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जिप्सम से बढ़ेगा फसल का उत्पादन, जानें क्या है कृषि विशेषज्ञों की सलाह

सल्फर की कमी से पौधों की वृद्धि पर बुरा प्रभाव पड़ता है. इससे पौधे की वृद्धि रुक जाती है एवं पौधों में नया विकास भी नहीं हो पाता है. जिसके चलते फसलों से अच्छा पैदावार नहीं मिलता है. ऐसे में वैज्ञानिकों से किसानों के लिए जरूरी सलाह दी है.

स्वाति राव
Agriculture
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पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए सल्फर (Sulphur) अहम भूमिका निभाता है. मिटटी में पाए जाने वाला सल्फर सिर्फ मिटटी की गुणवत्ता को ही नहीं बढ़ाता है, बल्कि पौधों में अच्छी वृद्धि भी करता है. मगर आजकल रासायनिक उर्वरक (Chemical Fertilizers ) का अत्यधिक प्रयोग की वजह से फसलों का उत्पादन अच्छा नहीं हो पा रहा है. 

वहीं, रसायनिक उर्वरक के प्रयोग से लोगों में बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है. ऐसे में जरुरी हो गया है कि इन रसायनिक उर्वरक का प्रयोग कम से कम किया जाये. ऐसा ही एक नजारा उत्तर प्रदेश के लखनऊ के कुछ इलाकों में देखा गया है, जिनमें मुख्य रूप से कोकोरी,  चिनहट, माल, मलिहाबाद आदि है. जहां मिटटी में सल्फर की भारी कमी (Severe Sulfur Deficiency ) पाया गया है. ऐसे में राज्य के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह जारी की है.

कृषि वैज्ञानिकों की सलाह (Agricultural Scientists Advisory)

कृषि वैज्ञानिकों द्वारा समय – समय पर मिटटी की गुणवत्ता जांचने के लिए मृदा परीक्षण कराया जाता है. जिस दौरान मृदा परिक्षण में जिले की मिटटी में सल्फर की मानक मात्रा के अनुसार बहुत कम मात्रा पाया गया है. जिस वजह से फसलों की वृद्धि भी रुक गयी है, साथ ही पौधे भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गये हैं. ऐसे में वैज्ञानिकों ने कहा कि अगर समय रहते किसानों ने इन उर्वरकों का प्रयोग बंद नहीं किया, तो यह मिट्टी पूरी तरह पौधों की सेहत बिगाड़ देगी. इसलिए सभी किसान समय रहते इसका प्रयोग कम कर दें.

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मिटटी में करें जिप्सम का प्रयोग (Use Gypsum In The Soil)

किसानों को सलाह दी गई है कि किसान मिट्टी में जिप्सम का प्रयोग करें. गोबर से बनी खाद का प्रयोग करने के साथ ही हरी खाद भी मिट्टी की सेहत सुधार देगी. कीटनाशकों के साथ ही रासायनिक उर्वरकों का किसान कम से कम प्रयोग करें. इसके अलावा मिट्टी का समय-समय पर परीक्षण कराते रहें.

मिटटी का करवाएं परीक्षण (Get Soil Tested)

जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि अगर मिट्टी की सेहत अच्छी रहेगी, तो फसलों से उत्पादन भी अच्छा प्राप्त होगा. इसलिए सभी किसान अपने खेत की मिटटी का परीक्षण जरुर करवाएं, क्योंकि ऐसा करने से मिट्टी में पाए जाने वाले प्रमुख पोषक तत्वों में नत्रजन, फास्फेट और पोटाश की सही मात्रा की जानकारी हो जाती है. बता दें कि सूक्ष्म पोषक तत्व, जो पौधों की बढ़त में अपनी भूमिका निभाते हैं, उनकी जानकारी भी मृदा परीक्षण से प्राप्त की जा सकती है. इसके अलावा जिन तत्वों की मात्रा कम पायी जाती हैं, उन्हें समय रहते जैविक उर्वरकों के इस्तेमाल शामिल किया जा सकता है.

English Summary: Gypsum is beneficial for the soil of the field Published on: 10 February 2022, 04:16 PM IST

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