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कीटनाशक बन रहा कैंसर का प्रमुख कारण

कृषि योग्य भूमि के आधार पर हरियाणा देश का दूसरा सर्वाधिक कीटनाशक इस्तेमाल करने वाला राज्य बन चुका हैं। ज्यादा उत्पादन की चाहत में 36 लाख हेक्टेयर भूमि पर हर वर्ष कीटनाशक का इस्तेमाल किया जा रहा है जिसके चलते उत्पादन 42 हज़ार क्विंटल तक पहुंच गया है। पेस्टिसाइड के अंधाधुंध इस्तेमाल से भले ही किसान उत्पादन बढ़ा रहें है, लेकिन अनजाने में वे फसल के साथ बीमारियां भी बो रहे हैं। तम्बाकू के बाद पेस्टिसाइड कैंसर का दूसरा बड़ा कारण बन गया हैं। इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च ने भी इस पर मुहर लगायी हैं।

सिर्फ़ हरियाणा राज्य में ही हर साल औसतन 29261 नए कैंसर पेशेंट सामने आ रहे है। पिछले तीन सालों में 14797 लोगों की कैंसर के कारण मौत हो चुकी हैं। हरियाणा में पेस्टिसाइड का इस्तेमाल औसत से 3 गुना ज्यादा हैं, जिसके कारण हर साल 29 हज़ार कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही हार्ट, बीपी, दमा और स्किन एलर्जी के मरीजो की संख्या भी बढ़ रही है।

कीटनाशक की भारी खपत का लाभ सीधे तौर पर कीटनाशक कंपनियों को हो रहा हैं। इसमें कुछ ऐसी भी कंपनियां है जो घटिया किस्म की पेस्टिसाइड बेच रही हैं। बोने के पहले से लेकर कटाई तक, फसलों में औसतन 4 से 5 बार कीटनाशक डाला जाता है। हरियाणा में मानको पर खरा ना उतरने वाले कीटनाशकों की भरमार है इसिलिए  हर साल लगभग पौने दो सौ नमूने फेल हो रहे हैं |

किसान जब फसलों पर कीटनाशक का छिडकाव करता है,  तो केवल 30%  दवा ही पौधे पर गिरती हैं बाकी हवा में उड़ जाती है या मिट्टी में गिर जाती है। पेस्टिसाइड रिसायकल हो कर हमारे ही शरीर मे प्रवेश कर जाती हैं। पेस्टिसाइड शरीर के अंग जैसे फेफड़े, किडनी, लीवर व गले पर ज्यादा असर करता हैं।

नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ कैंसर प्रिवेंशन एंड रिसर्च (एनआईसीपीआर)  के अनुसार प्रदेश में खाद्द पदार्थ के द्वारा रोजाना  0.5 मिली ग्राम कीटनाशक शरीर में जा रहा है। राजीव गाँधी कैंसर इंस्टिट्यूट, दिल्ली की यूनिट चीफ डॉ. स्वरुपा मित्रा के अनुसार, हरियाणा में तम्बाकू के बाद कीटनाशक कैंसर का दूसरा बार कारण बन गया हैं लगभग 30% केस इसी वजह से हो रहे है।

रोहतक पीजीआई कैंसर यूनिट के एचओडी , डॉ अशोक चौहान बताते है कि कीटनाशक शरीर के जिस-जिस हिस्से से गुज़रता है, उसको नुकसान पहुंचाता है। धीरे धीरे शरीर में अधिक मात्रा होने पर यह ब्लड में घुलने लगता है और ब्लड कैंसर का कारण बनता हैं। कीटनाशक नर्वस सिस्टम पर भी बुरा असर डालता है।

विशेषज्ञों के अनुसार किसानों को कीटनाशक की इस्तेमाल की तरफ जागरूक होने की आवश्यकता है। कब, कैसे, कहां और कितना पेस्टिसाइड डाला जाना चाहिए , इसकी किसानों को समझ होनी चाहिए। पेस्टिसाइड कंमनियां जागरूकता की कमी का फायदा उठा रही हैं वहीं कुछ कंपनियां घटिया और नकली पेस्टिसाइड बेच रही हैं। सरकार को चाहिये की वह ऐसे कंपनियों का लाइसेंस रद्द करे। क्योंकि कीटनाशक से किसानो को तो नुकसान पहुंचता ही है साथ ही अन्य लोगों पर भी इसका बुरा असर होता है |

प्रस्तुति : सचिन कुमार झा

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