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जानें क्या है पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण अधिनियम

आज जितनी भी पौधे की किस्में उपलब्ध है, उसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमारे किसानों एवं पौध प्रजनक अथवा वैज्ञानिकों का योगदान रहा है. कोई भी नई या अनुवांशिक किस्म का योगदान त्वरित कृषि विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है एवं ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार द्वारा पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण अधिनियम 30 अक्टूबर 2001 को लाया गया.

हेमन्त वर्मा
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आज जितनी भी पौधे की किस्में उपलब्ध है, उसमें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हमारे किसानों एवं पौध प्रजनक अथवा वैज्ञानिकों का योगदान रहा है. कोई भी नई या अनुवांशिक किस्म का योगदान त्वरित कृषि विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है एवं ऐसे कार्यों को प्रोत्साहित करने के लिए भारत सरकार द्वारा पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण अधिनियम 30 अक्टूबर 2001 को लाया गया.

पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण अधिनियम क्या है? (What is Protection of Plant Varieties and Farmers Rights Act)

यह अधिनियम किसानों और पौधा संवर्धकों के अधिकारों एवं पौधा किस्मों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रणाली स्थापित करने और पौधों की नई किस्मों के विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है. इन सभी प्रावधानों को लागू करने के लिए पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण की 11 नवंबर 2005 में स्थापना की गई थी.

किसान द्वारा विकसित की गई किस्म को ‘पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण अधिनियम’ के तहत ठीक उसी प्रकार पंजीकृत एवं संरक्षित किया जा सकता है, जिस प्रकार एक पादप प्रजनक या वैज्ञानिक करता है. ऐसा किसान आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों की जंगली जाति के संरक्षण, सुधार और परिरक्षण में लगा हुआ हो वह किसान राष्ट्रीय जीन निधि पाने का हकदार है.

किसान इस अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित किस्मों की उपज या  उनसे उत्पन्न बीजों को सुरक्षित रखने, उसका उपयोग, उससे बिजाई अथवा पुनःबिजाई, विनिमय और बांटने का अधिकारी होता है, लेकिन किसान इस अधिनियम के तहत ब्रांड युक्त संरक्षित बीजों का विक्रय करने का हक नहीं रखता.

पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के उद्देश्य (Objectives of Protection of Plant Varieties and Farmers Rights Act)

पौधा किस्म, किसानों और पौधा संवर्धकों (Promoters) के अधिकारों के संरक्षण के लिए प्रभावी प्रणाली स्थापित करना एवं पौधों की नई किस्म के विकास को प्रोत्साहित करना.

किसानों द्वारा नई पौधा किस्मों के विकास के लिए पादप अनुवांशिकी संसाधन के संरक्षण, सुधार और उनको उपलब्ध कराने में किसी भी समय किए गए उनके योगदान के संबंध में किसान अधिकारों को मान्यता एवं संरक्षण देना.

तेजी से कृषि विकास एवं पादप प्रजनकों के अधिकारों का संरक्षण करना जिसमें नई किस्मों के विकास के लिए निजी एवं सरकारी क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास के लिए निवेश को प्रोत्साहित करना.

रोपण सामग्री एवं उच्च गुणवत्ता के बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए देश में बीज उद्योगों का विकास करना.

पौधा किस्म और किसान अधिकार संरक्षण प्राधिकरण के कार्य (Functions of Plant Variety and Farmers Rights Protection Authority)

पौधों की नई किस्मों किस्मों एवं मौजूदा विद्यमान किस्मों का पंजीकरण.

नई पादप प्रजाति के लिए डीօ यूօएसօ दिशा निर्देशों को तैयार करना.

पंजीकृत किस्मों का डोक्यूमेंटेसन व लक्षण वर्णित करना.

सभी पौधा किस्मों का अनिवार्य सूचीकरण करना.

किसान एवं किसान समुदायों को मान्यता देना एवं पुरुस्कृत करना.

आदिवासी एवं ग्रामीण समुदायों को संरक्षण (protection) कार्यों से जोड़ना.

आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधे एवं उनकी जंगली प्रजातियों के पादप अनुवांशिकी संसाधनों का संरक्षण करना.

राष्ट्रीय पौधा किस्म रजिस्टर का रख रखाव.

राष्ट्रीय जीन निधि का रख रखाव.

किसान पौधा किस्म क्या है? (What is the Farmer’s plant variety)

ऐसी किस्म जिसकी किसानों द्वारा पारंपरिक तौर पर खेती की जा रही है एवं किसानों द्वारा विकसित की गई है. ऐसी किस्म जो जंगली प्रजाति की है या कोई भूमि प्रजाति है अथवा ऐसी किस्म जिसके बारे में किसान सामान्य ज्ञान रखता है किसान किस्म कहलाती है.

अधिनियम के तहत पुरस्कार (Award under the PPVFR Act)

पांच पादप जीनोम रक्षक समुदाय पुरस्कार:

यह पुरस्कार उन सभी किसान समुदायक किसान समूह, आदिवासी एवं ग्रामीण समुदायों के लिए है जो लंबे समय से पौधों के अनुवांशिकी संसाधनों के सुधार, संरक्षण एवं परीक्षण में लगे हुए हो. एक वर्ष में पांच पुरस्कार दिए जा सकते हैं, जिसके अंतर्गत दस लाख रुपया धन राशि, प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह प्रति पुरस्कार सम्मिलित हैं.

दस पादप जीनोम रक्षक किसान पुरस्कार:

ऐसा किसान जो भू-प्रजातियों के अनुवांशिक स्रोतों और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण पौधों की जंगली जाति के संरक्षण, सुधार और परिरक्षण में लगा हुआ हो वह किसान राष्ट्रीय जीन निधि से प्रतिफल का हकदार होगा, यह तभी मान्य है, जब किस्म का रजिस्ट्रेशन जीन के दाता के रूप में किया गया हो. एक वर्ष में दस पुरस्कार दिए जा सकते हैं, जिसके अंतर्गत प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह एवं डेढ लाख रुपए धन राशि सम्मिलित है.

बीस पादप जिनोम रक्षक किसान सम्मान:

एक वर्ष में बीस सम्मान दिए जा सकते हैं, जिसके अंतर्गत प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह, एवं एक लाख रुपया धन राशि सम्मिलित है.

पुरस्कार के लिए आवेदन कैसे करें (How to apply for the award)

हर वर्ष प्राधिकरण द्वारा देश के मुख्य समाचार पत्रों में विज्ञापन दिया जाता है अथवा प्राधिकरण की वेबसाइट http://www.plantauthority.gov.in/ पर भी आवेदन पत्र उपलब्ध है. लता एवं वृक्षों की पंजीकृत किस्मों की रक्षण अवधि 18 साल एवं अन्य फसलों के लिए 15 साल है.

English Summary: Know what is the Protection of Plant Varieties and Farmers Rights Act (1) Published on: 30 April 2021, 04:45 IST

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