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सोया और शहद में मुनाफे की आपार संभावनाएं, किसान ले सकते हैं लाभ

आज के समय में किसान भी चाहते हैं कि वो अपनी आमदनी को बढ़ाने के लिए रोज़ नए-नए उपाय करें. इसके लिए किसान रोज़ नई तकनीक के सहारे नई -नई फसलों को खेतों में पैदा करने में लगे हुए हैं. ऐसा ही एक कार्य मध्य प्रदेश के अनुपपुर के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के लाइवलीहुड बिजनेस इन्कयूबेशन सेंटर के तत्वाधान में सोयाबीन से दूध और पनीर बनाने और शहद के प्रसंस्करण का उपयोगी प्रशिक्षण दर्जनों ग्रामीण महिलाओं को प्रदान किया गया है. इस अवसर पर अमरकंटक और आसपास के क्षेत्रों में सोयाबीन की खेती और शहद उत्पादन की असीम संभवानाओं का जिक्र करते हुए किसानों का आह्वान किया गया कि वो आधुनिक प्रसंस्करण तकनीक को अपनाकर जीवोकापार्जन को बढ़ाए जिसके लिए विश्वविद्यालय सहायता प्रदान करेगा.

उच्च प्रोटीन प्रदान करने वाला सोयाबीन

दरअसल शरीर में प्रोटीन की मात्रा को पर्याप्त रूप से पूरा करने की आवश्यकता होती है. खाद्य वैज्ञानिक सुनील बताते हैं कि इसे सोयाबीन की मदद से पूरा किया जाता है. उन्होंने इस बात की जानकारी दी कि चार किलोग्राम सोयाबीन से उच्च प्रोटीन गुणवत्ता वाला 24 लीटर दूध को प्राप्त किया जा सकता है जिसकी सहायता से पांच से छह किलोग्राम जायेकदार पनीर का उत्पादन संभव है.

विश्वविद्यालय पहुंचेगा शहद

विश्वविद्यालय ने शहद प्रसंस्करण की तैयारी किसानों को शहद के प्रसंस्करण और विपणन का गहन प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से पहल की है. इसके अलावा समन्वय डॉ आशीष माथुर ने बताया कि शहद को अन्य शहरों तक पहुंचाने का पूरा कार्य विश्वविद्यालय करेगा. इसके अलावा विश्वविद्यालय इसके पैकेजिंग और प्रसंस्करण का कार्य भी करेगा. इसके लिए वृहद स्तर पर क्षेत्र में शहद श्रृंखला की स्थापना भी की जाएगी. इस पहल से सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण शहद सस्ती कीमत में मिलेगा वही ग्रामीणों की अजीविका को बढ़ाने में भी यह सहायक होगा. 

किशन अग्रवाल, कृषि जागरण



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