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कर्नाटक में भाजपा को जिताने में किसानों ने निभाया अहम किरदार ?

पिछले कई महीनो से कर्नाटक में जारी चुनावी हलचल भारतीय जनता पार्टी की जीत के साथ खत्म हुआ। कर्नाटक चुनाव में भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन करते हुए भारतीय राजनीति में अपना लोहा मनवाया। हालांकि पार्टी कुछ सीटों की वजह से बहुमत बनाने से चूक गई। परिणाम घोषित होते ही पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जश्न के माहौल में डूब गए। वैसे कर्नाटक में भाजपा की जीत के संकेत कई एक्जीट पोल ने पहले ही दिखा दिया था। अगर तय आंकड़ों की बात करें तो देश के दूसरे राज्यों की तरह कर्नाटक भी अब भगवा रंग में रंगने को तैयार है।

राज्य में कुल 222 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में भाजपा 104 सीटें जीतने में कामयाब हुई है। वहीं राज्य में चुनाव लड़ रही कांग्रेस को 78 सीटें और जेडीएस को 37 सीटें मिली हैं। बाकी की 3 सीटें अन्य के खाते में गई हैं। समीकरण की बात करें तो अनुमानित आंकड़ों के अनुसार भाजपा को जिताने में किसानों की अहम भूमिका रही। वहीं जातिय समिकरण की बात करें तो राज्य में ओबीसी, दलित और लिंगायत ने भाजपा का पूरजोर साथ दिया।

राज्य के किसानों को लुभाने के लिए पार्टी ने कई तरह की किसान हितकारी बातों का जिक्र किया। अपनी रैलियों में पार्टी के बड़े नेताओं ने किसान आत्महत्या का मुद्दा जोर-शोर से उठाया। अपने चुनावी घोषणापत्र में पार्टी ने किसानों के लिए कई बड़े वादे भी किए। वोटिंग ट्रेंड कि अगर बात करें तो भाजपा का प्रदर्शन शहरी क्षेत्र के मुकाबले ग्रमीण क्षेत्रों में ज्यादा बेहतर रहा। जिसमें किसानों की अहम भूमिका रही। राज्य में 166 सीटें ग्रामीण क्षेत्रों के अंतरगत आती हैं जिसमें 74 सीटें बीजेपी को मिली है, 57 कांग्रेस को मिली हैं, 33 जेडीएस को और 2 सीटें अन्य को मिली हैं।

इस तरह अगर आंकलन करें तो ये कहना गलत नहीं होगा की किसानों का साथ बीजेपी को मिला है। साथ ही बीजेपी पिछले चुनाव के मुकाबले इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी ज्यादा पकड़ बनाने में भी हुई है। हांलाकि अभी कर्नाटक में सरकार का गठन होना बाकी है और ये आगे परखा जाएगा की किसानों के लिए भाजपा कितना लाभकारी साबित होगी ?



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