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बस्तर की महिलाओं के हर्बल, मसाले ,मिलेट्स को 'एमडी बोटैनिकल्स' के ब्रांड अंब्रेला से दिलाया बेहतर बाजार,और मूल्य
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चार गुना उत्पादन वाली विशेष बस्तरिया काली-मिर्च का राष्ट्रीय पंजीकरण,
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सम्मान बस्तर की आदिवासी महिलाओं को समर्पित
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सुप्रीम कोर्टतक तक कार्य कर चुकीं (डबल-एल. एल. एम.) एडवोकेट अपूर्वा डबल, अब आदिवासी सशक्तिकरण में समर्पित
बागवानी विज्ञान और जैविक उद्यमिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बस्तर की युवा उद्यमी एवं अधिवक्ता अपूर्वा त्रिपाठी को “SHRD -श्रीमती सरोज सिंह मेमोरियल उद्यमिता पुरस्कार 2025” से सम्मानित किया गया. यह राष्ट्रीय स्तर का प्रतिष्ठित सम्मान सोसाइटी फॉर हॉर्टिकल्चर रिसर्च एंड डेवलपमेंट, उत्तर प्रदेश द्वारा चतुर्थ भारतीय बागवानी शिखर सम्मेलन सह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन 2026 के दौरान प्रदान किया गया. कार्यक्रम का आयोजन रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी में 28 से 30 जनवरी तक हुआ.
अपूर्वा त्रिपाठी को यह सम्मान बागवानी विज्ञान, जैविक खेती और विशेष रूप से बस्तर क्षेत्र में आदिवासी महिलाओं के साथ किए गए उनके अभिनव कार्यों के लिए प्रदान किया गया. उन्होंने “मां दंतेश्वरी हर्बल समूह” के माध्यम से बस्तर की आदिवासी महिलाओं द्वारा उगाई गई जैविक हर्बल उत्पादों, मसालों और श्री अन्न अर्थात मिलेट्स को संगठित कर उन्हें निःशुल्क प्रसंस्करण प्रशिक्षण प्रदान किया. इन उत्पादों को “एमडी बोटैनिकल्स” के अंब्रेला ब्रांड के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के साथ देश और विदेश के उपभोक्ताओं तक पहुँचाने का सफल मॉडल विकसित किया.
कोरोना काल में 25 लाख रुपये के कॉरपोरेट पैकेज को त्यागकर अपनी जड़ों से जुड़ने और बस्तर की आदिवासी महिलाओं के साथ कार्य करने का उनका निर्णय आज एक सशक्त सामाजिक-आर्थिक आंदोलन का रूप ले चुका है. बस्तर में जन्मी और शिक्षित अपूर्वा ने स्थानीय संसाधनों को वैश्विक पहचान दिलाने का संकल्प व्यवहार में सिद्ध किया है.
उनकी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बस्तर में विकसित विशेष काली मिर्च की प्रजाति “मां दंतेश्वरी काली मिर्च-16” को भारत सरकार की प्लांट वैरायटी रजिस्ट्रेशन एंड प्रोटेक्शन अथॉरिटी में पंजीकृत कराना है. यह प्रजाति सामान्य किस्मों की तुलना में चार गुना अधिक उत्पादन देने तथा उच्च गुणवत्ता के लिए जानी जाती है, जो क्षेत्रीय नवाचार का एक कीर्तिमान उदाहरण है.
पेशे से अधिवक्ता अपूर्वा त्रिपाठी ने कोलकाता और मुंबई उच्च न्यायालय सहित भारत के सर्वोच्च न्यायालय में भी विधिक कार्य किया है, किंतु उन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव को बस्तर की धरती और वहां की महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए समर्पित किया.
इस उपलब्धि पर मां दंतेश्वरी हर्बल समूह, संपदा समाजसेवी संस्थान, साथी समाजसेवी संस्थान, विकास मित्र समाजसेवी संस्थान तथा जन-शिक्षण संस्थान कोंडागांव ने हर्ष व्यक्त करते हुए इसे बस्तर, छत्तीसगढ़ और पूरे देश का गौरव बताया.
सम्मान प्राप्त करते हुए अपूर्वा त्रिपाठी ने कहा कि यह उपलब्धि उनकी नहीं, बल्कि बस्तर की उन आदिवासी महिलाओं की है जिनके परिश्रम, समर्पण और आशीर्वाद से यह संभव हुआ है. उन्होंने अपना यह राष्ट्रीय पुरस्कार बस्तर की आदिवासी महिलाओं को समर्पित करते हुए कहा कि वास्तविक उद्यमिता वही है जो समाज के अंतिम व्यक्ति तक सम्मान और आत्मनिर्भरता पहुँचाए.
यह सम्मान केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि बस्तर की धरती से उठी जैविक क्रांति की राष्ट्रीय स्वीकृति के रूप में देखा जा रहा है.
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