News

विशेषज्ञों और कृषि मंत्री के जीएम सरसों पर सींग भिड़े

जयपुर में हो रही साल्वेंट एक्सट्रैक्शन एसोसिएशन (एस.ई.ए) की सरसों पर हो रही सभा में कृषि राज्य मंत्री, राजस्थान प्रभु लाल सैनी और वैज्ञानिकों में जीएम सरसों को उगाने के ऊपर मतभेद दिखे | जहाँ प्रभु लाल सैनी ने यह कहा कि हमारे देश में उगाई जाने वाली सरसों की किस्में 40-42 प्रतिशत तक तेल रखतीं है तो हमें जीएम सरसों को उगाने की जरूरत नहीं है, और सरसों में बिना जीएम तकनीकि के उन्नतिशील किस्मे तैयार की जा सकतीं है |

डॉ दीपक पेंटल, दिल्ली विश्वविद्यालय ने जीएम सरसों की हानि और लाभ पर परिचर्चा करते हुए सभा में कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है, कि जहां यूरोप में 80 प्रतिशत चीन और कनाडा में 70 प्रतिशत तक जीएम सरसों उगाई जा रही है वहीँ हम आज भी इस विषय पर सिर्फ बहस कर रहें है |

डॉ भागीरथ चौधरी, निदेशक, पश्चिमी एशिया बायो टेक्नोलॉजी सेंटर नई दिल्ली ने कहा कि सच्चाई तो यह है कि हम 15 मिलियन टन सरसों तेल ऐसे देशों से आयत करतें है जोकि सिर्फ जीएम् सरसों ही उगा रहे हैं और विडम्बना यह है कि हमारे किसानों को इसको उगाने की अनुमति नहीं दी जा रही है | अगर जीएम सरसों की खेती को अनुमति मिल जाए तो भारत में खाद्य तेलों पर आयात की निर्भरता को कम किया जा सकता है |  



Share your comments