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हर महिला बने किसान-चाची

हमारे देश में महिलाओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। आज के आधुनिक समाज में भी कई जगह महिलाओं पर कई बंदिशें लगी हुई हैं खासकर गाँव की महिलाओं पर | उसके बावजूद राजकुमारी देवी लोकलाज की जंजीरों को तोड़ते हुए तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनीं | राजकुमारी देवी का जन्म एक शिक्षक के घर में हुआ था | मैट्रिक पास करने के बाद ही 1974 में उनकी शादी एक किसान परिवार में अनंतपुर के अवधेश कुमार चौधरी से हो गई | 1990 में चौधरी के चार भाइयों में बंटवारा हुआ और उनके हिस्से मात्र ढाई बीघा जमीन आई | उनके परिवार में तंबाकू की खेती की परंपरा थी। उन्होंने इस परंपरा को तोड़ते हुए घर के पीछे की जमीन में फल और सब्जियां लगाकर उनसे मुरब्बा व अचार जैसे कई और उत्पाद बनाना शुरू किए | इस कार्य में उन्होंने अपने आस-पास की महिलाओं को भी अपना सहयोगी बनाया |

उन्होंने साइकिल से घूमकर दूसरे गाँवओं की महिलाओं को भी खेती के गुण सिखाए | इससे उन्हें समाज में सम्मान और प्रसिद्धि मिलने लगी |  उनके काम की सराहना देशभर में होने लगी| बिहार सरकार ने 2006में उन्हें किसानश्रीसम्मान दिया | तब से लोग उन्हें किसान चाची कहने लगे | किसान चाची कई तरह के अचार और मुरब्बे बनाती हैं और मेलों में बेचती हैं |  

कृषि जागरण टीम और किसान चाची के बीच बातचीत के कुछ अंश –

शुरूआती दौर में आई मुसीबतों के बारे में पूछने पर किसान चाची ने बताया कि पहले जमाने की एक कहावत है “नौकरी करी सरकारी नहीं तो खेती करी तरकारी” इसलिए हमने भी खेती करनी शुरू कर दी। सबसे पहले हमने तम्बाकू की खेती करना शुरू किया। मैं तम्बाकू के खेतों में काम करती और मेरे पति उसे बाजार में बेचने जाते थे | हम तम्बाकू बेचते थे इसलिए कभी-कभी लोग ये कहकर नहीं बेचने देते थे कि इससे कैंसर होता है, तो उस दिन हमारा सामान नहीं बिकता था तब हम लोगों को चिंता होती कि आज पैसे नहीं आए हैं | तम्बाकू से कैंसर होता है इसलिए हमने तम्बाकू की खेती करना बंद कर दिया और साथ ही साथ अपने आसपास की महिलाओं को भी बताया कि वे लोग भी तम्बाकू की खेती ना करें |

उन्होंने बताया कि खेती के दौरान बिहार में जगह-जगह किसान मेलों का आयोजन हुआ करता था और वो अपनी सब्जी लेकर हर मेले में जाती थीं | उन्हें कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया और ये ख़बरें अखबार में भी प्रकाशित हुईं जिससे कि लोग किसान चाची को पहचानने लगे और उनसे मिलने आने लगे |

उन्होंने बताया कि जब लोग उन्हें जानने लगे तो वो आकर उनके यहां की महिलाओं को प्रशिक्षित करने के लिए कहते| पहले मैं बस से जाती थी लेकिन बस से दूर-दूर जाने में मुझे परेशानी होती थी इसलिए मैंने साईकिल खरीदी और उसे चलाना सीखा उसके बाद मैं साइकिल से गाँव-गाँव जाकर महिलाओं को कृषि के गुण सिखाती थी |

उन्होंने स्वर्ण रोजगार जयंती योजना के तहत महिलाओं के 36 ग्रुप बनाए और उन्हें ट्रेनिंग दी |  उस ग्रुप की सभी महिलाएं अब अपना रोजगार कर रही हैं। खेती, पशुपालन या मछली पालन करके ये महिलाएं आत्मनिर्भर हो गई हैं | किसान चाची आज महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं |

 



English Summary: Every woman turned up "Kisan Chachi"

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