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किसानों ने क्यों निलंबित किया प्रदर्शन, जानें क्या लिखा था उस पत्र में

SKM ने 9 दिसंबर 2021 को अपने और केंद्र सरकार के बीच गहन बातचीत के बाद विरोध प्रदर्शन को "निलंबित" करने का फैसला किया है. SKM निरस्त किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ एक साल से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है वो अब कुछ समय के लिए थम गया है.

रुक्मणी चौरसिया
Farmers' strike is now postponed
Farmers' strike is now postponed

SKM ने 9 दिसंबर 2021 को अपने और केंद्र सरकार (Central Government) के बीच गहन बातचीत के बाद विरोध प्रदर्शन को "निलंबित" (Protest suspended) करने का फैसला किया है. संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) निरस्त किए गए कृषि कानूनों (Farmer's bill) के खिलाफ एक साल से अधिक समय से विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहा है वो अब कुछ समय के लिए थम गया है.

किसान नेताओं का बयान (Farmer leaders statement)

नेताओं का कहना है कि किसान 11 दिसंबर को दिल्ली की सीमाएं खाली कर देंगे. हालांकि, SKM ने यह भी चेतावनी दी कि अगर केंद्र अपने वादों से पीछे हटता है तो वह विरोध फिर से शुरू कर सकते है.

SKM के सदस्य गुरनाम सिंह चादुनी (SKM member Gurnam Singh Chaduni) ने कहा, 'हमने अपना आंदोलन स्थगित करने का फैसला किया है. हम 15 जनवरी को एक समीक्षा बैठक करेंगे. अगर सरकार अपने वादों को पूरा नहीं करती है, तो हम अपना विरोध फिर से शुरू कर सकते हैं.

स्वराज अभियान पार्टी के नेता योगेंद्र यादव (SwarajAbhiyan Party leader YogendraYadav) ने भी स्पष्ट किया कि अभी के लिए किसान सरकार के कार्यों पर नजर रखेंगे और सीमावर्ती क्षेत्रों और टोल प्लाजा जैसे सभी स्थानों को 11 दिसंबर से खाली कर दिया जाएगा.

तीन विवादित कृषि कानून पारित होने के बाद, दिल्ली के सीमावर्ती क्षेत्रों सिंघू, टिकरी और गाजीपुर में 26 नवंबर, 2020 को धरना शुरू हुआ था. बता दें कि विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसानों द्वारा एक साल तक लगातार आंदोलन के बाद केंद्र सरकार को कानूनों रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

एसकेएम का बयान (SKM statement)

संयुक्त किसान मोर्चा ने औपचारिक रूप से राष्ट्रीय राजमार्गों और विभिन्न अन्य स्थानों पर दिल्ली की सीमाओं पर मोर्चा हटाने की औपचारिक घोषणा की है और  वर्तमान आंदोलन स्थगित कर दिया गया है. अब किसानों के अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए, कानूनी अधिकार के रूप में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को सुरक्षित करने के लिए युद्ध जारी रहेगा.

यह भी पढ़ें: MSP का गणित समझ लें किसान, वरना होगी और भी परेशानी

केंद्र के ऑफिसियल पत्र के मुख्य पॉइंट्स (Main points of the Centre's official letter)

  • केंद्र के ऑफिसियल पत्र में आगे कहा गया है कि उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और हरियाणा की राज्य सरकारों ने विरोध के दौरान किसानों के खिलाफ दर्ज मामलों को तुरंत वापस लेने का फैसला किया है.

  • केंद्र सरकार की एजेंसियों द्वारा दायर किए गए मामलों को भी वापस ले लिया जाएगा और सरकार अन्य राज्य सरकारों से भी ऐसा करने की अपील करेगी.

  • हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब सरकारों ने भी साल भर के विरोध प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वालों के परिजनों को मुआवजा देने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है.

  • सरकार भी पहले हितधारक समूहों और एसकेएम के साथ बिजली विधेयक पर चर्चा करने और फिर इसे संसद में पेश करने के लिए सहमत हो गई है. पराली जलाने के मामले में किसानों पर कोई आपराधिक दायित्व भी नहीं होगा.

निकलेगी जश्न रैली (Celebration rally will come out)

SKM ने कहा कि 11 दिसंबर को जश्न मनाने वाली रैलियां भी निकाली जाएंगी. यह देखते हुए कि देश चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत और अन्य के निधन पर शोक मना रहा है, एसकेएम ने किसानों की जीत के संबंध में सभी समारोहों को स्थगित करने का फैसला किया है. अब कल यानी (11 दिसंबर) को जश्न की रैलियां निकाली जाएंगी, जब किसान एक साथ मोर्चा छोड़ेंगे.

English Summary: Why did the farmers suspend the demonstration, know what was written in that letter Published on: 10 December 2021, 03:07 PM IST

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