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  1. ग्रामीण उद्योग

देश में गोबर से बने बैग और पेपर का बढ़ता कारोबार !

मनीशा शर्मा
मनीशा शर्मा
cetguk

गोबर का प्रयोग ज्यादातर खेतों में खाद के रूप में किया जाता है, लेकिन यह बात बहुत कम लोगों ही जानते होंगे कि यह आय बढ़ाने का एक अच्छा माध्यम है. दरअसल राजस्थान के लोग गाय के गोबर से पेपर बना कर भारी मुनाफा कमा रहे है. इससे पशुपालकों को भी काफी अच्छी आमदनी हो रही है.पहले हम गोबर से सिर्फ बायोगैस बना सकते थे. लेकिन बदलते समय के साथ इसका प्रयोग कई प्रकार के कामों में किया जा रहा है.पिछले बुधवार को केंद्रीय सूक्ष्म एवं लघु उद्यम मंत्री गिरिराज सिंह ने जयपुर में गाय के गोबर से बने पेपर का लोकार्पण किया. जिसे  खादी एवं ग्रामोद्योग मिशन के तहत  कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (KNHPI) एक यूनिट ने निर्माण किया है.

इस हैंडमेड पेपर को गाय के गोबर और कागज के चिथड़े को मिलाकर बनाया है. इस नई पहल से किसानों की आय तो बढ़ेगी ही और इससे लोगों को रोज़गार भी मिलेगा. इसके साथ ही लोगों को गोबर के द्वारा होने वाली गंदगी से भी निजात मिलेगी. जयपुर में  गौशाला विभाग की ओर से गौशालाओं को इस नई तकनीक से कागज बनाने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है.इतना ही नहीं जयपुर कि कई गौशालाओं में अब गाय के गौमूत्र पर भी प्रयोग किये जा रहे है और गौमूत्र से कीटाणुनाशक तैयार किया जा रहा है. जिससे भविष्य में फसलों को कीटों से बचाया जा सके. बता दे कि जयपुर के जालौर जिले की एक गौशाला ने अब गाय के गोबर से कागज़ बनाने काम  शुरू किया है. जिससे आस -पास के पशुपालकों को सरकार कागज बनाने के लिए प्रेरित कर रही है और उनकी आर्थिक मदद करने के लिए नई-नई योजनाएं भी बना रही है.

राजस्थान में कुल एक हज़ार से ज्यादा गौशालाएं पंजीकृत हैं. जिसमें गायों की संख्या भी पांच लाख से अधिक है. जिनसे मिले गोबर और गौमूत्र का प्रयोग जैविक खेती में और बायोगैस बनाने में किया जाता था. अब समय के साथ इस नई  पहल से हम इसका पेपर बैग बनाने में भी इस्तेमाल कर सकते है और भारी मुनाफा कमा सकते है.

English Summary: Growing bussiness of dung bags in the country

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