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किसानों की समृद्धि और खाद्य तेल में आत्मनिर्भरता के लिए बिहार में ऑयल पाम की खेती को मिलेगा बढ़ावा
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ऑयल पाम किसानों को देगा लंबे समय तक उत्पादन और स्थिर आय का अवसर
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किसानों की खुशहाली के साथ देश की खाद्य तेल आवश्यकता पूरी करने में बिहार निभाएगा महत्वपूर्ण भूमिका
बिहार सरकार के कृषि विभाग द्वारा राज्य में किसानों की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने तथा देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से “नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल पाम (NMEO-OP) योजना का राज्य में विस्तार किया जा रहा है. योजना के माध्यम से राज्य के उपयुक्त जलवायु वाले क्षेत्रों में ऑयल पाम की वैज्ञानिक खेती को प्रोत्साहित करने के साथ किसानों को दीर्घकालिक एवं स्थिर आय का अवसर उपलब्ध कराने, रोजगार सृजन तथा तेल मिलों एवं प्रसंस्करण इकाइयों में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
किन जिलों से होगी योजना की शुरुआत?
बिहार में ऑयल पाम की खेती के लिए शुरुआती चरण में अररिया, पूर्णिया, किशनगंज, पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण जिलों को चिन्हित किया गया है. इन क्षेत्रों की उपयुक्त जलवायु को देखते हुए यहां किसानों को ऑयल पाम की आधुनिक तकनीक से खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार, राज्य सरकार कृषि को अधिक लाभकारी बनाने के लिए लगातार नई संभावनाओं पर काम कर रही है. ऑयल पाम को ऐसी दीर्घकालिक फसल के रूप में देखा जा रहा है, जो उपयुक्त क्षेत्र के किसानों को अतिरिक्त और अपेक्षाकृत स्थिर आय का अवसर दे सकती है.
पौध सामग्री के लिए कितनी मिलेगी वित्तीय सहायता?
बिहार सरकार NMEO-OP योजना के तहत ऑयल पाम लगाने वाले किसानों को पौध सामग्री की खरीद के लिए ₹29,000 प्रति हेक्टेयर तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएंगी. इससे किसानों को बागान स्थापित करने की शुरुआती लागत में मदद मिलेगी.
इसके अलावा पौधों के रोपण के बाद शुरुआती चार वर्षों में फसल के रखरखाव और रिक्त स्थानों में अंतरवर्ती फसलों की खेती के लिए ₹10,500 प्रति हेक्टेयर का विशेष अनुदान भी उपलब्ध कराया जाएगा.
कीमतों में गिरावट से बचाव के लिए Viability Price
ऑयल पाम की खेती में किसानों के सामने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे पाम तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का जोखिम रहता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने योजना में ‘Viability Price’ की व्यवस्था की है. इसके तहत बाजार मूल्य में गिरावट आने की स्थिति में निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र सरकार द्वारा अंतर राशि की भरपाई की जाएगी. इसका उद्देश्य किसानों को कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के संभावित प्रभाव से सुरक्षा प्रदान करना है.
ड्रिप सिंचाई और कृषि यंत्रों पर मिलेगी मदद
ऑयल पाम की खेती में जल प्रबंधन को महत्वपूर्ण माना जाता है. किसानों को सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली पर निर्धारित सरकारी मानदंडों के अनुसार अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा. यानी की किसानों के लिए कटाई और प्रसंस्करण से जुड़े कृषि यंत्रों पर भी नियमानुसार सहायता का प्रावधान रखा है. इससे खेती के दौरान श्रम एवं प्रबंधन संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में किसानों को मदद मिल सकती है.
FFB की खरीद के लिए उद्योगों से जोड़ा जाएगा
ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के साथ सरकार किसानों के लिए बाजार व्यवस्था विकसित करने पर भी जोर दे रही है. किसानों द्वारा उत्पादित Fresh Fruit Bunches की खरीद के लिए उपज बेचने के लिए बेहतर और व्यवस्थित बाजार उपलब्ध कराएंगी, जिससे किसानों की मुनाफे की संभावनाएं बढ़ेंगी.
ऑयल पाम की खेती से कितने सालों तक मिलता है उत्पादन?
अगर किसान भाई ऑयल पाम की खेती करते हैं, तो लंबे समय तक अच्छी उपज प्राप्त कर सकते हैं. कृषि विभाग के अनुसार, इस फसल की सही देखभाल से किसान करीब 25 से 30 वर्षों तक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं. साथ ही बता दें कि भारत वर्तमान में अपनी खाद्य तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है. ऐसे में घरेलू स्तर पर तिलहन और ऑयल पाम का उत्पादन बढ़ाने को खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
योजना में शामिल होने के लिए कहां मिलेगी जानकारी?
योजना का लाभ लेने और आवेदन से जुड़ी जानकारी प्राप्त करने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी जिला उद्यान कार्यालय या प्रखंड उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा विभागीय आधिकारिक DBT पोर्टल और बिहार कृषि ऐप के माध्यम से भी योजना की जानकारी प्राप्त की जा सकती है.
लेखक: रवीना सिंह
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