिता चाहते थे कि वह भारत में अपने अध्ययन को आगे बढ़ाए क्योंकि उसकी समझ और क्षमताएं विशेष हैं.  इसलिए उसके पिता ने भारत वापस आने के लिए अपनी अमेरीका स्थित नौकरी छोड़ दी. उनके पिता श्री एल.एन.कासी. बत्ता ने आगे बताया कि तीन साल की उम्र से ही संहिता की याद करने की कला में अद्भुत थी. जहाँ उनकी उम्र के अन्य बच्चे अभी सीखना शुरू कर रहे थे उस समय वह सभी देश और उनकी राजधानी को याद कर लेती थी और इतना ही नहीं वह उन देशों के ध्वज भी पहचान रही थी.जब वह पांच वर्ष की आयु में आयी  तो वह लेख लिख रही थी और रेखाचित्र खींच रही थी.उन्होंने सोलर सिस्टम पर एक लेख भी लिखा था, जिसकी तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम ने प्रशंसा की थी और आर्थिक मुद्दों पर उनके लेख को तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह द्वारा भी सराहना मिली थी.



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