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एफपीओ के गठन को लेकर कार्यशाला का आयोजन

राज्य में किसानों के फसल उत्पादों को बेहतर बाजार एवं उच्च्तम मूल्य दिलाने के लिए फारमर्स प्रोड्यूसर ऑरगेनाइजेशन (एफ०पी०ओ०) के गठन करने के उद्देश्य से एफ०पी०ओ० संचालक संस्थाओं, विशेषज्ञों तथा राज्य के सभी जिलों के प्रगतिशील किसानों के साथ विचार-विमर्श एवं आवश्यक रणनीति तैयार करने हेतु आज बामेती, पटना के सभागार में एक कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कर्मशाला का उद्घाटन कृषि मंत्री, बिहार डा० प्रेम कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. इस अवसर पर सुनिल कुमार सिंह, कृषि उत्पादन आयुक्त,  सुधीर कुमार, प्रधान सचिव, कृषि विभाग,  अरविन्दर सिंह, निदेशक उद्यान,  धनंजयपति त्रिपाठी, निदेशक, पी०पी०एम०,  गणेश राम, निदेशक बामेती, नाबार्ड के प्रतिनिधि, लघु कृषक कृषि व्यापार संगठन के प्रतिनिधि, बागरी के प्रतिनिधि, फार्म एण्ड फारमर्स, पटना, क्षितिज एग्रो टेक, पटना, कौशल्या फाउंडेशन, पटना तथा सभी परियोजना निदेशक, आत्मा एवं 500 किसान एवं उद्यमीगण उपस्थित थे.

कृषि मंत्री डॉ० प्रेम कुमार ने कहा कि किसान उत्पादक संगठन के गठन का उद्देश्य लघु स्तर के उत्पादकों विशेष रूप से छोटे एवं सीमान्त किसानों को एकीकृत कर समूह के माध्यम से उनके हितों का संरक्षण करना, किसानों को बीज, उर्वरक, मशीनों की आपूर्ति, मार्केटिंग लिंकेज हेतु परामर्श एवं तकनीकी सहायता देना, किसानों को प्रशिक्षण, नेटवर्किंग, वित्तीय एवं तकनीकी परामर्श देना, किसानों को ऋण की उपलब्धता कराना, किसानों का उत्पादन से लेकर विपणन तक की समस्या का समाधान करना तथा किसानों के आय में वृद्धि एवं उन्हें स्वाबलम्बी बनाना है.

कृषि मंत्री ने कहा कि किसानों द्वारा व्यक्तिगत रूप से खाद्यान्न, दलहनी, तेलहनी, सब्जी, फल-फूल एवं अन्य फसलों की खेती की जा रही है. किसी व्यक्तिगत किसान द्वारा उत्पादित उत्पाद काफी कम होने के कारण उसके बिक्री के लिए किसान को अपने उत्पाद को या तो बिचौलिए के माध्यम से अथवा स्थानीय बाजार में ले जाकर इसकी बिक्री की जाती है. उत्पाद की मात्रा काफी कम होने के कारण उन्हें बाजार ले जाने में भी काफी भाड़ा लग जाता है. उपर्युक्त कठिनाईयों के आलोक में कृषि एवं सहकारिता विभाग, कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा राज्यों के साथ मिलकर वर्ष 2011-12 में कृषक उत्पादक संगठन का गठन करने का निर्णय लिया गया. इसे राज्यों में लघु किसान कृषि व्यापार संगठन (एस०एफ०ए०सी०) के माध्यम से कार्यान्वित किया गया. प्रारंभिक तौर पर एक कृषक उत्पादक संगठन में औसतन 1000 किसानों को सम्मिलित कर 250 किसान उत्पादन संगठन (एफ०पी०ओ०) का गठन करने का निर्णय लिया गया था.

