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कर्ज माफी के नाम पर किसानों के साथ धोखा, 6 माह में 397 किसानों ने की आत्महत्या !

किसानों से कर्ज माफी का वादा इन दिनों जीत का सुपरहिट फॉर्मूला बन गया है. हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में किसानों से कर्ज़माफी के वादे ने सत्ता से बेदखल कांग्रेस पार्टी को तीन राज्यों की सत्ता में वापस ला दिया है. 3 राज्यों की जीत से उत्साहित कांग्रेस ने भी सत्ता में आते ही अपने चुनावी वादों को पूरा करना शुरू कर दिया है. लेकिन ये दांव कांग्रेस पर अब उलटा पड़ रहा हैं और इसको लेकर सियासी जगत में बयानबाजी शुरू हो गई है.

दरअसल कर्ज माफी जैसे मुद्दों के सहारे बड़ी जीत हासिल करने में सफल रही कांग्रेस पर भारतीय जनता पार्टी अब उसी हथियार से पलटवार में जुट गई है. कांग्रेस शासित पंजाब और कर्नाटक में अब तक कर्जमाफी के लिए कोई गंभीर कदम न उठाए जाने और कर्नाटक में अब तक लगभग 397 किसानों की आत्महत्या का हवाला देते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है तो वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि इन राज्यों में किसान बैंक के नोटिस से परेशान हैं और खोखले वादे करने वाले राहुल गांधी को ये किसान सोने नहीं देंगे.

3 राज्यों की जीत से उत्साहित कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आगामी लोकसभा के चुनाव में भी इसे ही मुद्दा बनाने का ऐलान कर दिया है. इससे जाहिर है कि केंद्र की राज्य सरकार को इसका तोड़ ढूंढना होगा. लिहाज़ा भाजपा ने आंकड़ों के साथ अब कांग्रेस पर वार करना शुरू कर दिया है. केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि 'कांग्रेस सिर्फ राजनीति के लिए किसानों को धोखा दे रही है. पंजाब में कांग्रेस की सरकार बने डेढ़ साल हो गए हैं. वादे के अनुसार वहां माफी के लिए 90 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है. लेकिन पंजाब सरकार ने बजट में मात्र तीन हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है और वह कर्ज भी माफ नहीं किया गया है तो वहीं कर्नाटक में 45 हजार करोड़ रुपये की कर्जमाफी का कांग्रेस ने वादा किया था और अभी तक 75 करोड़ रुपये कर्ज भी माफ नहीं किए गए हैं. उन्होंने आगे कहा कि 'बैंको से कहा जा रहा है वह कर्ज माफ कर दें. बैंकों के पास तो लोगों के पैसे हैं वह कैसे माफ करें'.

विशेषज्ञों की चेतावनी

रिजर्व बैंक ने जुलाई में एक रिपोर्ट में कहा था कि ‘कर्जमाफी शॉर्ट टर्म के लिए बैंकों के बैलेंस शीट को साफ कर सकता है. इससे बैंक लॉन्ग टर्म में कृषि कर्ज बांटने से हतोत्साहित होते हैं.’ ज़्यादातर अर्थशास्त्रियों ने भी कर्जमाफी को लेकर सरकारों को चेताया है, जिसमें रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी शामिल हैं. रघुराम राजन ने कहा कि ‘उन्होंने चुनाव आयोग से चुनाव पूर्व इस तरह की घोषणाओं पर रोक लगाने की भी मांग की है.’ नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने बताया कि, ‘कृषि क्षेत्र में संकट के लिए कृषि ऋण माफी कोई समाधान नहीं है बल्कि इससे केवल कुछ ही समय के लिए किसानों को राहत मिलेगी.’

विवेक राय, कृषि जागरण 



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