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नेट हाउस में विदेशी सलाद सहित उगा रहे है कई तरह की सब्जियां

आज किसान एक साथ कई किस्म के फसलों की उन्नत खेती करके भारी मुनाफा कमा रहे है. वह अलग-अलग तरीकों से वैज्ञानिक ढंग से खेती कर रहे है. ऐसे ही समान्वित खेती को अपनाकर उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के गोपालपुर पश्चिमी गांव के युवा किसान नंदू पांडेय ने बताया कि नई किस्म की खेती कर लाखों रूपये की आमदनी कर रहे है. यह खेती युवाओं के लिए एक बेहद बड़ी मिसाल है. यहां इनके फार्म में देश विदेश से किसान उनके यहां गोष्ठी में शामिल होने आते रहते है. दरअसल नंदू के फार्म में सब्जी, विदेशी सलाद, तरबजू, खरजबूज, स्ट्रॉबेरी, शिमला मिर्च आदि की खेती देखकर मन मोहित हो जाता है. साथ ही अन्य किसान भी उनसे पूछकर ही खेती करने का कार्य तेजी से कर रहे है.

विदेशी सब्जियों से मिल रहा मुनाफा

उत्तर प्रदेश के सीतापुर से किसान शिमला मिर्च समेत कई तरह की विदेशी किस्म की सब्जियों की खेती कर रहे है.उनेक खेतों में शंख के आकार वाली ब्रोकोली है तो कई तरह की विदेशी सलादें साथ ही शिमला मिर्च की हरी, लाल, पीली और कई तरह की किस्मों की खेती हो रही है. गोपालपुर पश्चिमी में यूपी का सबसे बड़ा करीब एक हेक्टेयर का पॉली हाउस है जहां वो संरक्षित खेती करने का कार्य करते है. इनके पॉली हाउस में चार तरह की शिमला मिर्च उगती है. सके अलावा नंदू के फार्म में शिमला मिर्च के अलावा कई तरह की जैविक खेती भी होती है, अपनी सब्जियों की खेती के लिए नंदू कई तरह के कृषि कार्य के लिए अवॉर्ड भी जीत चुके है. उन्होंने बताया कि वह केवल आठवी पास है, दस साल पहले वह वह गन्ना, अरहर, गेहूं आदि की खेती भी करते थे. नंदू ने केवल दो बीघा इलाके में शिमला मिर्च की खेती को लगाया है. उनके पास 68 लाख की लागत वाला हेक्टेयर का फार्म है. उन्हें 28 लाख रूपए सरकार की तरफ से भी मिलते है.

14 रंग की शिमला मिर्च उगाने की तैयारी

 देश में बढ़ते मॉल कल्चर और लोगों की सेहत के प्रति जागरूकता से देश में विदेशी खेती की मांग तेजी से बढ़ रही है. नंदू बताते है कि वह कोशिश कर रहे है कि विदेशों की तरह ही वह 14 तरह की शिमला मिर्च की खेती करने का कार्य कर रहे है.

विदेशी सलाह और ब्रोकोली से फायदा

नंदू कई जिलों के किसान और कृषि कारोबार से जुड़े लोगों को फायदा पहुंचाते रहे है. उनका कहना है कि एक विशेष प्रकार की ब्रोकोली जो कि दिखने में बिल्कुल शंख के आकार की होती है, उन्होंने उसे चार साल पहले लंदन में खाया था. उसे यहां देखा है. नंदू ने कहा कि इस ब्रोकली के बीज वहल नेपाल से यहां पर लेकर आए थे. इस मौसम में यह 150 रूपए पीस तक आसानी से बिक जाती है. 

 



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