नयी तकनीक से खेती कर दीपक कमा रहे लाखों

बिहार के बेगूसराय जिला के छौड़ाही गांव यूं तो पढ़ लिख कर अच्छे ओहदेदार नौकरी करना हर लोगों का चाहत होता है, लेकि न अगर सफलता नहीं मिले , तो थोड़ी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। अच्छी पढ़ाई -लिखाई के बावजूद भी नौकरी नहीं मिलने के बाद भी खेतीबारी कर अपने कैरियर को  न सिर्फ नये आयाम देने का प्रयास किया है बल्कि किसानी जिंदगी से आर्थिक रूप से भी अपने आप को मजबूत स्थिति में ले जाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।  ऐसे ही एक किसान मंझौल अनुमंडल क्षेत्र ही नहीं वरन जिले के कृषकों के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं हैं। मंझौल अनुमंडल क्षेत्र के पचमहला गांव निवासी जिले के जाने-माने जनकवि प्रो दीनानाथ सुमित्र के पुत्र दीपक भारती को अपनी चार एकड़ जमीन है।
वहीं पांच एकड़ जमीन ठेका बटाई ले कर खेती करते हैं। इसके साथ ही दीपक भारती मंझौल के शहीद मेजर मुकेश इंडेन गैस एजेंसी में बतौर स्टाफ भी काम करते हैं।  जमाने की भागदौड़ और परिवार चलाने के लिए रु पये की आवश्यकता ने दीपक की इच्छाशिक्त को और भी मजबूत कर दिया। गैस एजेंसी में काम करने के बाद बचे हुए समय में अपनी लगन और महनत से खेतीबारी भी करते हैं। 23 फरवरी, 1973 को किसान परिवार में जन्मे दीपक भारती हिंदी विषय से ऑनर्स कर रखा है। लंबे अरसे के बाद जब नौकरी नहीं मिली, तो स्थानीय गैस एजेंसी में बतौर स्टाफ काम करने लगे और बचे हुए समय में अपने आपको खेतीबाड़ी में लगा दिया।  
पुश्तैनी खेती कर रहे दीपक ने जमाने के हिसाब से नये तकनीक से कुछ खेती आरंभ की और सफल ता भी हाथ लगी।  ऐसे तो वह मौसम के हि साब से खरीफ में धान और रबी में गेहूं, मक्के ,दलहन,तिल हन की खेती करते हैं,लेकि न इन सबके बीच दीपक ने सीधे आलू की खेती के बजाय आलू के बीज की खेती करने लगे। उन्होंने इस बार तकरीबन एक एकड़ में आलू के बीज की फसल लगा रखी है और अपनी मे हनत की बदौलत आलू के बीज की खेती कर सफलता की राह पर अग्रसर हैं. प्रगतिशील किसान दीपक भारती ने बताया कि मुख्य रूप से वह आलू के बीज का उत्पा दन कर बाजार में बेच देते हैं और इससे उन्हें अच्छी-खासी रकम मिल जाती है।
लागत हजारों में,मुनाफा लाखों  :
प्रगतिशील किसान दीपक भारती बताते हैं कि एक एकड़ में आलू के बीज की खेती करने में उन्हें लगभग 750 किलो आलू, जिसका मूल्य 12,750, मुरगी का बीट चार ट्रेल र 600 रु  पये प्रति टेल र के हि साब से 2400 रु पये, वर्मी कंपोस्ट 25 बैग मूल्य 6,250, सिचाई 2000 हजार, मज दूरी 5000 हजार तथा अन्य मिश्रि त खर्च 5000 हजार कुल मिलाकर 37,600 रु  पये खर्च आया है. कि सान दीपक ने बताया कि इस एक एकड़ में लगभग 180 क्विंटल आलू उपजने की संभावना है। किसान की मानें तो अगर उपज उम्मीद के मुताबिक हुई, तो बीज दर के मुताबिक इस आलू के बीज की खेती से तीन लाख छियासठ हजार रु पये प्राप्त होंगे. किसान दीपक का कहना है कि कैरोंदा , डायमंड और ललित का आधार किस्म का बीज उत्पादन के लिए आलू लगाया गया है. इनका का कहना है कि महज तीन महीने के अविध में ही इतनी बडी रकम की अमादनी होगी। 
जैविक उर्वरक का करते हैं प्रयोग
आलू के बीज उतपादन करने में सबसे खास बात यह है कि किसान दीपक रसायनिक का उपयोग बिल्कुल नहीं करते हैं बल्कि जैविक उर्वरक से हैी पूरी खेती करते हैं इनका मानना है कि रासायनिक उर्वरक के प्रयोग से खेतों में पोषक तत्व की कमी होती है, तात्कालिक लाभ तो जरूर होता है , लेकिन रासायनिक काद के दूरगामी प्रभाव बहुत ही खराब होते हैं। सात ही फसल के उत्पादन पर तो असर पडता है । साथ ही रासायनिक खाद से उत्साहित फसल स्वास्थय के लिए भी उचित नहीं है। 
उनका कहना है कि खेतीबारी की नयी तकनीक और संदर्भ के बारे में स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र है उससे बेहतर जानकारी नहीं मिल पाती है और न ही विभाग से किसी तरह की समुचित मदद मिल पाती है , बल्कि अगल-बगल के जानकार किसान और अन्य स्त्नोतों से जानकारी प्राप्त कर अपने दम आलू की बीज के उत्पादन की खेती की है। अगर समुचित जानकारी मिले तो संपूर्ण क्षेत्न के किसानों को  इससे तरह के उतपादन से न सिर्फ लाभ होने के साथ आर्थिक स्थिति भी मजूबत होगा। फिर खेती घाटे का सौदा नहीं कहलायेगा।

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