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बॉलीवुड में लौट रहा है 90 के दशक का प्यार

प्यार यूं तो हर दौर में होता आया है और होता रहेगा लेकिन हर दौर का प्यार, उसके प्रेमी, उनकी बातें अलग अलग रहती हैं. सिनेमा ने भी हर दौर के प्यार को दर्शाने के लिए अलग अलग समय पर अलग अलग जोड़ियों को अपनाया. राज कपूर और नर्गिस एक दौर में इश्क की पहचान थे तो दिलीप कुमार और मधुबाला किसी एक दौर की पहचान बने. शाहरुख खान और काजोल ने जहां नए प्यार की नींव लिखी वहीं गोविंदा और करिश्मा की जोड़ी ने देसी प्यार की कहानियां कही. अनिल-माधुरी, आमिर-जूही, अक्षय-शिल्पा, संजय-माधुरी जैसी कितनी ही जोड़ियों ने सिनेमा के पर्दे को यादगार इश्क के लम्हे दिए है.

दौर बदला और दौर के साथ ही बदल गई जोड़ियां भी. अब लोग वरुण-आलिया, रणवीर-दीपिका को याद करते हैं लेकिन इसी बीच 90 के दशक में मशहूर रही जोड़ियों ने भी फिर से पर्दे पर दस्तक दी है. इन जोड़ियों में अनिल कपूर- माधुरीसंजय दत्त - माधुरीअनिल कपूर-जूही चावलाअजय तब्बू और शाहरुख- काजोल आदि मुख्य रूप से शामिल हैं.

संजय दत्त और माधुरी दीक्षित का जलवा

"जी हां मैं हूं खलनायक" डायलॉग से बेस्ट एक्टर ऑफ द ईयर के लिए नॉमिनेट होने वाले संजय दत्त ने 1981 में रॉकी मूवी से बॉक्स ऑफिस में अपना पहला कदम रखा था .

अपने फैंस के ‘बाबा’ उर्फ संजय दत्त ने भले ही दूसरे ए कैटेगरी अभिनेताओं के मुकाबले कम हिट्स मूवी दीं. लेकिन माधुरी दीक्षित के साथ उनकी जोड़ी ने बड़े पर्दे परन सिर्फ खूब धमाल मचाया बल्कि अपने फैंस के बीच काफी सुर्खियां भी बटोरीं.  संजय दत्त अपने करियर में अभी तक करीब 140 से ज्यादा फिल्म कर चुके हैं. इन्ही दोनों फिल्मों में माधुरी दीक्षित ने संजय दत्त के साथ बतौर लीड रोल प्ले किया था. इन दोनों फिल्मों के अलावा माधुरी और संजय दत्त अब तक एक साथ 6 फिल्म कर चुके हैं. इतना ही नहीं अभिषेक वर्मन के निर्देशन में बनी फिल्म कलंक में फिर एक बार ये जोड़ी एक साथ पर्दे  पर आई है. अब देखने वाली बात ये होगी कि इस जोड़ी का जादू दर्शकों में अब भी बरकरार  है या नहीं.

अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित की कैमेस्ट्री

माय नेम इज़ लखन, झक्कास जैसी पंच लाइनों के बादशाह अनिल कपूर ने तेलगु फिल्म वामा वृषम् से अपने करियर का डेब्यू किया. लेकिन पहली बार अनिल कपूर और माधुरी दीक्षित एक साथ साल 1988 में पर्दे पर आए. साल 1988 में आई तेज़ाब फिल्म दोनों ही कलाकारों के लिए बेहद खास पल था. जहां फिल्म के नायिका यानि माधुरी दीक्षित को बेस्ट एक्टर्स के लिए नॉमिनेट किया गया तो वहीं फिल्म के नायक अनिल कपूर को फिल्म फेयर की तरफ से बेस्ट एक्टर के अवॉर्ड से नवाज़ा गया.  बात यहीं जाकर नहीं रुकी. दोनों कलाकारों की फिल्म तेज़ाब के ठीक 4 साल बाद 1992 में आई फिल्म बेटा के लिएदोनों कलाकारों को बेस्ट एक्टर और एक्टर्स के अवॉर्ड्स से भी सम्मानित किया गया.

