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पेश हुआ आर्थिक सर्वेक्षण, जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत रहने का अनुमान

किशन
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देश की अर्थव्यवस्था की सेहत का आइना और हर तरह की चुनौतियों को रेखाकिंत करने वाला आर्थिक सर्वेक्षण को संसद में पेश कर दिया गया है. बता दें कि राज्यसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस आर्थिक सर्वेक्षण को पेश किया है. आर्थिक सर्वे बजट के पेश होने से ठीक पहले देश की आर्थिक दशा की तस्वीर होती है. इससे पहले 12 महीने के दौरान देश में विकास का क्या ट्रेंड रहा, इन योजनाओं को अमल में किस तरह से लाया गया इस बारे में विस्तार से बताने के लिए कहा गया है. इस बार के बजट मे  आर्थिक सर्वेक्षण में वित्त वर्ष 2019-20 में सकल घरेलू उत्पाद की विकास दर 7 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया है. बता दें कि वर्ष 2018-19 में सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी की वृद्धि दर पांच साल के न्यूनतम स्तर पर 6.8 प्रतिशत रही थी.  

यह रही सर्वे की मुख्य बातें

आर्थिक सर्वे में विकास दर की रफ्तार वर्ष 2019 - 20 में 7 प्रतिशत रहने का अनुमान है. सर्वे में आर्थिक वृद्धि के लिए अच्छी संभावनाओं की भविष्यवाणी की गई है. देश को वर्ष 2024-25 तक 5 हजार अरब अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि के दर को निरंतर 8 प्रतिशत पर बनाए रखने की जरूरत होगी. समीक्षा कहती है कि 2024-25 तक भारत को 5000 अरब डॉलर की अर्थवयवस्था बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टारगेट को हासिल करने के  लिए भारत को अपनी दर को 8 बनाए रखने की जरूरत होगी.

राजकोषीय घाटा अनुमान से ज्यादा

2018-19 में राजकोषीय घाटा 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जाहिर किया गया है. वर्ष 2018 में यह 6.1 प्रतिशत पर था. देश की आय की तुलना में ज्यादा खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है. इसका संशोधित बजट अनुमान 3.4 प्रतिशत तक था.

तेल पर मिलेगी अच्छी खबर

आर्थिक सर्वे में आने वाले दिनों में तेल की कीमतों में गिरावट का अनुमान जारी किया गया है. सर्वे के अनुसार चालू वित्त वर्ष के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आएगी.

टैक्स कलेक्शन

आर्थिक सर्वे में बोला गया है कि डायरेक्ट टैक्स का कलेक्शन 13.4 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्ज किया गया है. कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन बेहतर हुआ है. इनडयरेक्ट टैक्स कलेक्शन  अनुमान में 16 प्रतिशत की कमी आई है.

गंभीर जल संकट की ओर संकेत

आर्थिक सर्वेक्षण में गंभीर जल संकट की समस्या पर इशारा किया गया है. वर्ष 2050 तक भारत में पानी की किल्लत एक बड़ी समस्या है. सर्वे में कहा गया है कि सिंचाई जल पर तुरंत विचार करने की जरूरत है ताकि कृषि उत्पादकता बढ़ सके.

अनाज उत्पादन

आर्थिक समीक्षा में 2018-19 में खादन्न उत्पादन 28.34 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है. कृषि, वानिकी, मत्स्य पालन में 2.9 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान है.

आयात-निर्यात

2018-19 में आयात 15.4 प्रतिशत जबकि निर्यात में 12.5 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है. इसके अलावा समीक्षा में विदेशी मुद्रा भंडार भी सर्वोच्चम स्तर पर बताया गया है.

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