
देश में चिकित्सा व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए सरकार की हर कोशिश जारी रहती है. इसी कड़ी में प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन औषधि केंद्र के तहत निकट भविष्य में तकरीबन 7500 जन औषधि केंद्र देश के नाम समर्पित किया था. वहीं, चिकित्सा व्यवस्था को दुरूस्त करने की दिशा में पीएम मोदी ने निकट भविष्य में जन औषधि केंद्र को 7500 से बढ़ाकर 10 हजार करने का ऐलान किया है.
खैर, पीएम मोदी का यह ऐलान कहां तक सफल हो पाता है. यह तो फिलहाल आने वाला वक्त ही तय बताएगा, लेकिन उससे पहले हम आपको बताते चले कि जन औषधि केंद्र के तहत सरकार आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को सस्ते दरों में दवा उपलब्ध करा रही है. वहीं, सरकार लोगों को जन औषधि केंद्र खोलने के लिए प्रोत्साहित कर रही है.
सरकार दे रही है आर्थिक सहायता
पूरे देश में जन औषधि योजना को फैलाने के लिए अब पीएम मोदी केंद्र खोलने के लिए लोगों को एक नहीं, दो नहीं, तीन नहीं, बल्कि 5 लाख रूपए की सहायता राशि दे रही है. वहीं, अगर यह केंद्र आंकाक्षी जिले में खोला जाएगा, तो इसके लिए 2 लाख रूपए की अतरिक्त राशि भी प्रदान की जाएगी. कुछ समय पहले तक यह प्रतोसाहन राशि ढाई लाख रूपए थी, लेकिन अब इसे घटाकर 2 लाख रूपए कर दिया गया है. वहीं, प्रिन्टिंग और बिलिंग के लिए अतरिक्त 50 हजार रूपए की राशि प्रदान की जाएगी.
2015 में शुरू हुई थी यह योजना
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2015 में इस जन औषधि केंद्र योजना की शुरूआत की थी. इस योजना के शुरू करने का मुख्य ध्येय आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को चिकित्सक सुविधाएं प्रदान करवाना था. जन औषधि के तहत केमिस्ट की तुलना में 90 फीसद सस्ती दरों पर दवाएं उपलब्ध करवाई जाती है.
सरकार के मुताबिक , इस योजना से 3600 करोड़ रूपए की बचत हुई है. कोई भी व्यक्ति जन औषधि केंद्र शुरू कर सकता है. इससे काफी संख्या में बेरोजगारी भी कम होगी, जिसको ध्यान में रखते हुए यह योजना अभी लोगों के बीच में काफी प्रचलित हो रही है.
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