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पढ़ाई पूरी करने के बाद छह माह फील्ड में काम करना होगा: राधामोहन सिंह

भागलपुर में 24 फरवरी को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह को सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय के प्रांगण में तीन दिवसीय क्षेत्रीय किसान मेला में छह राज्यों से आए किसान प्रतिनिधियों को संबोधित किया।  राधामोहन सिंह ने किसानों से आह्वान किया है कि वे आमदनी बढ़ाने के लिए केवल गेहूं व धान की खेती पर ही निर्भर नहीं रहें। इसके लिए उद्यान, डेयरी, मत्स्य पालन व मधुमक्खी पालन आदि रोजगार की ओर उन्हें बढ़ना होगा। देश में जमीन की तुलना में आबादी अधिक है। इस कारण सभी के लिए खाद्य सुरक्षा जरूरी है। इस मेले में बिहार, असम, बंगाल, झारखंड, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसान भाग ले रहे हैं।

तीन दिवसीय मेले में उन्हें खेती की नई तकनीकों व कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे शोधों की जानकारी दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जिन क्षेत्रों से किसान यहां आए हैं  उन क्षेत्रों में देश का 50 फीसद चावल उत्पादन होता है। देश की 45 फीसद सब्जियां और 38 फीसद मछलियों का भी यहां उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि कुशल मानव संसाधन से ही देश का विकास हो सकता है। इसके लिए अच्छे डॉक्टर अच्छे शिक्षक व अच्छे विद्यार्थी का होना जरूरी है। विभिन्न आयोगों की सिफारिशें लागू की गईं। कृषि का अब चार वर्ष का कोर्स हो गया है। तीन साल की पढ़ाई पूरी करने के बाद छह माह फील्ड में काम करना होगा। इसमें छात्रवृत्ति की राशि बढ़ा दी गई है। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार में कृषि का बजट बढ़ा है। मंत्री ने कहा कि मिट्टी की हेल्थ जांच नियमति नहीं होने से उपज पर इसका प्रभाव पड़ा है। सरकार ने इस जांच को कृषि विज्ञान के पाठ्यक्र में शामिल करने का निर्णय लिया है। इस पाठ्यक्रम की शिक्षा को रोजगार से भी जोड़ा जाएगा। यह देखा गया है कि पूर्वोत्तर राज्यों में मिट्टी की हेल्थ जांच की प्रगति धीमी है। इस पाठ्यक्रम को रोजगारपरक बनाने की कोशिश हो रही है। मेले में बिहार के कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार व बिहार कृषि विद्यालय सबौर के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने भी अपने विचार रखे।

 

 

संदीप कुमार
कृषि जागरण / पटना



English Summary: After completing the course, six months will work in the field: Radha Mohan Singh

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