पंतनगर विश्वविद्यालय में नये कुलपति राजीव रौतेला ने किया कार्यभार ग्रहण

पंतनगर विश्वविद्यालय में आज उत्तराखण्ड की माननीय राज्यपाल एवं कुलाधिपति पंतनगर विश्वविद्यालय, बेबी रानी मौर्य, के 25 सितम्बर, 2018 के आदेश के अनुपालन में नये कुलपति, राजीव रौतेला, आईएएस, ने आज विश्वविद्यालय के कुलपति के पद का कार्यभार ग्रहण किया. उन्होंने पदमुक्त हो रहे कुलपति, प्रो. ए.के. मिश्रा, से यह कार्यभार ग्रहण किया. रौतेला कुमाऊं मण्डल के आयुक्त भी हैं तथा पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति की उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गयी है. यह जिम्मेदारी उन्हें नियमित कुलपति की नियुक्ति अथवा छः माह की अवधि, जो भी पहले हो, तक के लिए दी गयी है.

इस अवसर पर पत्रकारों से वार्ता करते हुए नव-नियुक्त कुलपति, रौतेला, ने कहा कि वे इस ख्यातिप्राप्त एवं देश के प्रथम कृषि विश्वविद्यालय को इसकी गरिमा को बनाये रखते हुए आगे और ऊंचाई पर पहुंचाने हेतु कार्य करेंगे. उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता विश्वविद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार सभी कार्यक्रम संपन्न कराये जाने के साथ-साथ विश्वविद्यालय में शिक्षण का उच्च स्तर बनाये रखना है. साथ ही विश्वविद्यालय में रिक्त पदों को भरे जाने के लिए राज्य सरकार की नीति के अनुसार कार्यवाही करेंगे. रौतेला ने कहा कि यहां के वैज्ञानिकों की व्यावसायिक विशेषज्ञता को किसानों के खेतों एवं अन्य क्षेत्रों तक पहुंचाने का कार्य भी किया जायेगा तथा राज्य सरकार के विभागों के साथ विश्वविद्यालय का ताल-मेल बढ़ाया जायेगा. विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने तथा परा शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर गतिविधियों में वृद्धि किये जाने को भी उन्होंने अपनी प्राथमिकता बताया. कुलपति ने प्रदेश में हो रहे पलायन के बारे में पूछे गये प्रश्न के संदर्भ में पर्वतीय क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक एवं कृषि दशाओं का जिक्र करते हुए वहां औद्यानिकी पर अधिक बल दिये जाने तथा भंडारण एवं विपणन की सुविधायें प्रदान किये जाने में किसानों एवं कुमाऊं मंडल विकास निगम की सह-भागिता बढ़ाये जाने की बात कही, ताकि किसानों को अधिक आय प्राप्त हो सके तथा पलायन को रोका जा सके. उन्होंने दो दायित्वों के निर्वहन के बारे में पूछे जाने पर कहा की मानव की क्षमता असीमित हैं और विश्वविद्यालय के कार्यों के निर्वहन में किसी प्रकार की कमी नहीं आयेगी. कुलपति ने किसान मेला, विश्वविद्यालय परिसर में अपराध, कर्मचारियों की लगातार सेवानिवृत्ति से रिक्त हो रहे पद इत्यादि के बारे में भी उठाये गये प्रष्नों का जबाब दिया. अंत में उन्होंने कहा कि पंतनगर विश्वविद्यालय में शिक्षण, शोध, प्रसार, इत्यादि की गुणवत्ता को उच्च-स्तरीय बनाये रखने का हर संभव प्रयास किया जायेगा.

पंतनगर विश्वविद्यालय में नव-नियुक्त कुलपति, राजीव रौतेला, आईएएस, जो कुमाऊं मण्डल के आयुक्त भी हैं, ने पहले दिन कार्यभार ग्रहण करने के पश्चात विश्वविद्यालय के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की बैठक की. बैठक के प्रारम्भ में पूर्व कुलपति, प्रो. ए.के. मिश्रा, द्वारा रौतेला का सभी उपस्थित अधिकारियों से परिचय कराते हुए स्वागत किया गया.

इस अवसर पर बोलते हुए रौतेला ने कहा कि लगभग 60 वर्ष पूर्व स्थापित यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त है तथा इसको आदर की दृष्टि से देखा जाता है. उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की प्रसिद्धि को बनाये रखते हुए इसको और आगे ले जाये जाने का प्रयास होना चाहिए. नव-नियुक्त कुलपति ने कहा कि वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रदेश के विभिन्न जिलों में कार्यरत राज्य सरकार के कृषि एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों को विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों एवं उनके द्वारा विकसित की गयी नई तकनीकों से रूबरू कराया जायेगा, ताकि नये शोधों को किसानों तक पहुंचा कर उनकी आय में वृद्धि की जा सके. रौतेला ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय का कार्य विद्यार्थियों की ज्ञान क्षमता में वृद्धि एवं व्यक्तित्व निर्माण करना है, जिसके लिए शिक्षकों को निरंतर अपने आप को अद्यतन ज्ञान से परिपूर्ण रखते हुए शिक्षा के उच्च स्तर को बनाये रखना है. उन्होंने सभी को समय से पूर्व अपने-अपने कार्यालयों में पहुंचने तथा प्रत्येक दिन के लक्ष्य का निर्धारण कर उसको प्राप्त कर अंत में उसकी विवेचना करने की भी सलाह दी, ताकि समय एवं कार्यों का प्रबंधन भली-भांति किया जा सके. सभी अधिकारियों को अपने-अपने महाविद्यालय, निदेशालय अथवा विभाग के डेटा-बेस की संपूर्ण एवं सही जानकारी रखने की भी उन्होंने सलाह दी. साथ ही सभी विभागाध्यक्षों द्वारा अपने विभाग से संबंधित प्रस्तुतिकरण तैयार रखने के लिए भी कहा.

बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों द्वारा अपना परिचय देते हुए अपने-अपने महाविद्यालयों, निदेशालयों, विभाग इत्यादि की संक्षिप्त जानकारी नव-नियुक्त कुलपति को प्रदान की गयी तथा कार्य संपादन में आ रही कठिनाईयों एवं स्टाफ की कमी की भी उन्होंने चर्चा की.

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