उसके बाद दोनों कलाकारों ने एक से एक हिट दी. लगातार 16 बड़ी फिल्में एक साथ देने के बाद इस साल फिल्म टोटल धमाल में पर्दे पर अपनी बेहतरीन कॉमेडी और नोंक-झोंक वाली अदायगी से दर्शकों का दिल जीतइस जोड़ी ने ये बात तो साफ कर दी कि ये जोड़ी एवरग्रीन है. ये बॉलीवुड की उन जोड़ियों में से एक हैं जिन्होंने न सिर्फ एक साथ वापसी करी है. बल्कि एक साथ कई फिल्मों के लिए नॉमिनेट होने के साथ-साथ अवॉर्ड भी जीते हैं.

अनिल कपूर और जूही चावला का रोमांस

माधुरी के अलावा जूही एक ऐसी अदाकारा है जिनकी अनिल कपूर के साथ की जोड़ी को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया.  साल 1994 में फिल्म अंदाज से शुरुआत करने वाली इस जोड़ी ने बॉलीवुड में 6 सुपरहिट देने के बाद इस साल एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा फिल्म से फिर वापसी की है. हालांकि ये फिल्म एक सामाजिक मुद्दे पर आधारित थी पर फिर भी में इन दोनों के रोमांस ने फिर से एक बार दर्शकों का दिल जीता लिया है.

 अजय देवगन और तब्बू का फिल्मी अंदाज़

हम सब उस एक्टर को तो जानते ही हैं जिसने बॉलीवुड में पहली बार दो बाईकों पर अपने पैर फैलाकर किए स्टंट से खूब सुर्खिंयां बटौरी थी. वो स्टंट करने वाला एक्टर और कोई नहीं बल्कि अजय देवगन है. जोकि आज साईलेंट-कम-वाईलेंट एक्टर के नाम से भी मशहूर है. ऐसा इसलिए कि फिल्म के सेट पर अक्सर खामोंश रहने वाले अजय, फिल्मों में अक्सर वाईलेंट मोड में नज़र आते हैं. 90 के दशको में अपनी खूबसूरती से सबको हिला देने वाली तब्बू  ने साल 1994 में फिल्मविजयपथ से अजय के साथ शुरुआत की थी. जिसके लिए उन्हें बेस्ट फिल्म डेब्यू का अवॉर्ड भी मिला था. हक़ीकततक्षकफितूरद्रश्यम , गोलमाल अगेन जैसी कई फिल्मों में एक साथ काम करने के बाद ये जोड़ी फिर मई में आने वाली फिल्म दे दे प्यार दे में एक साथ स्क्रीन शेयर करने जा रहें हैं. इस जोड़ी ने अनिल और माधुरी की तरह एक साथ ज्यादा फिल्म तो नहीं की पर हाल ही में दिए एक इंटव्यू में तब्बू ने अजय के लिए अपने प्यार को सार्वजनिक तौर पर स्वीकारा है.

अगर आप भारतीय सिनेमा के दीवाने हैं. साथ ही हर सप्ताह लगने वाली फिल्मों को देखते हैं, तो आप कों बीते कुछ सालों में फिल्मों एक फर्क तो नज़र आया होगा. ये फर्क है फिल्मों के क्लेवर का. देशभक्ति और बायोपिक फिल्मों के सफल प्रयोग के बाद फिल्म निर्माता 80-90 के दशक की जोड़ियों को फिर से 20 वीं सदी में स्क्रीन पर उतारने का प्रयास कर रहें हैं. जो कुछ-कुछ सफल होता नज़र आ तो रहा है. लेकिन देशभक्ति और बायोपिक फिल्मों की जितनी सफलता मिलनें में इस नई क्रिएशन को अभी कितना समय और लगेगा ये कह पाना मुश्किल है.

English Summary: come back of 90s bollywood's couple into 21st century

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Hey! I am मनीष कुमार भंभानी. Did you liked this article and have suggestions to improve this article? Mail me your suggestions and feedback.

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