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सरकार ने जारी किया चालू फसल वर्ष के रकबे का पहला अनुमान

इस साल फसल वर्ष 2019-20 में खरीफ फसलों का उत्पादन घटकर 14. 57 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक चावल और दलहन फसलों के उत्पादन में कमी से समग्र फसलों के उत्पादन में गिरावट रह सकती है. वर्ष 2018-19 फसल सत्र में खरीफ फसलों का उत्पादन 14.171 करोड़ टन के करीब था. यह रकबा पिछले एक साल से थोड़ा कम है.खरीफ फसलों की बुवाई पूरी हो चुकी है और इनकी कटाई अक्टूबर के महीने से शुरू होगी. इन खरीफ फसलों में बरसाती दलहन, धान और मोटे अनाज आदि शामिल होते है. बता दें कि फसल सत्र जुलाई में शुरू होता है और जून में समाप्त हो जाता है.

सरकार चार बार जारी करती अनुमान

खरीफ फसलों की बुवाई लगभग पूरी हो चुकी है. इन फसलों की कटाई आने वाले अक्टूबर से शुरू होगी. यहां खाद्यन्नों में मुख्य रूप से चावल, दाल और मोटे अनाज को पूरी तरह से शामिल किया गया है. केंद्र सरकार एक सत्र में चार बार फसल अनुमान को जारी करती है. यह सारे अनुमान उत्पादन और कटाई के बाद अलग-अलग चरणों के अनुसार जारी किए जाते है.

grain millet

मोटे अनाज का उत्पादन बढ़ेगा

केंद्र सरकार के द्वारा जारी किए गए पहले अग्रिम खरीफ फसलों के चालू वित्त वर्ष में चावल का उत्पादन 10.035 करोड़ टन ही रहेगा. एक साल पहले की इस साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 10.213 करोड़ टन के आसपास था. वही दालों का उत्पादन 82.3 लाख टन रहने का पूरा अनुमान होता है जो कि एक साल पहले की समान अवधि में 85.9 लाख टन था.

नकदी फसलों का उत्पादन पिछले साल के बराबर रहेगा

अगर देश में नकदी फसलों के उत्पादन की बात करें तो नकदी फसलों में कपास उत्पादन 3.227 करोड़ गांठ रहने का अनुमान है जो कि एक साल पहले तक 3.226 करोड़ गांठ था. बता दें कि कपास की एक गांठ 170 किलोग्राम तक की होती है.

कई राज्यों में फसलों को बाढ़ से नुकसान

भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक मानसून के सामान्य रहने का अनुमान था. मानसून देर से आया लेकिन बाद में बारिश की मात्रा में काफी बढ़ोतरी हुई है. लेकिन भारी बारिश के कारण दक्षिण भारत के कई राज्यों जैसे कि कर्नाटक, गुजरात, बिहार, असम, उत्तराखंड, महाराष्ट्र में आने से फसलों को नुकसान पहुंचा है.

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कृषि मंत्री ने कहा खरीफ की फसल का उत्पादन बढ़ने की उम्मीद



English Summary: The area of ​​kharif crops will decrease in the current financial year

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