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वाराणसी की बुलेट मिर्च खाड़ी देशों में बढ़ाएगी खाने का स्वाद

अगर हम खाड़ी देशों की बात करें तो बनारसी साड़ी, लगड़ा आम, लकड़ी से बने खिलौने और सामान की काफी डिमांड है. अब इसमें बुलेट मिर्च का नाम भी शामिल होने जा रहा है. वाराणसी के वैज्ञानिकों ने खाड़ी देशों के लोगों की पसंद के अनुरूप तीखी लाल मिर्च को विकसित किया है. इस मिर्च को वैज्ञानिको ने काशी आभा नाम दिया है. लेकिन आकार में यह एकदम पिस्टल की गोली की तरह ही दिखाई देती है. मिर्च की खास बात है कि इसमें कई तरह के रोगों से लड़ने की क्षमता तो होती ही है साथ ही यह एकदम पिस्टल की गोली की तरह ही दिखाई देती है, यह भंडारण, प्रसंस्करण और भंडारण के लिहाज से बेहतर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के तमाम उत्पादों के दुनिया मे लोकप्रिय होने से उनका निर्यात तेजी से बढ़ा है. भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों ने हरी मिर्च की नई प्रजाति को विकसित किया है.

यह है मिर्च की लंबाई

हम अगर बुलेट मिर्च की बात करें तो हरे और लाल रंग की इस मिर्च की लंबाई 5 से 6 सेंटीमीटर और मोटाई 1.8 सेंटीमीटर तक होती है. इसमें गुरचा, सड़न और पीली चीटियां लगने की कोई भी समस्या नहीं होती है. यह एक सामान्य तापमान में सुरक्षित रह सकती है.

कई मयानों में खास मिर्च

काशी आभा में कैप्साइलिन की पर्याप्त मात्रा होने से इसमें तीखापन ज्यादा होता है. सामान्य मिर्च में कैप्साइलिन दशमलव 5 से 8 स्केल तक होती है, जबकि नई प्रजाति में यह 1.06 तक पाई गई है. जलवायु परिवर्तन यानी कम या ज्यादा तापमान में ढलने की भी इसमें क्षमता है. पैदावार भी सामान्य से ज्यादा प्रति 150 क्विंटल है. रोपाई के 50 दिनों के बाद ही तैयार हो जाने से पहली तोड़ाई की जा सकती है.

किसान खुद तैयार कर सकेंगे बीज

यह काशी आभा मिर्च किसी भी तरह से हाइब्रिड मिर्च की किस्म नहीं है. केंद्र की सेंट्र्ल वैराइटी रिलीज कमिटी की ओर से मंजूरी मिलने के साथ आईआईवीआर के वैज्ञानिक बीज तैयार करने में जुट गए है. इस साल के अंत तक किसानों को बीज वितरित किए जाने की संभावना है, गर्व की बात है कि वैज्ञानिकों ने नई प्रजाति को विकसित किया है. अब लाल मिर्च और सब्जी की नई किस्म को विकसित किया जा रहा है.



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