डॉ. प्रेम कुमार  ने कहा कि आत्मा योजना अंतर्गत 20-25 किसानों को मिलाकर किसान हित समूह एवं महिला किसान समूहों का गठन किया जा रहा है. इन समूहों को आत्मा से निबंधित कर एवं उनके व्यवसाय के क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है. आत्मा द्वारा गठित किसान समूहों में किसानों की संख्या कम होने के कारण उनके उत्पाद भी बहुत ज्यादा नहीं होते हैं इस कारण से उन्हें बड़ा बाजार नहीं मिल पाता है. इन समूह के सदस्यों को उचित लाभ नहीं मिलने के कारण समूह भी निष्क्रीय हो रहे हैं. अगर 05 या 05 से अधिक कृषक उत्पादक समूहों को पंचायत/प्रखंड स्तर पर एकीकृत कर किसान उत्पादक संगठन का गठन किया जाए तो उत्पादित मात्रा ज्यादा होने से बड़े व्यापारी स्वयं उत्पादन स्थल से आकर उत्पादित सामग्री को क्रय कर ले जायेंगे. इससे किसानों को बिचौलिए से मुक्ति मिलेगी तथा उन्हें अपने उत्पाद का अधिक-से-अधिक लाभ मिल सकेगा. आत्मा द्वारा गठित 5 से 10 किसान एवं महिला समूहों को मिलाकर एफ०पी०ओ० का गठन करने के उद्देश्य से आज के कर्मशाला का आयोजन किया गया है. 12 प्रखंड वाले प्रत्येक जिले को 02 तथा 12 प्रखंड से अधिक प्रखंड वाले जिले को 03-03 कृषक उत्पादक संगठन के गठन करने का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2017-18 में निर्धारित किया गया है तथा वित्तीय वर्ष 2018-19 में इसे और प्रभावकारी एवं गठन करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाएगी.

कृषि मंत्री ने कहा कि अभी तक देश में कॉरपोरेट सेक्टर को ही इनकम टैक्स में छूट का प्रावधान था, लेकिन फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफ०पी०ओ०) जो कृषि एवं किसानों के विकास के लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है, उसे इनकम टैक्स में छूट नहीं मिलता था, लेकिन अब केन्द्र सरकार के घोषणा के अनुरूप यह लाभ इनको भी मिलेगा. इसलिए किसानों की मदद के लिए जो फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन को सहकारी समितियों की तरह छूट देने का निर्णय लिया गया है, यह कृषि के विकास में मील का पत्थर साबित होगा.

उन्होंने बताया कि राज्य में किसान अपने स्वयं के संसाधनों से जैविक खेती कर रहे हैं तथा जिलों में भूमि एवं भौगोलिक स्थिति तथा उपयुक्तता के आलोक में किसान विशेष फसलों का उत्पादन कर कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं. बिहार सब्जी के उत्पादन में तीसरे स्थान पर है. फल एवं अन्य विशेष फसलों यथा फूल की खेती, मधुमक्खीपालन, मशरूम पालन, औषधीय एवं सुगंधित पौध, मखाना की खेती, बेवीकॉर्न की खेती, स्ट्राबेरी की खेती, ओल की खेती, अनानास की खेती आदि फसलों की खेती कर रहे हैं. इन फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता कम होने के कारण किसानों को इसका उचित लाभ नहीं मिल रहा है. इसलिए जिला में विशेष फसल की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कृषि रोडमैप में जिलावार विशेष फसलों को चिन्हित किया गया है. विभाग इन फसलों की उत्पादकता एवं गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार कर रही है. इसके लिए यह आवश्यक है कि जिलों में आ रही कठिनाईयों के समाधान के लिए उत्पादित किसानों से इसके लिए उनसे सुझाव प्राप्त किया जाए. इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किसानों से सुझाव प्राप्त कर आगामी वर्ष के लिए कार्ययोजना तैयार करने हेतु आज की इस कर्मशाला का आयोजन किया गया है.

English Summary: Bihar News 4

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