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बागवानी के प्रति इतनी दीवानगी कि घर को बना डाला बगिया

जी हां यह सुनने में थोड़ा अजीब लगेगा लेकिन यह सच है कि एक व्यक्ति को बागवानी से इतना शौक है कि उसने अपने घर को ही बगिया में बदल डाला है. दरअसल छत्तीसगढ़ के जंजगीर चंपा में शहर के हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले संदीप सिंह ठाकुर की बागवानी के प्रति दीवानगी देखते ही बनती है. उन्होंने अपने घर को ही एक सुंदर बगिया में बदल दिया है. उनके इस बगीचे में अनेक प्रजाति के फल के साथ ही ढेर सारी सब्जी और पुष्प के पौधे लगे हुए हैं. जहां भी यह पता चलता है कि फल व पुष्प है वहां से खरीददार अपने बगीचे में पौध को लाकर लगाते हैं. इसकी देखरेख में भी वह हर रोज सुबह शाम दो घंटे तक देते हैं  जिससे बगीचा हरा भरा रहता है.

बगिया में उग रहे अलग-अलग तरह के फूल

संदीप सिंह कहते हैं कि उनको बागवानी का शौक है. उन्होने कहा कि उन्होंने कानून की पढाई की है. उसके बाद वह अभी आयकर अधिवक्ता का काम कर रहे हैं. उसके दादा किसान थे और उनको बागवानी का भी शौक था. दादा का शौक तो पोता पूरा करने में लगा हुआ है. अपने हाउसिंग बोर्ड के मकान में सामने और पीछे खाली जगह पड़ी हुई है. उन्होंने यहां पर कई तरह की किस्मों के पौधों को लगाया है. कई ऐसे पौधे है जो कि ठंड वाले क्षेत्र में पाए जाते है . उन्होंने कड़ी मेहनत करके बागवानी को लगाया है. वह बगीचे की सफाई करने के साथ ही आफिस जाते हैं  और सीधे घर आने के बाद फिर से बगीचे की साफ सफाई और देखभाल में लग जाते है. उन्होंने घर के आगे और पीछे खाली मैदान को पूरी तरह से बागिया में बदल डाला है. घर के पीछे वाले भाग में तरह-तरह के फल लगे है. सामने  वाले भाग में कई तरह के पुष्प लगे हैं. इस कार्य में उनके भाई भी उनकी मदद करते है. उनके बगीचे में चंपा, गेंदा, गुलमोहर, सूरजमुखी, गुलमेंहदी, सहित कई पुष्प लगे है. वह पेड़ों की देखभाल का कार्य निरंतर कर रहे है.

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गमले में लगा कटहल

घरों की छत पर उन्होंने दो दर्जन गमलों में कई तरह के फल और सब्जी लगा रखे हैं .जिसमें खास तरह का कटहल लगा हुआ है. इस गमले में लगा हुआ कटहल दो फीट का है लेकिन उसमें भी अब फल लग चुके हैं.

छोटी बगिया में फलों की भरमार

इस बगिया में आम, स्ट्रॉबेरी, नींबू, अंजीर, संतरा, अनार, नाशपाती, लीची, अंगूर,अमरूद, बारहमासी सहित कई तरह के फल लगे हुए हैं.

घर में बागवानी से हुए फायदें

वह कहते है कि घर में बागवानी होने से बाहर जाकर व्यायाम करने की जरूरत नहीं होती है.हम सभी अपने ही बगीचों में आराम करके अच्छा व्यायाम कर सकते हैं.

इससे वातावरण भी पूरी तरह से शुद्ध रहता है. पौधे भी ज्यादा ऑक्सीजन को छोड़ते है जिससे वह लंबे समय तक ठीक रहते है. यही वजह है कि शहरों की तुलना में गांव के लोग कम बीमार पड़ रहे है. साथ ही बागवानी होने से घर में सुंदरता के चार चांद लग जाते है.



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