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गन्ना भुगतान को लेकर सरकार सख्त

गन्ने का पेराई सत्र लगभग समाप्ति की ओर है. लेकिन गन्ना किसानों का चीनी मीलों पर बकाया घटने की बजाए और बढ़ा  है. चीनी मिलो पर इस भारी बकाया को देखते हुए सरकार थोडा सख्त हुई है और लगातार चीनी मीलों पर नजर बनाए हुए है. केंद्र द्वारा हर सप्ताह राज्य सरकारों से अपडेट लिया जा रहा है  और साथ ही इनके द्वारा उठाये जा रहे कदमों की समीक्षा भी की जा रही है. इस उपभोक्ता मंत्रालय का कहना है कि यू.पी., कर्नाटक और महाराष्ट्र सहित गन्ना उत्पादन करने वाले सभी राज्यों को सख्त रवैये अख्तियार करने को कहा है. इस पेराई सत्र के दौरान चीनी मिलों पर किसानों की बकाया राशि लगभग 20 हजार करोड़ पहुँच चुकी है. यूपी की चीनी मिलों पर सबसे अधिक बकाया है. सरकार ने किसानों को राहत देने के लिए प्रति टन 55 रुपए सहायता के तौर पर मुहैया कराने का निर्णय लिया था. सरकार किसानों के गन्ना भुगतान को लेकर हर संभव कोशिश कर रही है. इसी के मद्देनजर सरकार ने एथेनोल पर जीएसटी कम करने और चीनी पर शुल्क लगाए जाने का प्रस्ताव जीएसटी परिषद् को भेजा हुआ है. सरकार किसानों को राहत देने के लिए अन्य प्रस्तावों पर भी काम कर रही है. सरकार के इन फैसलों को कितना फायदा मिलता है यह बाद में ही पता चलेगा. फिलहाल गन्ना किसानों का बकाया सरकार और चीनी मिलों दोनों के गले की फांस बना हुआ है.

 

 



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