बासमती की महक और ज़ायका को बिगाड़ रहे कीटनाशक

बासमती चावल का बनना, घर में आये मेहमान को इज़्ज़त बक्शना है. अवसर कोई भी हो, बासमती अगर कहीं घर में पक रहा होता है. पूरे मोहल्ले में उसकी खुशबू  फ़ैल जाती है. यह महक ही तो है जो बासमती चावल को बासमती का रुतबा प्रदान करती है. वैसे तो भारत में कई तरह के चावल पाए जाते हैं. शादी ब्याह में बननेवाला चावल और ढाबों तथा रेढ़ी पर कड़ी चावल में इस्तेमाल होने वाला चावल सभी अलग किसम के चावल हैं.

कुछ साल हुए बासमती के पेटेंट की लड़ाई में भी भारत की जीत हुई थी. यही खासियत है बासमती की तो फिर क्या कारण है कि आजकल बासमती अपना ज़ायका और महक खोता जा रहा है.?

किसान बासमती की फसल की अच्छी ग्रोथ के लिए कई तरह के कीटनाशक का इस्तेमाल करता है. किसान का भरपूर  लहलहाती फसल का सपना तो पूरा हो जाता है, लेकिन इसकी खासियत जब अपनी चमक खोने लगती है तो कृषि जगत के वैज्ञानिकों का चौकना स्वाभाविक है.

भारतीय बासमती की चमक को कीटनाशक फीका कर रहे हैं। निर्यात प्रभावित हो रहा है। आयात देश पाबंदी लगा रहे हैं। ऐसे में पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने कुल पांच कीटनाशक चिन्हित किए हैं, जिनके इस्तेमाल से बचने पर बासमती का पुराना रुतबा लौट सकता है। पंजाब के कृषि विभाग के सचिव काहन सिंह पन्नू कहते हैं कि अधिक उत्पादन व फसलों की सुरक्षा के लिए किसान कृषि वैज्ञानिकों की सलाह लिए बिना कीटनाशक दवाओं का अंधाधुंध इस्तेमाल करते हैं।

सऊदी अरब व ईरान भारतीय बासमती के सबसे बड़े मुरीद हैं। बासमती मुख्य रूप से अरब देशों, अमरीका व यूरोप देशों में निर्यात की जाती है। भारत से हर वर्ष करीब 27 हजार करोड़ रुपये की बासमती का निर्यात होता है। इसमें सबसे अधिक दस हजार करोड़ सऊदी अरब को निर्यात किया जाता है।

ऑल इंडिया पंजाब बासमती एसोसिएशन के प्रधान बालकृष्ण बाली ने बताया कि कीटनाशक की मात्र अधिक होने से वर्ष 2012 में 151 टन बासमती की खेप अमेरिका ने लौटाई थी। अब अप्रैल 2018 में यूरोपीय देश जार्डन ने दो लाख 70 हजार टन बासमती की खेप का निर्यात बंद कर दिया। अब केवल पाकिस्तानी बासमती विदेशी बाजार में पहुंच रही है।

पंजाब कृषि विवि के सीनियर एंटामोलोजिस्ट डॉ. कमलजीत सिंह सूरी ने बताया कि बासमती की फसलों पर ट्राइसाइकलाजोल, एसीफेट, ट्राइजोफास, काबेर्ंडाजिम व थायोमेथोक्साम आदि कीटनाशकों के इस्तेमाल पर पाबंदी लगाई गई है। इन पांचों कीटनाशकों से बासमती की गुणवत्ता पर असर पड़ता है। इन्हीं कीटनाशकों की मात्र अधिक होने के कारण यूरोपियन देशों से बासमती की खेप की दो बार वापस हुई है।

इन कीटनाशकों के स्थान पर किसानों को अमिसटर टॉप व इंडोफिल का छिड़काव करना चाहिए। किसानों को बासमती की कटाई से तीन हफ्ते पहले ही फसल पर किसी भी प्रकार के कीटनाशकों का छिड़काव बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। कृषि अधिकारी डॉ. बलदेव सिंह ने कहा कि विक्रेता इन पांच कीटनाशक दवाओं को न बेचें।

तय मापदंडों से अधिक कीटनाशकों का प्रभाव होने के कारण भारत से बासमती का निर्यात बंद होना गंभीर है। सरकार को जागरूक करे , ताकि किसान कीटनाशको का अंधाधुंध प्रयोग न करें।

 

चंद्र मोहन

कृषि जागरण                                           

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