अगर आप इस खरीफ सीजन में अपनी खेती से तगड़ा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो किसान नई और लाभकारी फसलों की ओर रुख कर ड्रैगन फ्रूट, की खेती कर अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं, जिसे आज देश की सबसे तेजी से उभरती हुई नकदी फसलों में गिना जा रहा है और साथ ही किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी फसलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने मुख्यमंत्री बागवानी मिशन के तहत ड्रैगन फ्रूट विकास योजना शुरू की है. इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर ₹2.70 लाख तक का अनुदान दिया जा रहा है. आगे जानें कैसे मिलेगा योजना का लाभ.
किसानों के लिए क्यों खास है ड्रैगन फ्रूट?
ड्रैगन फ्रूट एक उच्च मूल्य वाली बागवानी फसल है जिसकी मांग लगातार बढ़ रही है. यह फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है और एक बार पौधे लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन मिलता रहता है.
जहां धान, गेहूं और मक्का जैसी फसलों में हर सीजन नई बुवाई, जुताई और उर्वरकों पर खर्च करना पड़ता है, वहीं ड्रैगन फ्रूट के पौधे 15 से 20 वर्षों तक फल देते हैं. इससे किसानों को बार-बार निवेश नहीं करना पड़ता और लंबे समय तक आमदनी मिलती रहती है.
कम पानी और कम उपजाऊ जमीन में अधिक पैदावार
ड्रैगन फ्रूट कैक्टस परिवार का पौधा है, इसलिए इसे अत्यधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती. ऐसे में यह फसल किसानों के लिए सही विकल्प साबित हो सकती है. साथ ही ड्रिप सिंचाई के माध्यम से कम पानी में भी इसकी खेती सफलतापूर्वक की जा सकती है. यही कारण है कि यह फसल उन क्षेत्रों के लिए भी उपयुक्त मानी जा रही है जहां पानी की उपलब्धता सीमित है.
इसके अलावा यह फसल अपेक्षाकृत कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी वृद्धि कर सकती है, जिससे किसानों के पास अतिरिक्त आय का एक नया विकल्प उपलब्ध हो जाता है.
कितनी होगी कमाई?
अगर किसान ड्रैगन फ्रूट की खेती करते हैं, तो वह एक एकड़ क्षेत्र में लगभग 1,600 से 1,800 ड्रैगन फ्रूट के पौधे लगा सकते हैं, जिसमें खेती की शुरुआती लागत लगभग ₹4 लाख से ₹6 लाख प्रति एकड़ तक आती है. ऐसे में किसानों को पूर्ण उत्पादन अवस्था में एक एकड़ से 8 से 12 टन तक फल प्राप्त हो सकते हैं.
इसके अलावा, बाजार भाव के अनुसार किसान सालाना ₹8 लाख से ₹20 लाख तक की आय अर्जित कर सकते हैं. खर्च निकालने के बाद ₹5 लाख से ₹15 लाख प्रति एकड़ तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं.
कितनी मिलेगी सब्सिडी की छूट?
ड्रैगन फ्रूट विकास योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर कुल ₹2.70 लाख का अनुदान दिया जाएगा. यह राशि किसानों को दो चरणों में उपलब्ध कराई जाएगी.
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पहले वर्ष: पौधरोपण और प्रारंभिक व्यवस्था के लिए ₹1.62 लाख
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दूसरे वर्ष: रखरखाव एवं देखभाल के लिए ₹1.08 लाख
इस अनुदान से किसानों पर शुरुआती निवेश का बोझ काफी कम हो जाता है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस खेती को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं.
किन किसानों को मिलेगा लाभ?
योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास न्यूनतम 0.25 एकड़ और अधिकतम 5 एकड़ तक कृषि भूमि होना आवश्यक है. बिहार सरकार ने फिलहाल इस योजना के लिए राज्य के 23 जिलों का चयन किया है, जहां के किसान आवेदन कर सकते हैं.
इन जिलों में अररिया, अरवल, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, जमुई, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, सारण, शेखपुरा और सीवान शामिल हैं.
ऑनलाइन कैसे करें आवेदन?
योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को उद्यानिकी विभाग की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. आवेदन के समय आधार कार्ड, पैन कार्ड, फार्मर आईडी, बैंक खाते का विवरण, पासपोर्ट साइज फोटो तथा भूमि संबंधी दस्तावेज जमा करना आवश्यक है.
यदि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की समस्या आती है, तो किसान राज्य सरकार की हेल्पलाइन 1800-180-1551 पर संपर्क कर सकते हैं.
लेखक: रवीना सिंह
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