क्षेत्रीय किसान मेला- 2018 में किसानों को किया गया सम्मानित

पूर्वोतर क्षेत्रीय किसान मेला- 2018 बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर में उड़ीसा के दो किसानों के साथ 21 किसानों को सम्मानित किया गया। दो उत्कृष्ट प्रसार वैज्ञानिक के पुरस्कार भी दिए गए। वस्तु विशेषज्ञ (गृह विज्ञान) की डॉ. रीता और विषय वस्तु विशेषज्ञ (उद्यान) की डॉ. सुनीता कुशवाहा को पुरस्कृत किया गया। ये किसान सालाना 70 हजार से सात लाख तक सालाना मुनाफा कमा रहे हैं।

 

मेले का विवरणः

मेले का नाम- क्षेत्रीय किसान मेला-2018

मेले की तिथि- 24 से 26 फरवरी, 2018

मेले का स्थान- बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर, भागलपुर

 

सम्मान मिने वालो किसानों के नाम

रमेशचन्द्र पटनायक, उड़ीसा: जैविक मशरूम की खेती कर रहे हैं। भूसा के जीवाणु नाशन के लिए नीम तेल प्रयोग करते हैं। मशरूम उत्पादन से 20 हजार रु पए मासिक मुनाफा कमा रहे हैं।

फिरोज साहू, उड़ीसा बारगढ़: 20 एकड में उद्यान आधारित खेती कर रहे हैं। वे फलों में सूक्ष्म सिंचाई तकनीक का प्रयोग करते हैं। ये उद्यानिक फसलों के जरिए 80 हजार महीना कमा रहे हैं।

चितरंजन कुमार, परैया, गया: मधुमक्खी पालन से 20 लाख सालाना कमा रहे हैं। उनके पास अभी 600 मधुमिक्खयों के बक्से हैं।

रंजय पासवान, अलौली, खिगडया: मुर्गी व बकरी पालन से दो लाख रु पए सालाना आमदनी हो रही है। उनके पास 400 मुर्गी और 10 बकरी और दो गाय हैं।

रंजन कुमार सुमन, गोराडीह, भागलपुर: धान की सीधी बुआई व गेहूं बुआई की है। सालाना 8-9 लाख रु पए की आमदनी हो रही है।

देवेंद्र प्रसाद वर्मा, बकोर, सुपौलः 30 एकड जमीन लीज पर लेकर वैज्ञानिक विधि से मखाना एवं मछली उत्पादन कर रहे हैं। उनके पास खुद की 10 एकड जमीन भी है। उनकी सालाना आमदनी 6 लाख है।

आनंद मोहन सिंह, धरहरा, मुंगेरः वैज्ञानिक तरीके से विभिन्न फसलों में जल प्रबंधन कर 5 हेक्टेयर जमीन से होने वाली वार्षिक आय में 20-25 फीसद तक वृद्धि की। सालाना आय लगभग 10 लाख रु पए तक बढ़ाया।

मो. मुशिफक आलम, कुचियाबाड़ी, किशनगंजः श्री विधि से धान तथा गेहूं की जीरोटिलेज विधि से खेती के अलावा हल्दी, अदरक, चाय बगान तथा मुर्गी पालन भी करते हैं। वार्षिक आय 3.5 लाख है।

टुनटुन मंडल, मनसाही, किटहारः 1.5 एकड में मुर्गी व सुअर पालन कर सालाना 3.5 लाख आमदनी कर रहे हैं। उन्होंने भावना किसान क्लब बनाया।

अनिल कुमार सिन्हा, चंडी प्रखंड, नालंदाः डेढ एकड में मुर्गीपालन, मशरूम व मधु उत्पादन करते हैं। समेकित प्रणाली के आधुनिक तकनीकों से आमदनी में सालाना 60,000 का इफाजा हुआ है।

कुमार प्रेमचंद्र, तिलौथू, रोहतासः समेकित कृषि प्रणाली से मत्स्य पालन करते हैं और रोहतास एवं आसपास के किसानों को प्रशिक्षण देते हैं।

गौरवराज, हुलासगंज, जहानाबादः मशरूम उत्पादन कर रहे हैं। महज 6 डिसमिल में दो लाख रु पए सालाना आमदनी है।

मो. सिद्धिक, कहरा, सहरसाः सिब्जयों की अगात खेती करके और उनका ससमय बाजारीकरण कर कम क्षेत्नफल में भी अधिक आमदनी ले रहे हैं।

आशा देवी, पूर्णियाः केवीके के प्रशिक्षण से बेजान पड़े खेतों में सब्जी और धान का उत्पादन शुरू किया। आमदनी 70 हजार सालाना हो गई। वे फिलहाल नीम आधारित कीटनाशक बना रही हैं।

मीणा देवी, अरवल, मुरादपुरः कृषि विज्ञान केन्द्र से नई तकनीक अपनाकर साग सिब्जयों की अगात खेती कर कम क्षेत्नफल में ज्यादा मुनाफा ले रही हैं। इनकी 2 एकड क्षेत्नफल से आमदनी लगभग 2 लाख रु पये सालाना है।

शशिकांत कुमार, शेखपुराः मुर्गी पालन, जैविक खाद उत्पादन, मछली पालन और बागवानी से अपनी 6 एकड जमीन पर समेकित कृषि प्रणाली से आधुनिक तकनीक का प्रयोग कर 500 से 1000 रु पये की आमदनी प्राप्त कर रहे हैं।

विनोद कुमार साह, ग्वालपारा, मधेपुराः जीरोटिलेज मशीन से धान एवं गेहूं की बुआई कर रहे हैं। धान की सीधी बुआई से खेत की तैयारी कर सालाना लगभग 80 हजार रु पये की पूंजी बचा ले रहे हैं।

ब्रजिकशोर मेहता, कुटुम्बा, औरंगाबादः स्ट्राबेरी की खेती करते हैं। हिसार, हरियाणा से स्ट्राबेरी के पौधे मंगाएं और अब करीब 5 लाख रु पये की आमदनी केवल स्ट्राबेरी की खेती से कर रहे हैं।

नीतू कुमारी, बांकाः मशरूम उत्पादन के लिए 100 बैग लगाती हैं जिससे लगभग 2 से 2.5 लाख प्रति वर्ष आमदनी होती है।

दिलीप मेहता, फारिबसगंज, अररियाः गांव में आधुनिक तकनीक से मक्का, सब्जी, आलू और नारियल के खेती कर तीन हेक्टेयर में लगभग 4 लाख रु पए सालाना कमा रहे हैं।

मृत्युंजय कुमार, बाढ़, पटनाः इंजीनियरिंग करने के बाद नौकरी छोड़ी और खेती करने लगे। समेकित कृषि प्रणाली से 10 विदेशी नस्ल की गाय का पालन सालाना 7 लाख कमा रहे हैं।

 

संदीप कुमार

कृषि जागरण / पटना

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